
✍️ भागीरथी यादव
पटना।
बिहार की राजधानी पटना में जमीन खरीदकर घर बनाने का सपना अब मिडिल क्लास के लिए लगभग नामुमकिन होता नजर आ रहा है। राज्य के दूसरे जिलों से आकर पटना में बसने की चाह रखने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह सपना अब “दूर के चांद” जैसा बनता जा रहा है। इसकी वजह है—पटना में जमीन की सरकारी कीमत यानी सर्किल रेट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की तैयारी।
सूत्रों के अनुसार पटना में जमीन की कीमतें अब तीन गुना नहीं, बल्कि चार गुना तक बढ़ाई जा सकती हैं। खासकर अटल पथ, गोला रोड और नहर रोड के किनारे स्थित व्यावसायिक जमीनों की सर्किल दर चार गुनी तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इतना ही नहीं, शहर की पुरानी और प्रमुख व्यावसायिक सड़कों पर जमीन की सरकारी दर बाजार मूल्य के अनुरूप 410 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है। जिला निबंधन कार्यालय ने इस संबंध में निबंधन विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है।
किस इलाके में कितनी बढ़ोतरी संभव
प्रस्ताव के अनुसार—
व्यावसायिक मुख्य सड़क के पास: 380% तक
व्यावसायिक सहायक सड़क के पास: 350% तक
आवासीय मुख्य सड़क के पास: 265% तक
आवासीय सहायक सड़क के पास: 200% तक बढ़ोतरी हो सकती है
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी जिलों से इसी तरह के प्रस्ताव मंगाए गए हैं। समीक्षा के बाद अंतिम मसौदा तैयार होगा, जिस पर राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) अंतिम फैसला लेगा।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा उछाल
पटना की कई प्रमुख व्यावसायिक सड़कों पर सर्किल दर में भारी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है—
400% तक: राजाबाजार, खाजपुरा, मीठापुर, फ्रेजर रोड, जमाल रोड, एग्जीबिशन रोड, कंकड़बाग, खेतान मार्केट, पटना मार्केट, हनुमान नगर, बोरिंग रोड, गांधी मैदान, बेली रोड
390%: शेखपुरा
350%: अनीसाबाद, न्यू पाटलिपुत्र, पाटलिपुत्र कॉलोनी, लोदीपुर, राजेंद्रनगर गुमटी, काजीपुर, खगौल रोड, न्यू बाइपास रोड
320%: बंगाली टोला, कदमकुआं, सादिकपुर योगी
300%: जक्कनपुर
9 साल बाद सर्किल दर में बड़ा बदलाव
गौरतलब है कि पटना में करीब 9 साल पहले तय की गई सर्किल दर के आधार पर ही अब तक जमीन की रजिस्ट्री हो रही है। जमीन की खरीद-बिक्री पर 10 प्रतिशत रजिस्ट्री शुल्क लगता है, ऐसे में सर्किल रेट बढ़ने से राज्य सरकार के राजस्व में भी भारी इजाफा होने की उम्मीद है।
15 साल का उदाहरण: बोरिंग रोड
बोरिंग रोड (व्यावसायिक मुख्य सड़क) पर सर्किल दर का इतिहास भी चौंकाने वाला है—
2010: 5 लाख रुपये
2011: 10 लाख (100% बढ़ोतरी)
2012: 12.20 लाख (22%)
2013: 23.40 लाख (92%)
2014: 21.06 लाख
2016: 40 लाख रुपये
इसके बाद वर्षों तक कोई बदलाव नहीं हुआ। अब नए प्रस्ताव लागू होते ही पटना में जमीन के सरकारी मूल्य में अब तक की सबसे बड़ी छलांग लगने की पूरी संभावना है।
मिडिल क्लास पर सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सर्किल रेट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से पटना में जमीन खरीदना आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाएगा। घर बनाने का सपना देख रहे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए राजधानी में बसना अब और भी मुश्किल हो सकता है।
कुल मिलाकर, पटना में जमीन अब निवेशकों और बड़े कारोबारियों की प्राथमिकता बनती दिख रही है, जबकि मिडिल क्लास के लिए यह सपना धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है।








