
✍️ भागीरथी यादव
एमसीबी।
मनेंद्रगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत चनवारीडांड में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और खरीद–फरोख्त का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि भू-माफियाओं द्वारा कई शासकीय खसरा नंबरों पर कब्जा कर न केवल मकान निर्माण कर लिया गया, बल्कि जमीन के टुकड़ों की अवैध बिक्री भी की गई है।
इस संबंध में ग्राम पंचायत चनवारीडांड के पूर्व सरपंच राम सिंह मरावी ने जिला कलेक्टर एमसीबी को लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। आवेदन में बताया गया है कि राजस्व निरीक्षक मंडल मनेन्द्रगढ़ (ग्रामीण) के अंतर्गत आने वाली शासकीय भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है।
इन खसरा नंबरों पर अतिक्रमण का आरोप शिकायत के अनुसार,
खसरा नंबर 263 (रकबा 0.7000 हेक्टेयर)
खसरा नंबर 261 (रकबा 0.2900 हेक्टेयर)
खसरा नंबर 250 (रकबा 2.6100 हेक्टेयर)
खसरा नंबर 252 (रकबा 0.6100 हेक्टेयर)
इन भूमि खंडों पर कहीं अवैध रूप से आवासीय निर्माण कर लिया गया है, तो कहीं जमीन की अवैध खरीद-बिक्री हो चुकी है। इससे शासन को राजस्व नुकसान हो रहा है और ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
चार प्रमुख मांगें रखीं
पूर्व सरपंच द्वारा दिए गए आवेदन में प्रशासन से
राजस्व अमले से मौके पर जांच कराने,
अतिक्रमण हटाकर भूमि को शासन के कब्जे में लेने,
दोषियों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई करने,
तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को अतिक्रमण मुक्त शासकीय भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के कई आवेदन केवल भूमि उपलब्ध न होने के कारण निरस्त हो चुके हैं। यदि शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाया जाए तो जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ मिल सकता है।
जांच आदेश के बाद भी प्रगति नहीं
पूर्व सरपंच का आवेदन कलेक्टर जनदर्शन में पत्र क्रमांक 2290125001022 के तहत दर्ज किया गया था। प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार यह प्रकरण 23 सितंबर 2025 को तहसीलदार मनेन्द्रगढ़ को जांच हेतु भेजा गया, जिसकी जिम्मेदारी तहसीलदार श्रीकांत पाण्डेय को सौंपी गई थी।
इसके बावजूद अब तक न तो स्थल जांच की गई और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई सामने आई है। लंबे समय से प्रकरण लंबित रहने के कारण प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब ठोस कदम उठाता है या शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का यह गंभीर मामला कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।
