कटघोरा का सांस्कृतिक भवन बना कूड़े का ढेर, नगर पालिका की लापरवाही से आस्था और स्वास्थ्य दोनों खतरे में
कोरबा/कटघोरा | 16 दिसंबर 2025 कटघोरा नगर पालिका की घोर लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। वार्ड क्रमांक 4 में स्थित नगर का सांस्कृतिक भवन, जो कभी सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजनों की पहचान हुआ करता था, आज बदहाली, गंदगी और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि यह भवन अब “सांस्कृतिक केंद्र” नहीं, बल्कि खुले कूड़े का अड्डा नजर आ रहा है। नगर पालिका परिषद के अधीन होने के बावजूद भवन की देखरेख पूरी तरह से उपेक्षित है। भीतर का नजारा और भी चिंताजनक है—टूटे हुए शौचालय, क्षतिग्रस्त सभागार, जर्जर कमरे और चारों ओर फैली गंदगी नगर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव में भवन की उपयोगिता लगभग समाप्त हो चुकी है। किराया वसूली, जिम्मेदारी शून्य! सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी बदहाल भवन को नगर पालिका विवाह समारोह और अन्य आयोजनों के लिए किराए पर देती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई मामलों में भवन बिना किराया लिए भी दे दिया जाता है, वहीं तय किराया भी नाममात्र का है। इसके बावजूद आयोजनों के बाद सफाई और कचरा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की जाती। परिणामस्वरूप समारोहों के बाद बचा हुआ भोजन, डिस्पोजेबल सामग्री और मांसाहार से जुड़ा कचरा खुले में फेंक दिया जाता है। इससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है और मवेशी इस जहरीले कचरे को खाते हुए नजर आ रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। आस्था पर भी चोट स्थिति यहीं नहीं रुकती। मांस की हड्डियां और अवशेष कुत्तों द्वारा उठाकर बाजार मोहल्ला स्थित राधा-कृष्ण मंदिर तक पहुंचा दिए जा रहे हैं। इससे न केवल स्वच्छता भंग हो रही है, बल्कि स्थानीय नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंच रही है। शिकायतें हुईं, कार्रवाई नहीं स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर नगर पालिका और प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न स्थायी सफाई व्यवस्था बनाई गई, न आयोजनों के बाद कचरा निस्तारण को लेकर कोई सख्त नियम लागू किए गए। आक्रोश बढ़ा, आंदोलन की चेतावनी नगर पालिका और प्रशासन की इस उदासीनता से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि सांस्कृतिक भवन की तत्काल सफाई, मरम्मत और नियमित रखरखाव कराया जाए, साथ ही आयोजनों के बाद कचरा निस्तारण की जिम्मेदारी तय की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थानीय नागरिक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। कटघोरा का यह सांस्कृतिक भवन आज प्रशासन की अनदेखी का जीवंत उदाहरण बन चुका है—जहां संस्कृति की जगह गंदगी और जिम्मेदारी की जगह लापरवाही साफ नजर आ रही है।
छत्तीसगढ़ प्रशासन में बड़ा भूचाल, कोरबा को मिला नया कलेक्टर
✍️ भागीरथी यादव रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने एक साथ कई जिलों की प्रशासनिक कमान बदलते हुए बड़ा और निर्णायक फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी तबादला आदेशों ने राज्य की नौकरशाही में हलचल मचा दी है। इस बदलाव में कोरबा जिले के कलेक्टर का परिवर्तन सबसे अहम माना जा रहा है। शासन के आदेश के अनुसार कुणाल दुदावत (भा.प्र.से. 2017) को दंतेवाड़ा कलेक्टर पद से हटाकर कोरबा का नया कलेक्टर बनाया गया है। वहीं अब तक कोरबा की कमान संभाल रहे अजीत वसंत (भा.प्र.से. 2013) को हटाकर सरगुजा जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया है। यह बदलाव प्रशासनिक संतुलन और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर किया गया माना जा रहा है। कई जिलों में बदली प्रशासनिक कमान इस व्यापक फेरबदल में सिर्फ कोरबा ही नहीं, बल्कि कई अन्य जिलों और महत्वपूर्ण पदों पर भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं— गौरव विलास सोनी (भा.प्र.से. 2011) को सरगुजा कलेक्टर के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। राघव शर्मा (भा.प्र.से. 2012) को बेमेतरा कलेक्टर पद से हटाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध संचालक के रूप में अस्थायी पदस्थापना दी गई है। संजीव कुमार झा (भा.प्र.से. 2011) से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है। दिनेश कुमार दाश (भा.प्र.से. 2018) अब सुकमा से स्थानांतरित होकर दंतेवाड़ा के नए कलेक्टर होंगे। सुश्री प्रतिभा ममगाईं (भा.प्र.से. 2018) को नारायणपुर से हटाकर बेमेतरा जिले की कमान सौंपी गई है। प्रशासनिक रणनीति का संकेत राज्य सरकार का यह बड़ा कदम स्पष्ट करता है कि मैदानी प्रशासन को और अधिक सशक्त, सक्रिय और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में ठोस निर्णय लिए जा रहे हैं। बदली हुई प्रशासनिक टीम से अब संबंधित जिलों में विकास कार्यों और सुशासन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नए ‘पार्टी सरदार’ के जश्न में छूट गया लौह पुरुष का स्मरण
✍️ भागीरथी यादव दर्री मंडल में सरदार पटेल की पुण्यतिथि पर सन्नाटा, भाजपा की भूमिका पर उठे सवाल कोरबा/दर्री। देश की एकता के सूत्रधार, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि पर दर्री मंडल में वह दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीति की संवेदनाओं पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा दिए। जिनके नाम पर मंचों से भाषण गूंजते हैं, जिनकी प्रतिमाओं पर चुनावी मौसम में मालाएं चढ़ती हैं—उन्हीं सरदार पटेल की पुण्यतिथि पर शाम ढलने तक भारतीय जनता पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचा। विडंबना यह रही कि इसी दिन पार्टी में नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर उत्सव का माहौल था। कार्यकर्ताओं में खुशी थी, मिठाइयां बंटी, लेकिन लौह पुरुष के प्रति कर्तव्य और संवेदना कहीं दिखाई नहीं दी। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि उस राजनीति को भी कठघरे में खड़ा करता है, जो सरदार पटेल के नाम को अपना नैतिक कवच बताती रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में इस उपेक्षा को लेकर तीखी नाराज़गी देखी गई। लोगों का कहना है— “सरदार पटेल अब पोस्टर और भाषणों तक सीमित कर दिए गए हैं। ज़मीनी सच्चाई यह है कि जैसे ही पार्टी को नया ‘सरदार’ मिला, असली सरदार को भुला दिया गया।” राजनीतिक गलियारों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज़ है। सवाल उठ रहे हैं— क्या सरदार पटेल भाजपा के लिए अब सिर्फ चुनावी प्रतीक बनकर रह गए हैं? क्या सत्ता, पद और उत्सव, विचारधारा और आदर्शों से ऊपर हो गए हैं? दर्री मंडल में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का न होना आमजन के लिए सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि भावनात्मक आघात बनकर सामने आया। लोगों का कहना है— “जो दल अपने आदर्श पुरुषों का सम्मान नहीं कर पाता, वह देश की एकता और अखंडता की बातें कैसे कर सकता है?” अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या भाजपा इस चूक पर आत्ममंथन करेगी, या फिर नए ‘पार्टी सरदार’ के उत्साह में इतिहास और आदर्शों को यूं ही दरकिनार करती रहेगी। लौह पुरुष की पुण्यतिथि पर छाया यह सन्नाटा, आने वाले दिनों में राजनीति की संवेदनशीलता पर एक गूंजता सवाल बन गया है।
बांकीमोंगरा नगर पालिका को मिला नया जेसीबी, विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
✍️ भागीरथी यादव बांकीमोंगरा नगर पालिका परिषद में जनहित कार्यों को गति देने के लिए नई जेसीबी मशीन का विधिवत शुभारंभ किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सोनी विकास झा, उपाध्यक्ष श्रीमती गायत्री कंवर सहित जनप्रतिनिधियों ने पूजन कर हरी झंडी दिखाकर मशीन को सेवा में शामिल किया। नई जेसीबी से क्षेत्र में साफ-सफाई, नाली सफाई, कचरा डंपिंग एवं विकास कार्य अब तेजी से पूरे किए जा सकेंगे। अध्यक्ष श्रीमती सोनी विकास झा ने कहा कि इससे हर वार्ड में सफाई व्यवस्था मजबूत होगी और जलभराव जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी। इस अवसर पर परिषद के अधिकारी-कर्मचारी एवं भाजपा पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
कोरबा: घरेलू विवाद में युवक चढ़ा 200 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर, पुलिस की समझाइश से बची बड़ी अनहोनी
✍️ भागीरथी यादव कोरबा जिले के रजगामार चौकी क्षेत्र अंतर्गत रावणभांटा गांव में शनिवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक युवक घरेलू विवाद के बाद 200 फीट ऊंचे जियो मोबाइल टावर पर चढ़ गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। जानकारी के मुताबिक, करण चौहान शराब के नशे में घर पहुंचा था। शराब पीने को लेकर पत्नी से विवाद हुआ, जिसके बाद गुस्से में वह घर से निकलकर पास स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गया। टावर की ऊंचाई से वह लगातार चिल्लाता रहा और पत्नी को नीचे बुलाने की मांग करता रहा। सूचना मिलते ही रजगामार चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे तक युवक को समझाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया। रजगामार चौकी प्रभारी लक्ष्मण खूंटे ने बताया कि युवक नशे की हालत में था और समझाइश के बाद उसे छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कुछ देर के लिए पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
पोटापानी में लोनर हाथी का आतंक, कई गांवों में हाई अलर्ट
✍️पाली से ज्ञान शंकर तिवारी की खास रिपोर्ट पाली। ग्राम पोटापानी के आश्रित मोहल्ला सोनाईपुर में एक लोनर हाथी की लगातार मौजूदगी से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। शनिवार से हाथी के विचरण की खबरों के बाद वन विभाग और प्रशासन सतर्क हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अलगीडांड, पोटापानी, भंडारखोल, कपोट, घुईचुआ और हाथीबाड़ी सहित आसपास के गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, हाथी दिन के समय जंगल की ओर चला जाता है, लेकिन शाम ढलते ही आबादी के नजदीक दिखाई देने लगता है। इससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है और लोग घरों से बाहर निकलने में भी हिचकिचा रहे हैं। वन विभाग ने एहतियातन गांवों में मुनादी कराकर लोगों को रात के समय घरों से बाहर न निकलने और खेतों की ओर जाने से बचने की सख्त हिदायत दी है। ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए विभाग ने लोगों से समूह में रहने, शाम के समय अलाव जलाने और आपसी समन्वय बनाए रखने की अपील की है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। वन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि हाथी को देखकर मोबाइल से फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश न करें। हाथी के नजदीक जाना जानलेवा साबित हो सकता है। यदि कहीं भी हाथी दिखाई दे, तो तत्काल नजदीकी वन चौकी या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। प्रशासन और वन विभाग की टीमें लगातार हाथी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संयम, सतर्कता और सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सावधानी ही इस समय सबसे बड़ा बचाव है।
पाली | धान खरीदी केंद्र पोटापानी में अव्यवस्था, महिला किसान का धान लौटाया, रोते हुए फूटा दर्द
✍️ रिपोर्ट: ज्ञान शंकर तिवारी, पाली पाली विकासखंड के धान खरीदी उपार्जन केंद्र पोटापानी में इन दिनों अव्यवस्था और किसानों की परेशानी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला उस वक्त सामने आया, जब एक महिला किसान की पांच कट्टी धान को प्रबंधन ने सरकारी नियम-कायदों का हवाला देते हुए खरीदने से इंकार कर दिया। धान लौटाए जाने की बात सुनते ही महिला किसान भावुक हो गई और फफक-फफक कर रो पड़ी। रोते हुए उसने अपने परिजनों से कहा कि अब धान नहीं बिकेगा और उसे ट्रैक्टर में भरकर घर वापस ले जाना पड़ेगा। यह मार्मिक दृश्य वहां मौजूद अन्य किसानों के लिए भी बेहद पीड़ादायक रहा। इसी दौरान मौके पर मौजूद एक यूट्यूबर ने महिला की पीड़ा को कैमरे में कैद कर वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो वायरल होते ही लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर जहां कुछ लोगों ने यह टिप्पणी की कि “अगर हजार रुपये दे दिए होते तो धान खराब नहीं निकलती”, वहीं कई लोगों ने सीधे तौर पर प्रबंधन और प्रशासन पर सवाल खड़े करते हुए किसानों के साथ अन्याय का आरोप लगाया। गौरतलब है कि धान खरीदी शुरू होने से पहले ही उपार्जन केंद्र के ऑपरेटर हड़ताल पर चले गए थे, जिससे खरीदी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। किसानों को राहत देने के लिए प्रशासन ने आनन-फानन में वैकल्पिक ऑपरेटरों की नियुक्ति की थी। करीब एक सप्ताह बाद पुराने ऑपरेटर अपनी मांगों और सुरक्षा को लेकर हड़ताल खत्म कर वापस लौट आए। इसके बाद से ही किसानों ने आरोप लगाना शुरू किया कि उनके धान के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ की जा रही है। किसानों का कहना है कि पहले कभी नियमों को लेकर इतनी सख्ती नहीं बरती गई। उनका आरोप है कि ऑपरेटरों की मांगें पूरी न होने की खीझ किसानों पर निकाली जा रही है, जिससे सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि कभी धान में नमी, तो कभी गुणवत्ता का बहाना बनाकर खरीदी से इंकार कर दिया जाता है। इससे उन्हें न केवल आर्थिक नुकसान, बल्कि समय और संसाधनों की भी भारी क्षति उठानी पड़ रही है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और संवेदनशील बनाया जाए, ताकि किसी और किसान को इस तरह अपमान और पीड़ा का सामना न करना पड़े।
पैदल भक्ति यात्रा का दर्री में भव्य स्वागत, बाबा सालासर बालाजी के जयघोष से गूंजा क्षेत्र
✍️ भागीरथी यादव दर्री। बाबा सालासर बालाजी के प्रति अटूट श्रद्धा और गहन आस्था का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब संबलपुर से सालासर धाम (जयपुर) की ओर पैदल यात्रा पर निकले अग्रबंधु श्री प्रमोद राठी जी (58 वर्ष) का मारवाड़ी युवा मंच, दर्री–जमनीपाली–जैलगांव शाखा द्वारा दर्री क्षेत्र में भव्य, श्रद्धापूर्ण और गरिमामय स्वागत किया गया। बालाजी सुपर बाजार के सामने आयोजित इस स्वागत समारोह में समाजबंधुओं और मंच के सदस्यों की बड़ी उपस्थिति रही। पुष्पगुच्छ, माल्यार्पण, तिलक और करताल-ध्वनि के साथ किए गए आत्मीय अभिनंदन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। चारों ओर “जय बाबा सालासर बालाजी” के जयघोष गूंजते रहे। उल्लेखनीय है कि श्री प्रमोद राठी जी संबलपुर से पैदल यात्रा प्रारंभ कर भटली में श्याम बाबा के दर्शन के पश्चात चंद्रहासिनी–रायगढ़–सक्ती–कोरबा–जमनीपाली–कटघोरा मार्ग से होते हुए सालासर धाम की ओर अग्रसर हैं। उनकी यह कठिन, लंबी और आस्था से परिपूर्ण यात्रा समाज के लिए संकल्प, विश्वास और भक्ति का सशक्त संदेश बनकर उभरी है। इस अवसर पर मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री मनीष अग्रवाल, प्रांतीय उपाध्यक्ष श्री सुमित अग्रवाल, प्रांतीय संयोजक श्री विकास अग्रवाल, शाखा अध्यक्ष श्री प्रतीक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष श्री बलकिशन अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य अग्रबंधु उपस्थित रहे। सभी ने श्री राठी जी के साहस, दृढ़ संकल्प और धार्मिक भावना की मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम के दौरान मंच द्वारा श्री प्रमोद राठी जी के भोजन एवं रात्रि विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई, जिससे सेवा, सहयोग और सामाजिक समर्पण की भावना का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत हुआ। समारोह के अंत में उपस्थित सभी समाजबंधुओं ने बाबा सालासर बालाजी से श्री प्रमोद राठी जी की यात्रा के सफल, सुरक्षित और मंगलमय होने की कामना की। मारवाड़ी युवा मंच परिवार ने इस पावन क्षण का साक्षी बनकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया और भविष्य में भी ऐसे धार्मिक व सामाजिक आयोजनों के आयोजन का संकल्प दोहराया।
**₹5 लाख से ₹2.5 करोड़ का लालच बना मौत का मंत्र
✍️ भागीरथी यादव कोरबा में तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर 3 की हत्या, 6 आरोपी सलाखों के पीछे** कोरबा – अंधविश्वास ने एक बार फिर खून की कीमत वसूल ली। तंत्र-मंत्र से रातों-रात करोड़पति बनने के झांसे में आए स्क्रैप कारोबारी समेत तीन युवकों की बेरहमी से मौत कर दी गई। तांत्रिक अनुष्ठान की आड़ में की गई इस खौफनाक वारदात में पुलिस ने अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 11 दिसंबर की सुबह बरबसपुर स्थित फार्महाउस में जब तीन शव मिले, तब किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह मामला अंधविश्वास, लालच और कथित तंत्र-साधना की ऐसी भयावह साजिश निकलेगा, जिसने तीन जिंदगियां निगल लीं। पुलिस जांच में सामने आया है कि बिलासपुर निवासी बैगा राजेंद्र कुमार ने मृतकों को यह भरोसा दिलाया था कि तंत्र-मंत्र के जरिए पांच लाख रुपये को ढाई करोड़ रुपये में बदला जा सकता है। इसी झांसे में आकर 10 दिसंबर की देर रात फार्महाउस में कथित पूजा-अनुष्ठान कराया गया। जांच में खुलासा हुआ है कि तांत्रिक क्रिया के दौरान तीनों युवकों को अलग-अलग समय पर बंद कमरे में बुलाया गया। उन्हें नींबू देकर भीतर बैठाया गया और दरवाजा बंद कर दिया गया। 15 से 30 मिनट बाद जब कमरे खोले गए, तो तीनों जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे—कुछ ही देर में तीनों की सांसें थम गईं। पुलिस को शक है कि तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर जहर देकर योजनाबद्ध तरीके से हत्या की गई। मुख्य तांत्रिक सहित छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मामले की परतें अभी और खुलनी बाकी हैं। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट से ही यह तय होगा कि मौत का असली कारण क्या था, लेकिन इतना साफ है कि अंधविश्वास और लालच ने तीन घरों के चिराग बुझा दिए। सवाल अब भी बाकी है— यह सिर्फ ठगी थी या सुनियोजित सामूहिक हत्या? असली सच जांच के बाद ही सामने आएगा।
कोरबा की बेटी को राष्ट्रीय सम्मान, मानवाधिकारों के क्षेत्र में रचा नया कीर्तिमान
✍️ भागीरथी यादव कोरबा (छत्तीसगढ़)। मानवाधिकारों के संरक्षण और सामाजिक न्याय की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कोरबा निवासी सुश्री प्रीति महंत को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिली है। 10 दिसंबर 2025 को आयोजित HRPC अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन–2025 में उन्हें प्रतिष्ठित “HRPC नेशनल ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मानवाधिकारों के प्रति उनकी सतत प्रतिबद्धता, जागरूकता अभियान और पीड़ितों को न्याय दिलाने के प्रयासों के लिए प्रदान किया गया। देश–विदेश की नामचीन हस्तियों से सजे इस भव्य अधिवेशन ने मानवाधिकारों पर वैश्विक विमर्श को नई दिशा दी। कार्यक्रम में भारत के पूर्व सूचना आयुक्त यशवर्धन कुमार सिन्हा, राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी, सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार के अधिवक्ता मनोज गोरकेला, गुजरात सरकार के राज्य मंत्री कौशिक वेकरिया, HRPC की चेयरमैन एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अधिवक्ता डॉ. ज्योति जोंग्लुजू, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश तलावंत सिंह, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व चेयरमैन डॉ. आदिश अग्रवाला, पद्मश्री अनुराधा कोइराला (नेपाल) सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। अधिवेशन में वक्ताओं ने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास, कानूनी सशक्तिकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। सुश्री प्रीति महंत को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान की पहचान है, बल्कि कोरबा और छत्तीसगढ़ के लिए भी गौरव का क्षण है। सम्मान प्राप्त करने के बाद सुश्री प्रीति महंत ने कहा कि यह पुरस्कार उन्हें समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और अधिकार पहुंचाने के लिए और अधिक प्रेरित करेगा। उनका यह सम्मान समाज में सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद और मानवाधिकारों के प्रति बढ़ती चेतना का सशक्त संदेश है।
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कोरबी में सरस्वती पूजन हर्षोल्लास से संपन्न
















