Korba Breaking NH-130 पर रफ्तार का कहर, तान नदी पुल बना हादसे का गवाह देखें वीडियो…
सुशील जायसवाल गलत साइड से आई पिकअप ने कार को मारी सीधी टक्कर, कार के उड़े परखच्चे—बाल-बाल टली बड़ी अनहोनी कोरबी चोटिया कटघोरा–अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130 पर सोमवार शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब बांगे थाना क्षेत्र अंतर्गत गुरसिया के पास तान नदी पुल के समीप तेज रफ्तार और लापरवाही ने एक बड़े हादसे को जन्म दे दिया। शाम करीब 6 बजे कार और पिकअप वाहन (TATA MAX) के बीच हुई आमने-सामने की जबरदस्त भिड़ंत में कार के चीथड़े उड़ गए, हालांकि किस्मत अच्छी रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार कटघोरा से अंबिकापुर की ओर जा रही थी, जबकि अंबिकापुर से कटघोरा की दिशा में तेज रफ्तार से आ रही पिकअप वाहन गलत साइड में घुस गई। तान नदी पुल के पास दोनों वाहनों की सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन सड़क पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में जा गिरे। हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। स्थानीय लोगों ने सराहनीय तत्परता दिखाते हुए घायलों को वाहन से बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। दुर्घटना में पिकअप चालक को मामूली चोटें आईं, जिसे उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। दुर्घटनाग्रस्त पिकअप वाहन का नंबर CG-08-AJ-1635 बताया गया है। सूचना मिलते ही बांगे थाना पुलिस मौके पर पहुंची, क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर यातायात बहाल कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 👉 यह हादसा एक बार फिर NH-130 पर तेज रफ्तार और लापरवाही से ड्राइविंग के खतरे की चेतावनी दे गया। देखें वीडियो… 🎥
कोरबा पुलिस में बड़ी कार्रवाई: गैंगरेप पीड़िता की शिकायत न लेने पर दो आरक्षक निलंबित
✍️ भागीरथी यादव कोरबा, 20 जनवरी। महिलाओं से जुड़े अपराधों के प्रति लापरवाही पर कोरबा पुलिस में कड़ा संदेश देते हुए पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने बांकीमोंगरा थाना में पदस्थ दो आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई गैंगरेप पीड़िता की शिकायत दर्ज न करने जैसी गंभीर चूक के चलते की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आरक्षक क्रमांक 127 राकेश मेहता एवं आरक्षक क्रमांक 771 राजेन्द्र राज पर आरोप है कि गैंगरेप की शिकार महिला न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंची थी, लेकिन ड्यूटी पर तैनात दोनों आरक्षकों ने न तो उसकी शिकायत दर्ज की और न ही आवेदन लिया। पीड़िता को थाने से लौटा देना पुलिस कर्तव्य का खुला उल्लंघन माना गया। यह मामला हाल ही में सामने आए गैंगरेप प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें डायल 112 के चालक और पीड़िता के प्रेमी को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। प्रारंभिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि घटना के तुरंत बाद पीड़िता ने पुलिस से मदद मांगी थी, लेकिन उदासीनता के चलते उसकी फरियाद अनसुनी रह गई। मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस अधीक्षक ने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए दोनों आरक्षकों को निलंबित करने का आदेश जारी किया। एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “महिलाओं से जुड़े अपराधों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।” इस कार्रवाई के बाद जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। सभी थानों को महिलाओं से संबंधित शिकायतों के त्वरित पंजीयन और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पीड़ित की अनदेखी अब किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
घरेलू सहायिका निकली चोर, सीसीटीवी ने खोला राज बांकीमोंगरा में सिलसिलेवार चोरी का पुलिस ने किया पर्दाफाश
कोरबा/बांकीमोंगरा। कोरबा जिले के बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र में एक ही मकान से लगातार हो रही चोरी की घटनाओं का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाली कोई बाहर की नहीं, बल्कि घर में काम करने वाली घरेलू महिला ही थी। पुलिस ने महिला के साथ चोरी का माल खरीदने वाले व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बांकीमोंगरा मुख्य मार्ग स्थित भानु डेंटल क्लिनिक के प्रथम तल में निवासरत कमल किशोर दुबे के घर से बीते कुछ समय से नगदी और जेवरात रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे थे। बार-बार सामान गायब होने पर संदेह गहराया, जिसके बाद दुबे ने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवाए। कैमरे लगाए जाने की जानकारी घरेलू कामकाज करने वाली महिला माना बाई को नहीं थी। सीसीटीवी लगने के बावजूद चोरी की घटनाएं जारी रहीं। जब फुटेज की जांच की गई तो चौंकाने वाला सच सामने आया—महिला स्वयं चोरी करते हुए कैमरे में कैद हो गई। इसके बाद पीड़ित ने बांकीमोंगरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और आरोपी महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में महिला ने चोरी की घटनाओं को स्वीकार करते हुए बताया कि उसने चुराए गए जेवरात पुरुषोत्तम सोनी को बेच दिए थे। पुलिस ने इस आधार पर पुरुषोत्तम सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 3600 रुपये नगद, एक जोड़ी झुमके और एक जोड़ी पायल बरामद की है। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है। यह मामला एक बार फिर घरेलू सहायकों के सत्यापन और सतर्कता की जरूरत पर सवाल खड़े करता है।
**SECL दीपका पर संविधान की अनदेखी के आरोप
ज्ञान शंकर तिवारी भू-विस्थापितों का फूटा आक्रोश — “कोल बेरिंग एक्ट नहीं, मनमानी से चल रहा प्रशासन”** कोरबा। छत्तीसगढ़ की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले कोरबा जिले में विकास की चकाचौंध के पीछे भू-विस्थापितों का गहरा दर्द अब सड़कों पर उतर आया है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के दीपका क्षेत्र प्रबंधन पर भारतीय संविधान, कोल बेरिंग एक्ट और पेसा कानून की खुली अवहेलना के गंभीर आरोप लगे हैं। भू-विस्थापितों और मूल निवासियों का कहना है कि दीपका परियोजना में कानून नहीं, बल्कि “तानाशाही सोच” से फैसले थोपे जा रहे हैं। ग्रामीणों ने दो टूक कहा है — “हमारे लिए संविधान सर्वोपरि है और न्यायालय ही हमारे मंदिर हैं, लेकिन SECL प्रबंधन इसे मानने को तैयार नहीं।” अनुसूचित क्षेत्र में कानून की अनदेखी का आरोप कोरबा जिला भारतीय संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत पूर्ण रूप से अनुसूचित क्षेत्र घोषित है। यहां पेसा कानून (PESA Act, 1996) लागू होता है, जिसके तहत जल-जंगल-जमीन पर ग्राम सभा को निर्णायक अधिकार प्राप्त हैं। आरोप है कि दीपका विस्तार परियोजना में ग्राम सभाओं की सहमति के बिना ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जो सीधे-सीधे संविधान और पेसा कानून का उल्लंघन है। आंदोलन की आग को हवा देने वाले मुख्य मुद्दे भेदभाव का आरोप भू-विस्थापितों का कहना है कि SECL प्रबंधन SC-ST-OBC वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां कोल बेरिंग एक्ट 1957 की जगह “हिटलरशाही” और “मनमानी नीति” से फैसले लिए जा रहे हैं। भूमि अधिग्रहण और मुआवजा विवाद कोल बेरिंग एक्ट के अनुसार यदि किसी गांव की अधिकांश जमीन अधिग्रहित हो जाती है, तो शेष भूमि भी अनुपयोगी हो जाती है, ऐसी स्थिति में पूरी जमीन का मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास अनिवार्य है। ग्रामीणों का दावा है कि SECL इन प्रावधानों को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहा है। खनन के बाद जमीन वापसी का नियम ठंडे बस्ते में नियमों के मुताबिक खनन के बाद जमीन को 5 फीट उपजाऊ मिट्टी डालकर किसानों को लौटाना होता है, लेकिन धरातल पर इसका पालन कहीं नजर नहीं आता। 1991-92 पुनर्वास नीति लागू करने की मांग प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट मांग है कि 1991-92 की पुनर्वास नीति के तहत हर खाताधारी और पट्टाधारी को नौकरी दी जाए, चाहे उसकी जमीन एक-दो डिसमिल ही क्यों न हो। हरदी बाजार भू-अधिग्रहण बना टकराव का केंद्र दीपका विस्तार परियोजना के तहत ग्राम हरदी बाजार में जारी भूमि अधिग्रहण को ग्रामीणों ने पूरी तरह अवैध बताया है। प्रशासन द्वारा निर्माण रोकने के लिए जारी नोटिस को ग्रामीणों ने सिरे से खारिज कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि — धारा 3-4 के प्रकाशन से पहले कोई त्रिपक्षीय बैठक नहीं हुई वर्ष 2002 से 2022 तक की पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया शून्य और अवैध है मुआवजा 2025-26 की नई गाइडलाइन के अनुसार दिया जाए गाइडलाइन रेट्स का तुलनात्मक आंकड़ा 2019-20: बिना कॉलम मकान ₹662 कॉलम वाला ₹828 प्रति वर्गफुट 2024-25: बिना कॉलम ₹1150 कॉलम वाला ₹1750 2025-26 (वर्तमान): RCC मकान ₹1150 स्कूल/दुकान ₹1700 गोदाम ₹1550 प्रति वर्गफुट ग्रामीणों का कहना है कि इन्हीं दरों पर मुआवजा मिलना चाहिए। ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी (बाइट) “जब दीपका प्रोजेक्ट की ब्लास्टिंग से हमारे घर जर्जर हो रहे हैं, तो मरम्मत पर रोक क्यों? जब अधिग्रहण ही अवैध है, तो नोटिस भी अवैध है। हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।” ‘हड़प नीति’ का आरोप, कानूनी लड़ाई की तैयारी समाजसेवी मनीराम भारती ने SECL की कार्यप्रणाली की तुलना अंग्रेजों की ‘हड़प नीति’ से करते हुए इसे असंवैधानिक बताया है। मनीराम भारती का बयान: “SECL विस्तार के नाम पर किसानों की संपत्ति हड़प रहा है। यदि संविधान और कानून के अनुसार मुआवजा व बसाहट नहीं दी गई, तो माननीय न्यायालय इस अवैध अधिग्रहण को ध्वस्त कर देगा।” इस संबंध में मांग पत्र और विरोध की प्रतियां 📌 कलेक्टर कोरबा 📌 एसडीएम पाली 📌 तहसीलदार हरदी बाजार 📌 SECL दीपका क्षेत्र के महाप्रबंधक को सौंप दी गई हैं।
समय से पहले बंद मिला आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मरीज लौटे मायूस स्टाफ नदारद, स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
ज्ञान शंकर तिवारी कोरबा। कोरबा जिले के मुड़ापार स्थित शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल सोमवार शाम उस समय खुल गई, जब निर्धारित समय के भीतर पहुंचे मरीजों को केंद्र का मुख्य द्वार बंद मिला। शाम करीब 7:00 बजे स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका हुआ था, जबकि डॉक्टर एवं अन्य स्टाफ पूरी तरह अनुपस्थित पाए गए। इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को झेलनी पड़ी, जो देर शाम तक केंद्र खुलने का इंतजार करते रहे। कई मरीजों ने बताया कि नियमित समय में भी स्टाफ की अनुपस्थिति अब आम बात हो चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार समय से पहले स्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। घटना से नाराज क्षेत्रवासियों ने जिला स्वास्थ्य प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, केंद्र की नियमित निगरानी की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आम जनता को शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके। अब सवाल यह है कि आम जनता के लिए खोले गए आयुष्मान आरोग्य मंदिर आखिर किसके भरोसे चल रहे हैं? यदि समय पर इलाज नहीं मिला, तो “स्वास्थ्य सुरक्षा” की मंशा केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।
**छिंदपुर में लो-वोल्टेज का कहर, जनजीवन अस्त-व्यस्त
ज्ञान शंकर तिवारी 10 दिन में समाधान नहीं तो CSPDCL कार्यालय का घेराव तय** कोरबा/पाली (लोक सदन)। पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत छिंदपुर में जर्जर विद्युत व्यवस्था ग्रामीणों के लिए गंभीर संकट बन गई है। उपस्वास्थ्य केंद्र से लेकर प्राथमिक शाला तक महज एक सिंगल केबल के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है, जिससे लगातार ओवरलोड और लो-वोल्टेज की स्थिति निर्मित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि इसी एक केबल पर वेल्डिंग मशीन जैसे भारी उपकरण चलाए जाने से वोल्टेज बार-बार गिर रहा है। नतीजतन मोटर पंप बंद हो जा रहे हैं और घंटों बिजली गुल रहती है। इससे पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं और स्कूली गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णानंद राठौर ने बताया कि करीब चार माह पूर्व CSPDCL दीपका कार्यालय में सहायक अभियंता को लिखित शिकायत सौंपी गई थी, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। विभागीय उदासीनता से ग्रामीणों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों की ओर से कार्यपालन अभियंता, CSPDCL कोरबा को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई है कि छिंदपुर में अलग से नई विद्युत केबल लाइन बिछाई जाए, जिससे ओवरलोड और लो-वोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 10 दिनों के भीतर समस्या का निराकरण नहीं किया गया, तो ग्रामीण CSPDCL दीपका कार्यालय का घेराव करेंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी विभाग की होगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है, ताकि गांव को इस लंबे समय से चली आ रही समस्या से राहत मिल सके।
पाली | धवईहापारा में राज्य स्तरीय कबड्डी महाकुंभ का भव्य समापन, खेल भावना और जनउत्साह का अद्भुत संगम
ज्ञान शंकर तिवारी पाली विकासखंड के ग्राम धवईहापारा में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता का समापन 18 जनवरी की देर रात लगभग 12 बजे फाइनल मुकाबले के साथ भव्य और रोमांचक अंदाज़ में हुआ। ठंड और देर रात के बावजूद बड़ी संख्या में दर्शकों की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। पूरा क्षेत्र खेल उत्सव और जोश से सराबोर नजर आया। प्रतियोगिता में राज्य के विभिन्न गांवों से आई टीमों ने उत्कृष्ट खेल कौशल, अनुशासन और जुझारूपन का शानदार प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों की ऊर्जा और समर्पण ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण अंचलों में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें सही मंच और प्रोत्साहन मिलने की आवश्यकता है। प्रतियोगिता के परिणाम 🥇 प्रथम स्थान : हरनमुंडी 🥈 द्वितीय स्थान : बिंझरापारा 🥉 तृतीय स्थान : देवगांव 🏅 चतुर्थ स्थान : धवईहापारा व्यक्तिगत पुरस्कार ⭐ बेस्ट रेडर : मनीष उईके (हरनमुंडी) ⭐ बेस्ट केचर : संदीप मरावी (हरनमुंडी) ⭐ बेस्ट ऑलराउंडर : मनोज पटेल (देवगांव) फाइनल मुकाबला दर्शकों के लिए सांसें रोक देने वाला रहा। दोनों टीमों ने अंतिम क्षण तक कड़ा संघर्ष किया। तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साहवर्धन के नारों ने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया और मुकाबले को यादगार बना दिया। जनसेवा और खेल प्रोत्साहन की मिसाल बने कौशल नेटी इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र क्रमांक 09, श्री कौशल नेटी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में युवाओं को अनुशासन, संघर्ष, मेहनत और लक्ष्य के प्रति निष्ठा का संदेश दिया। कार्यक्रम का सबसे सराहनीय पहलू तब सामने आया, जब श्री नेटी ने बिना किसी औपचारिक घोषणा के अपनी ओर से आयोजन समिति को ₹5000 की सहयोग राशि प्रदान की। उनकी यह पहल उनके सरल स्वभाव, खेल प्रेम और जनसेवा की भावना को दर्शाती है। आयोजकों एवं क्षेत्रवासियों ने इस सहयोग के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया। जनता के विश्वास पर खरे उतरते जनप्रतिनिधि उल्लेखनीय है कि कौशल नेटी ने पुलिस विभाग में सेवा देने के बाद अपने पद से इस्तीफा देकर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा। जनता और युवाओं ने उन पर भरोसा जताया और आज वे उस विश्वास पर खरे उतरते हुए क्षेत्र में आयोजित सामाजिक, खेल एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी सहभागिता से क्षेत्र में सकारात्मक और प्रेरक संदेश जा रहा है। धवईहापारा की यह राज्य स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता न केवल खेल आयोजन रही, बल्कि ग्रामीण प्रतिभा, सामाजिक सहभागिता और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी।
कानून के रक्षक पर दाग: कटघोरा थाने में पदस्थ एसआई पर छेड़खानी का मामला, गिरफ्तार
✍️ भागीरथी यादव वर्दी की आड़ में धमकी और उत्पीड़न का आरोप, न्यायिक रिमांड पर भेजा गया कोरबा। जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पुलिस महकमे की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कटघोरा थाना क्षेत्र में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर शिव प्रसाद कोसरिया के खिलाफ उसी थाने में छेड़खानी का अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी एसआई को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पीड़िता महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपी एसआई उसके पति को अवैध शराब के मामले में जेल भेजने की धमकी देकर लगातार फोन पर परेशान करता था। महिला के अनुसार, आरोपी ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए उस पर दबाव बनाया और भय का माहौल पैदा किया। मामला रविवार रात और गंभीर हो गया, जब आरोप है कि एसआई शराब के नशे में महिला के घर पहुंचा और जबरन छेड़खानी करने की कोशिश की। घटना से डरी महिला ने साहस दिखाते हुए थाने पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत दर्ज कराई। महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने बीएनएस की धारा 354 के तहत मामला दर्ज किया और आरोपी सब-इंस्पेक्टर को तत्काल हिरासत में ले लिया। बाद में उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर भेजने के आदेश दिए गए। कटघोरा थाना प्रभारी डीएन तिवारी ने बताया कि प्रकरण में कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई की गई है। आरोपी एसआई की गिरफ्तारी के साथ ही आगे की जांच जारी है। इस घटना से जिले भर में चर्चा का माहौल है। वर्दीधारी अधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कानून के रक्षक ही कानून तोड़ें, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला बड़ी परीक्षा बन गया है।
जनता की आवाज बने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, उनके हस्तक्षेप से खुला स्याहीमुड़ी–रामनगर मार्ग
✍️ भागीरथी यादव सीएसईबी इरेक्टर हॉस्टल में हुई बैठक, 6 फीट सड़क खोलने का निर्णय कोरबा (दर्री)। कोरबा जिले के दर्री क्षेत्र अंतर्गत स्याहीमुड़ी–रामनगर से सीएसईबी कॉलोनी जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग सीएसईबी प्रबंधन द्वारा मलबा डालकर बंद कर दिया गया था। इस मनमाने निर्णय से सैकड़ों स्थानीय नागरिकों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और आपातकालीन सेवाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। सीएसईबी प्रबंधन की उदासीनता से निराश स्थानीय निवासियों ने पूर्व राजस्व मंत्री एवं वरिष्ठ जननेता श्री जयसिंह अग्रवाल पर भरोसा जताते हुए अपनी पीड़ा उनके समक्ष रखी। सूचना मिलते ही जयसिंह अग्रवाल ने बिना किसी देरी के मोर्चा संभाला और सीएसईबी के उच्च अधिकारियों से सीधे बातचीत कर जनहित का पक्ष मजबूती से रखा। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के हस्तक्षेप के बाद सीएसईबी इरेक्टर हॉस्टल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, आरसीएफ सहित सीएसईबी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जनहित से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के उपरांत आपसी सहमति से यह निर्णय लिया गया कि स्याहीमुड़ी–रामनगर से सीएसईबी कॉलोनी की ओर न्यूनतम 6 फीट चौड़ी सड़क तत्काल खोली जाएगी, ताकि स्थानीय लोगों की आवाजाही पुनः सुचारू रूप से बहाल हो सके। महज औपचारिकता तक सीमित न रहकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल स्वयं मौके पर पहुंचे, स्थानीय नागरिकों के साथ खड़े होकर स्थिति का जायजा लिया निर्णय को जमीन पर उतरवाया। उनके इस जमीनी, संवेदनशील और निर्भीक नेतृत्व से क्षेत्रवासियों में नया विश्वास जगा है। स्थानीय लोगों ने एक स्वर में कहा कि जयसिंह अग्रवाल सत्ता में न होते हुए भी जनता के लिए ढाल बनकर खड़े रहते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्चा जननेता वही होता है, जो हर परिस्थिति में आम आदमी के साथ खड़ा हो। क्षेत्रवासियों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का आभार व्यक्त करते हुए सीएसईबी प्रबंधन से भविष्य में बिना वैकल्पिक व्यवस्था दिए किसी भी जनमार्ग को अवरुद्ध न करने की मांग भी की है।
राजस्व भूमि पर अवैध कब्जों का खुला खेल, प्रशासन मौन ग्राम पंचायत चैतमा में शासकीय जमीनें तेजी से हो रहीं गायब
ज्ञान शंकर तिवारी कोरबा/पाली। जिला कोरबा की तहसील पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत चैतमा में शासकीय (राजस्व) भूमि पर अवैध कब्जा अब एक-दो मामलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संगठित और बेखौफ गतिविधि का रूप ले चुका है। स्थिति यह है कि ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बने हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत चैतमा में शासकीय भूमि पर कब्जा कर न केवल मकान बनाए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें खुलेआम खरीदा-बेचा भी जा रहा है। शिकायतों के बावजूद न तो अवैध निर्माण रोका जा रहा है और न ही किसी पर ठोस कार्रवाई हो रही है। खसरा नंबर 76/1क बना अवैध निर्माण का केंद्र ताजा मामला शासकीय भूमि खसरा नंबर 76/1क, रकबा 17.3590 हेक्टेयर का है। बताया जा रहा है कि यह भूमि पहले बेलतरा निवासी द्वारा अवैध रूप से खरीदी गई और बाद में तीसरे व्यक्ति को बेचकर कब्जा सौंप दिया गया। इसके बाद रातों-रात मकान निर्माण शुरू कर दिया गया। सरपंच द्वारा मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रोकने को कहा गया, लेकिन इसके बावजूद निर्माण जारी है। इससे स्पष्ट है कि अवैध कब्जाधारियों को न प्रशासन का डर है और न ही कानून का। पहले भी हो चुकी हैं शिकायतें, कार्रवाई शून्य यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पंचायत प्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने अवैध कब्जों की लिखित शिकायत तहसीलदार पाली एवं अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) पाली से की थी। बावजूद इसके अवैध निर्माण पूरे हुए और आज वहां पक्के मकान खड़े हैं। इस निष्क्रियता ने अवैध कब्जाधारियों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। आरक्षित भूमि तक सुरक्षित नहीं ग्रामीणों का आरोप है कि चैतमा में केवल एक ही खसरा नंबर नहीं, बल्कि शासकीय भवन हेतु आरक्षित भूमि, देवस्थल की जमीन, वन विभाग के लिए आरक्षित भूमि तक पर अवैध कब्जा कर बिक्री की जा चुकी है। हैरानी की बात यह है कि इन गंभीर मामलों में भी अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कलेक्टर के आदेश की उड़ रही धज्जियां कुछ समय पूर्व कलेक्टर कोरबा द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किया गया था कि सभी शासकीय भूमियों पर खसरा नंबर और रकबा सहित सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि भूमि की पहचान स्पष्ट हो सके। लेकिन ग्राम पंचायत चैतमा में आज तक एक भी शासकीय भूमि पर बोर्ड नहीं लगाया गया, जिससे संदेह और गहरा हो गया है। ग्रामीणों की चेतावनी ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में ग्राम पंचायत चैतमा में एक इंच भी शासकीय भूमि नहीं बचेगी। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल अवैध निर्माण रोका जाए, दोषी कब्जाधारियों पर कड़ी कार्रवाई हो, और सभी शासकीय भूमियों पर बोर्ड लगाकर भूमि को सुरक्षित किया जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि राजस्व विभाग कब जागेगा? या फिर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कोरबी में सरस्वती पूजन हर्षोल्लास से संपन्न
















