बिलासपुर: आधी रात सड़क पर हाईवोल्टेज ड्रामा, युवती ने युवक को जड़े थप्पड़, आत्महत्या की धमकी से मचा हड़कंप
बिलासपुर। शहर में देर रात एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां बीच सड़क पर युवक–युवती का हाईवोल्टेज ड्रामा करीब एक घंटे तक चलता रहा। मामला कोनी थाना क्षेत्र का है, जहां एक युवती सड़क पर हंगामा करते हुए युवक को लगातार थप्पड़ मारती रही और वाहनों के सामने कूदकर जान देने की धमकी देती रही। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आधी रात युवक और युवती के बीच अचानक विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते सड़क पर तमाशे में बदल गया। युवती गुस्से में आकर कभी युवक पर हाथ उठाती तो कभी दौड़ती हुई वाहनों के सामने जाकर आत्महत्या की धमकी देने लगती। इस दौरान युवक लगातार उसे समझाने और मनाने की कोशिश करता नजर आया। 🚨 शराब के नशे में थे दोनों जानकारी के अनुसार, युवक तालापारा का निवासी है, जबकि युवती भी उसी मोहल्ले में रहती है। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं। बताया जा रहा है कि तीन दिन पहले युवती अपने एक परिचित की महिला के साथ कोनी रोड गई थी, जहां युवक भी मौजूद था। उस समय युवक शराब के नशे में था और युवती भी नशे की हालत में बताई जा रही है। ❗ छेड़छाड़ का शक, फिर खुली सच्चाई जब राहगीरों ने युवती को इस तरह सड़क पर हंगामा करते और युवक को थप्पड़ मारते देखा, तो उन्हें लगा कि युवक युवती से छेड़छाड़ कर रहा है। इसी संदेह के चलते कुछ युवकों ने पुलिस को सूचना दी। हालांकि, बाद में सामने आया कि दोनों आपसी विवाद में ड्रामा कर रहे थे। 🎥 थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल घटना के दौरान मौजूद लोगों ने युवती द्वारा युवक को थप्पड़ मारने का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि युवती युवक पर हाथ उठाती है और दोनों सड़क पर हंगामा करते हैं।
कोनी में अपराधियों पर पुलिस का शिकंजा
✍️ भागीरथी यादव शांति भंग की साजिश नाकाम, 4 शातिर बदमाश BNSS की धारा 170 में जेल भेजे गए बिलासपुर। आम नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में स्थायी शांति बनाए रखने के उद्देश्य से कोनी थाना पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ बड़ा और निर्णायक अभियान चलाया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई इस सख्त कार्रवाई के तहत क्षेत्र के चार चिन्हित शातिर गुंडा बदमाशों को प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया। पुलिस प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले असामाजिक तत्वों को साफ संदेश दिया है कि क्षेत्र में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि, भय फैलाने या शांति भंग करने की कोशिश को कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपराध से पहले कार्रवाई, पुलिस की सक्रिय रणनीति कोनी थाना प्रभारी के नेतृत्व में गठित विशेष निगरानी टीम लगातार आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। इसी दौरान मुखबिर तंत्र से सूचना मिली कि कुछ आदतन अपराधी क्षेत्र में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने त्वरित घेराबंदी कर चार संदिग्धों को हिरासत में लिया। इनके पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और वर्तमान गतिविधियों का विश्लेषण करने के बाद पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 के तहत कार्रवाई की, जिसका उद्देश्य संज्ञेय अपराध होने से पहले ही उसे रोकना है। BNSS 170 : अपराधियों के लिए चेतावनी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अपराध के बाद नहीं, बल्कि अपराध से पहले हस्तक्षेप की नीति का हिस्सा है, जिससे क्षेत्र में शांति और नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा कायम किया जा सके। जिन पर कसी कार्रवाई, उनके नाम पुलिस द्वारा प्रतिबंधित और जेल भेजे गए आरोपियों में शामिल हैं— लक्की भारत (27 वर्ष), पिता: श्रीकांत भारत, निवासी: आवासपारा सेंदरी (काली मंदिर के पास) भोलू यादव उर्फ राकेश यादव (26 वर्ष), पिता: सरजू यादव, निवासी: गोदामपारा, कोनी भीमशंकर वर्मा (20 वर्ष), पिता: इतवारी वर्मा, निवासी: घुटकु, कोनी सुनील यादव (20 वर्ष), पिता: संतोष यादव, निवासी: यादवपारा, कोनी फिलहाल कोनी थाना क्षेत्र में अतिरिक्त गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आगे भी असामाजिक तत्वों के खिलाफ ऐसी कठोर और निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी।
भाई ने छीना बहन का हक, न्याय की चौखट पर पहुंची बेबस पीड़िता
✍️ भागीरथी यादव बिलासपुर। रिश्तों की डोर जब स्वार्थ और लालच से उलझ जाए, तो खून के रिश्ते भी बोझ बन जाते हैं। ऐसा ही एक मार्मिक मामला बिलासपुर जिले से सामने आया है, जहां एक सगी बहन को अपने ही भाई से न्याय की गुहार लगानी पड़ी। कोटा नगर पंचायत निवासी श्रीमती गनेशिया बाई बिंझवार आज अपनी पैतृक जमीन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि आरोप है कि उनके सगे भाई ने ही उनके हक पर डाका डाल दिया। तखतपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कोड़ापुरी में स्थित लगभग पौने दो एकड़ पैतृक भूमि, जो विधिवत पारिवारिक बंटवारे में गनेशिया बाई के हिस्से में आई थी, आज उनके हाथों से फिसलती नजर आ रही है। पीड़िता का कहना है कि गांव में कम आना-जाना होने का फायदा उठाकर उनके भाई धनवान सिंह बिंझवार ने जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया और उसे खेत में तब्दील कर फसल भी बो दी। जब बहन ने अपने अधिकार की बात उठाई, तो भाई ने न सिर्फ जमीन लौटाने से इनकार कर दिया, बल्कि धमकियों का सहारा लेकर उसे चुप कराने की कोशिश भी की। इस अन्याय ने गनेशिया बाई को अंदर तक तोड़ दिया। मानसिक पीड़ा, सामाजिक अपमान और आर्थिक नुकसान के बीच वह खुद को असहाय महसूस करने लगीं। आखिरकार हिम्मत जुटाकर उन्होंने सामाजिक संगठन आज़ाद युवा संगठन के प्रमुख इशहाक कुरैशी से संपर्क किया। संगठन के सहयोग से पीड़िता जिला कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की शरण में पहुंचीं, जहां उन्होंने लिखित ज्ञापन सौंपकर अपने हक की गुहार लगाई। ज्ञापन में अवैध कब्जा हटाने, जमीन वापस दिलाने और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए जिला कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लिया और संबंधित एसडीएम से चर्चा कर शीघ्र जांच व उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रशासन की इस तत्परता से गनेशिया बाई की आंखों में उम्मीद की एक नई चमक दिखाई देने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे पारिवारिक विवादों में अक्सर महिलाएं और कमजोर वर्ग ही सबसे ज्यादा पीड़ित होते हैं। समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप ही उन्हें न्याय दिला सकता है। अब सबकी नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि एक बहन को उसका छीना हुआ हक वापस मिल सके और रिश्तों पर लगे इस दाग को इंसाफ से धोया जा सके।
कुदुदण्ड में पुलिस का सख्त एक्शन, अपराधियों पर कसा शिकंजा आर्म्स एक्ट व प्रतिबंधात्मक धाराओं में 10 आरोपी गिरफ्तार
बिलासपुर। शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों को सुरक्षित माहौल देने के उद्देश्य से बिलासपुर पुलिस ने कुदुदण्ड क्षेत्र में बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना सिविल लाईन पुलिस ने विशेष गश्त एवं चेकिंग अभियान चलाते हुए आर्म्स एक्ट और प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अवैध हथियारों के साथ दो युवक धराए पुलिस को सूचना मिली थी कि कुदुदण्ड क्षेत्र में कुछ युवक सार्वजनिक स्थान पर अवैध हथियार लेकर घूम रहे हैं और लोगों में दहशत फैला रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी कर दो युवकों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से 02 नग लोहे के धारदार चापड़ बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपी: पवन भोसले (25 वर्ष), पिता गजानंद भोसले, निवासी कुदुदण्ड दुर्गेश राव मराठा (22 वर्ष), पिता गुलाब राव, निवासी कुदुदण्ड पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर हथियार जब्त कर लिए हैं। पुलिस का मानना है कि समय रहते कार्रवाई न होती तो इन हथियारों का इस्तेमाल किसी गंभीर वारदात में किया जा सकता था। असामाजिक तत्वों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, 08 पर शिकंजा इसी अभियान के तहत सिविल लाईन पुलिस ने क्षेत्र में बढ़ते विवाद, मारपीट और अशांति की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ‘क्लीन-अप अभियान’ चलाया। इस दौरान शांति भंग करने की आशंका वाले 08 असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं (CrPC/BNSS) के तहत कार्रवाई की गई। कुदुदण्ड क्षेत्र से: केला उर्फ हिमांशु ठाकुर (25 वर्ष) नीरज उर्फ निक्कू यादव (18 वर्ष 06 माह) शेख रजाक (47 वर्ष) अन्य क्षेत्रों से: जाहिद खान (मंगला) किलकेश बघेल (जरहाभाठा) मोहम्मद मोबीन खान (मगरपारा) मोहम्मद आसिफ (तालापारा) सलमान खान (शिवरीनारायण) अपराधियों को सख्त संदेश थाना प्रभारी सिविल लाईन ने बताया कि बिलासपुर पुलिस अपराध मुक्त शहर के लक्ष्य पर लगातार काम कर रही है। कुदुदण्ड जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी और निगरानी बढ़ा दी गई है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या हेल्पलाईन नंबर पर दें। पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई से जहां असामाजिक तत्वों में डर का माहौल बना है, वहीं क्षेत्रवासियों में सुरक्षा और विश्वास की भावना और मजबूत हुई है।
तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से CRPF जवान की मौत, साथी गंभीर घायल
✍️ भागीरथी यादव बिलासपुर में तड़के हुए सड़क हादसे ने एक परिवार का सहारा छीन लिया। तोरवा थाना क्षेत्र के लालखदान ओवरब्रिज के पास तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने बाइक सवार दो युवकों को टक्कर मार दी। हादसे में छुट्टी पर घर आए CRPF जवान मनीष कुमार आदिले की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका दोस्त उदय पाल गंभीर रूप से घायल हो गया। मूल रूप से कोरबा जिले के हरदीबाजार निवासी मनीष आदिले CRPF में पदस्थ थे और उनकी पोस्टिंग श्रीनगर में थी। वे गुरु घासीदास जयंती समारोह मनाकर बिलासपुर लौट रहे थे, तभी यह दर्दनाक हादसा हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। घायल युवक का इलाज जारी है। पुलिस अज्ञात वाहन और फरार चालक की तलाश में जुटी हुई है। यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरनाक अंजाम की याद दिलाता है।
बिलासपुर में ऑटो ठगी का पर्दाफाश, तीन शातिर महिला चोर गिरफ्तार
✍️ भागीरथी यादव बिलासपुर। शहर में ऑटो में सवारी बनकर महिलाओं को निशाना बनाने वाली शातिर महिला चोरों का सिविल लाइन पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। महिलाओं का ध्यान भटकाकर मंगलसूत्र और नकदी चोरी करने वाली तीन महिला आरोपियों को पुलिस ने चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से एक मंगलसूत्र और नकद समेत करीब 30 हजार रुपये का सामान बरामद किया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, 16 दिसंबर को सकरी थाना क्षेत्र की रहने वाली मनीषा सोनी ने सिविल लाइन थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि ऑटो में सफर के दौरान कुछ महिलाएं उनसे बातचीत में उलझाती रहीं और इसी बीच उसलापुर ओवरब्रिज के पास मौका पाकर उनका मंगलसूत्र और नगदी चोरी कर ली गई। शिकायत मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस हरकत में आई और अपराध दर्ज कर त्वरित जांच शुरू की। पुलिस की सक्रियता का नतीजा यह रहा कि कुछ ही घंटों में तीनों महिला आरोपियों को दबोच लिया गया। पूछताछ में उन्होंने वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया, जिसके बाद चोरी गया सामान बरामद कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपी महिलाएं— रचना गिरी गोस्वामी (25 वर्ष), निवासी महेशपुरमुरा, थाना जयनगर, जिला सूरजपुर कौशिल्या गिरी गोस्वामी (30 वर्ष), निवासी पोडीपोडा, थाना बांगो, जिला कोरबा रजन गिरी गोस्वामी (32 वर्ष), निवासी महेशपुरमुरा, थाना जयनगर, जिला सूरजपुर पुलिस ने आम नागरिकों, खासकर महिलाओं से अपील की है कि सार्वजनिक परिवहन में सफर के दौरान अनजान लोगों से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें। इस त्वरित कार्रवाई से शहर में सक्रिय ऑटो ठगी गिरोह पर बड़ी चोट मानी जा रही है।
बिलासपुर की सड़कों पर ई-रिक्शा का कहर, नियमों की अनदेखी से बढ़ा हादसों का खतरा
✍️ भागीरथी यादव बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में ई-रिक्शा जहां आम लोगों के लिए सस्ता और सुविधाजनक परिवहन साधन बनकर उभरा है, वहीं इनका बेलगाम संचालन अब शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सड़कों पर ई-रिक्शा चालकों की मनमानी इस हद तक बढ़ चुकी है कि ट्रैफिक नियम केवल कागजों तक सिमटते नजर आ रहे हैं। शहर के व्यस्त इलाकों—गोल बाजार, पुराना बस स्टैंड, नेहरू चौक, सत्यम टॉकीज क्षेत्र, व्यापार विहार, सिरगिट्टी रोड और रेलवे स्टेशन—में दिनभर ई-रिक्शा का अव्यवस्थित जमावड़ा लगा रहता है। बिना संकेत अचानक मोड़ लेना, सड़क के बीचों-बीच ब्रेक लगाना और जहां-तहां सवारी चढ़ाना-उतारना आम बात हो गई है। इससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि पीछे चल रहे वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई चौराहों पर ई-रिक्शा चालकों ने सड़क को ही अपना निजी स्टैंड बना लिया है। अवैध पार्किंग से सड़कें संकरी हो गई हैं, नतीजतन पीक आवर्स में लंबा जाम लगना आम हो गया है। इन जामों में स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और यहां तक कि एंबुलेंस भी फंस जाती हैं, जिससे आम नागरिकों में भारी नाराजगी है। नियमों की अनदेखी, सुरक्षा से खिलवाड़ चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक न तो प्रशिक्षित हैं और न ही उन्हें यातायात संकेतों की सही जानकारी है। कई चालक बिना वैध लाइसेंस और परमिट के वाहन चला रहे हैं। मुनाफे की होड़ में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही हैं—बच्चों को गोद में, बुजुर्गों और महिलाओं को असुरक्षित हालात में सफर कराया जा रहा है, जो किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है। यातायात पुलिस पर भी सवाल शहरवासियों का आरोप है कि यातायात पुलिस की ढिलाई ने ही ई-रिक्शा चालकों के हौसले बढ़ा दिए हैं। शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से नियमों का उल्लंघन लगातार जारी है। कई चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नियम तोड़ते ई-रिक्शा साफ देखे जा सकते हैं। प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग अब शहरवासी मांग कर रहे हैं कि ई-रिक्शा संचालन के लिए निर्धारित रूट, स्टैंड और समय का सख्ती से पालन कराया जाए। बिना लाइसेंस और परमिट वाले वाहनों को जब्त किया जाए, नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और बार-बार उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं। साथ ही सभी ई-रिक्शा चालकों को अनिवार्य यातायात प्रशिक्षण देने की भी जरूरत बताई जा रही है। यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो ई-रिक्शा की यह अव्यवस्था आने वाले दिनों में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। न्यायधानी की सड़कों को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए अब सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि ठोस और कठोर कार्रवाई की जरूरत है।
बिलासपुर पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 15 पुलिसकर्मियों के तबादले
✍️ भागीरथी यादव बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में प्रशासनिक सर्जरी का दौर लगातार जारी है। इसी कड़ी में बिलासपुर जिले में पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया गया है। जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कुल 15 पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए हैं। जारी आदेश के अनुसार, तबादला सूची में 2 सहायक उप निरीक्षक (ASI), 5 हेड कांस्टेबल और 8 कांस्टेबल शामिल हैं। सभी पुलिसकर्मियों को नई जिम्मेदारियों के साथ अलग-अलग स्थानों पर पदस्थ किया गया है। यह फेरबदल प्रशासनिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। एसपी रजनेश सिंह ने जारी किए आदेश पुलिसकर्मियों के तबादले और नई पदस्थापना को लेकर पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बिलासपुर की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम जिले में पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और फील्ड स्तर पर मजबूती सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। तबादलों के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को शीघ्र नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिसकर्मियों की तबादला सूची 👉 प्रशासनिक स्तर पर किए गए इस फेरबदल को बिलासपुर पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शीतकालीन सत्र में गूंजा सैनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन घोटाला
✍️ भागीरथी यादव बिलासपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पहले शीतकालीन सत्र में सैनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन एवं इंसीनरेटर खरीदी में हुई कथित अनियमितताओं का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर आकृष्ट किया। कौशिक ने आरोप लगाया कि सूचिता योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर शासकीय स्कूलों में लगाई गई मशीनें पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लापरवाही की भेंट चढ़ गईं। कई मशीनें शुरू से ही खराब रहीं, तो कई कुछ समय बाद अनुपयोगी हो गईं, जिससे छात्राएं आज भी बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं से वंचित हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। कौशिक ने इसे बालिकाओं के स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की।
बिलासपुर हाई कोर्ट का अहम फैसला: बांझपन की जानकारी छिपाना माना गया क्रूरता, तलाक बरकरार
✍️ भागीरथी यादव बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण पारिवारिक विवाद में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि शादी से पहले गंभीर चिकित्सकीय तथ्य छिपाना वैवाहिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा पति को दिया गया तलाक का आदेश बरकरार रखा है, हालांकि पत्नी के भविष्य को सुरक्षित रखते हुए पति को 5 लाख रुपये स्थायी भरण-पोषण देने का निर्देश भी दिया है। मामला कवर्धा जिले से जुड़ा है, जहां पति-पत्नी की शादी 5 जून 2015 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। शादी के बाद पत्नी ने पति को बताया कि उसे पीरियड्स नहीं आ रहे हैं, जिसे पति ने गर्भावस्था समझा। जब मेडिकल जांच कराई गई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पत्नी को पिछले 10 वर्षों से मासिक धर्म नहीं आ रहा था और उसके गर्भाशय से जुड़ी समस्या के कारण संतान उत्पत्ति में गंभीर कठिनाई थी। पति का आरोप था कि पत्नी ने यह अहम तथ्य शादी से पहले जानबूझकर छिपाया। जब उससे इसका कारण पूछा गया तो उसने स्वीकार किया कि यदि पहले सच बताया होता तो शादी नहीं होती। इस खुलासे से पति को गहरा मानसिक आघात पहुंचा। इसके बाद पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता के आधार पर फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर की। फैमिली कोर्ट, कवर्धा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पति के पक्ष में तलाक की डिक्री पारित कर दी। इस फैसले को चुनौती देते हुए पत्नी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। पत्नी का तर्क था कि उसकी चिकित्सकीय स्थिति स्थायी नहीं थी और इलाज के बाद वह गर्भधारण के लिए फिट हो गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने माना कि शादी के समय ऐसी गंभीर चिकित्सकीय जानकारी छिपाना विश्वासघात और मानसिक क्रूरता के समान है। अदालत ने फैमिली कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पत्नी के भरण-पोषण का भी ध्यान रखा और पति को आदेश दिया कि वह पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में 5 लाख रुपये का भुगतान करे। यह फैसला न केवल पारदर्शिता और विश्वास की वैवाहिक अहमियत को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि सच छिपाकर किया गया विवाह कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है।
















