युवा नेतृत्व के हाथ कमान: जेसी तरुण बत्रा चुने गए जेसीआई रायपुर मेट्रो के नए अध्यक्ष

अध्यक्ष पद पर जे.सी. तरुण बत्रा की ताजपोशी, जेसीआई रायपुर मेट्रो की 2026 कार्यकारिणी घोषित   रायपुर। जेसीआई रायपुर मेट्रो की वर्ष 2026 की नई कार्यकारिणी की औपचारिक घोषणा आज अध्याय के संस्थापक जेसीआई सेन. चेतन तरवानी के कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान की गई। इस महत्वपूर्ण अवसर पर जोन उपाध्यक्ष जेसी आशीष भूटानी एवं तत्कालीन पूर्व अध्यक्ष जेसी सोनू पंजवानी विशेष रूप से उपस्थित रहे।   बैठक में सर्वसम्मति से जे.सी. तरुण बत्रा को वर्ष 2026 के लिए अध्यक्ष चुना गया। संगठन के प्रति उनकी निरंतर सक्रियता, नेतृत्व क्षमता एवं युवा सदस्यों के बीच मजबूत पकड़ को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलते ही जेसीआई रायपुर मेट्रो में नए उत्साह और ऊर्जा का संचार देखने को मिला।   नई कार्यकारिणी में   • जे.सी. तरुण बत्रा – अध्यक्ष   • जे.सी. रंजीत अरोड़ा – सचिव   • सेन. जे.सी. विक्रम शर्मा – अध्याय प्रभारी   • एच.जी.एफ. जे.सी. दीपक मेघानी – कोषाध्यक्ष नियुक्त किए गए।   तरुण बत्रा: युवा नेतृत्व की पहचान नवनियुक्त अध्यक्ष जे.सी. तरुण बत्रा को संगठन में एक ऊर्जावान, दूरदर्शी और कर्मठ लीडर के रूप में जाना जाता है। जेसीआई के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में उनकी सक्रिय भूमिका, टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संगठन के सदस्यों में यह विश्वास है कि उनके नेतृत्व में जेसीआई रायपुर मेट्रो नई ऊंचाइयों को छुएगा।   इस अवसर पर संस्थापक जेसीआई सेन. चेतन तरवानी सहित उपस्थित सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नई कार्यकारिणी को बधाई देते हुए कहा कि यह टीम संगठन को और अधिक सशक्त, प्रभावी एवं समाजोपयोगी गतिविधियों की ओर ले जाएगी। कार्यक्रम के अंत में सभी ने जेसीआई रायपुर मेट्रो के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कॉलेज बस में शर्मनाक हरकतें: छात्राओं की हिम्मत रंग लाई, कंडक्टर गिरफ्तार

✍️ भागीरथी यादव   डोंगरगढ़। सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को चुनौती देने वाले एक मामले में डोंगरगढ़ पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए निजी बस के कंडक्टर को गिरफ्तार किया है। कॉलेज छात्राओं के साथ लंबे समय से छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार कर रहे आरोपी की हरकतों से क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित छात्राओं के अनुसार, कॉलेज आने-जाने के दौरान बस में सफर करते समय आरोपी कंडक्टर लगातार अशोभनीय टिप्पणियां करता था और जानबूझकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। रोजाना उसी बस से यात्रा करने की मजबूरी के चलते छात्राएं भय और तनाव में जी रही थीं, लेकिन आखिरकार उन्होंने साहस दिखाते हुए परिजनों के साथ थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही डोंगरगढ़ पुलिस हरकत में आई। त्वरित जांच और छात्राओं के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी कंडक्टर नेतराम यादव, निवासी सुकुलदैहान, को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उसके खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया। “महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि” — एडिशनल एसपी एडिशनल एसपी पुष्पेंद्र नायक ने मामले पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि छात्राओं के बयान पूरी तरह स्पष्ट और विश्वसनीय हैं। उन्होंने दो टूक कहा, “महिलाओं और छात्राओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा। सार्वजनिक परिवहन में इस तरह की घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।” यह कार्रवाई न केवल पीड़ित छात्राओं को न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देती है कि अब चुप्पी नहीं, कार्रवाई होगी।

सटीक विवेचना की जीत: बिलासपुर में नशे के सौदागर को 15 साल की सज़ा

  बिलासपुर। एनडीपीएस एक्ट के मामलों में अक्सर आरोपी तकनीकी खामियों का सहारा लेकर कानून की पकड़ से बाहर निकल जाते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग रही। बिलासपुर पुलिस ने परंपरागत तरीके नहीं, बल्कि सटीक विवेचना को हथियार बनाया—और नतीजा ऐतिहासिक सज़ा के रूप में सामने आया। तकनीक नहीं, कानून बोला पुलिस ने जब्ती से लेकर सैंपलिंग तक एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 22 के सभी प्रावधानों का अक्षरशः पालन किया। हर प्रक्रिया में शुद्धता और पारदर्शिता रखी गई, जिससे बचाव पक्ष के लिए तकनीकी दांव-पेंच बेअसर साबित हुए। रिकॉर्ड समय में चालान गिरफ्तारी के महज तीन महीने के भीतर—07 नवंबर 2023 को—पुलिस ने ठोस साक्ष्यों के साथ चार्जशीट पेश कर दी। इस तेज़ और सटीक कार्रवाई ने मुकदमे की दिशा तय कर दी। अदालत में दमदार पक्ष विशेष लोक अभियोजक सूर्यकांत शर्मा और विवेचक सब-इंस्पेक्टर अवधेश सिंह ने अदालत के सामने ऐसे साक्ष्य रखे कि आरोपी का बचाव टिक नहीं सका। गवाहों, दस्तावेज़ों और फॉरेंसिक रिपोर्ट्स की कड़ी इतनी मजबूत थी कि न्यायालय को सख्त संदेश देने का आधार मिल गया। न्यायालय का कड़ा रुख न्यायाधीश श्रीमती किरण त्रिपाठी की अदालत ने इस अपराध को समाज के लिए गंभीर खतरा मानते हुए 3 जनवरी 2026 को फैसला सुनाया। आदेश स्पष्ट था—नशे के कारोबारियों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं। सजा: 15 साल का कठोर कारावास और 1.5 लाख रुपये का जुर्माना। यह फैसला उन सभी के लिए चेतावनी है जो बिलासपुर की फिज़ा में नशे का ज़हर घोलने का मंसूबा रखते हैं। वर्दी का सम्मान, व्यवस्था की पहचान इस पूरी कानूनी लड़ाई के असली नायक रहे सब-इंस्पेक्टर अवधेश सिंह। उनकी पेशेवर और अनुशासित विवेचना से प्रभावित होकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह (IPS) ने उन्हें पुरस्कृत किया। यह सम्मान केवल एक अधिकारी का नहीं, बल्कि उस कार्यसंस्कृति का प्रमाण है जहाँ क्वालिटी इन्वेस्टिगेशन को प्राथमिकता दी जा रही है। घटना की शुरुआत 11 अगस्त 2023 को सिविल लाइन थाने के सब-इंस्पेक्टर अवधेश सिंह को एक छोटा लेकिन खतरनाक इनपुट मिला—“मिनी बस्ती का एक युवक युवाओं को नशे की दलदल में धकेलने की तैयारी में है।” पुलिस ने बिना देर किए जाल बिछाया। जरहाभाठा की तंग गलियों में कबाड़ी दुकान के पास घेराबंदी कर 23 वर्षीय आकाश कुर्रे को दबोच लिया गया।   यह मामला साबित करता है कि जब विवेचना सटीक हो और इरादे मजबूत हों—तो कानून की जीत तय होती है।  

रिश्वतखोरी का आरोप: चांपा कोर्ट में पदस्थ आरक्षक तत्काल प्रभाव से निलंबित

  ✍️ भागीरथी यादव   जांजगीर-चांपा। न्यायिक प्रक्रिया में भरोसे को झकझोरने वाला मामला सामने आया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, चांपा न्यायालय में पदस्थ कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक रंजीत कुमार अनंत को रिश्वतखोरी और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता प्रियंका द्वारा पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा को एक गंभीर शिकायत पत्र सौंपा गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरक्षक रंजीत कुमार अनंत ने न्यायालयीन कार्य से जुड़े मामले में तीन हजार रुपये की रिश्वत की मांग की, जिसमें से फोन-पे के माध्यम से 1000 रुपये प्राप्त किए गए, साथ ही शिकायतकर्ता के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रथम दृष्टया जांच के आधार पर आरक्षक रंजीत कुमार अनंत (आर.क्र. 107) को तत्काल निलंबित करते हुए रक्षित केंद्र, जांजगीर-चांपा में संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि में संबंधित आरक्षक को नियमानुसार निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। यह कार्रवाई पुलिस विभाग द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनाई गई शून्य सहनशीलता नीति का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है। वहीं, न्यायालय से जुड़े कर्मियों पर लगे इस तरह के आरोपों ने सिस्टम की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया गया है।

मेडिकल कॉलेज और सड़कें बनेंगी, पर युवाओं के हाथ कब आएगा काम?

  मनेन्द्रगढ़ में यातायात अव्यवस्था और बेरोजगारी पर उठे सवाल मनेन्द्रगढ़। जिला मुख्यालय होने के बावजूद मनेन्द्रगढ़ शहर आज बुनियादी व्यवस्थाओं के अभाव से जूझ रहा है। शहर की संकरी और अव्यवस्थित सड़कें रोज़ाना यातायात जाम का कारण बन रही हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। शहर के प्रमुख बाजार क्षेत्रों और चौक-चौराहों पर बेतरतीब ढंग से लगे सब्जी ठेले यातायात व्यवस्था को और अधिक बिगाड़ रहे हैं। स्थानीय पत्रकार आनंद शर्मा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन चाहे, तो ठेलों के लिए वैकल्पिक और सुव्यवस्थित स्थान चिन्हित कर व्यवस्था को सुधारा जा सकता है। मनेन्द्रगढ़ में भूमि की कमी नहीं है, समस्या केवल प्रशासनिक इच्छाशक्ति की है। इसी बीच बेरोजगारी का सवाल भी लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि मनेन्द्रगढ़ विधायक श्याम बिहारी जायसवाल वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें रोजगार सृजन की दिशा में ठोस योजना लानी होगी। शहर के बड़े पार्कों या सार्वजनिक परिसरों में योजनाबद्ध तरीके से दुकानों का निर्माण कर कई युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। गौरतलब है कि मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज के निर्माण की योजना और सड़कों के लिए करोड़ों रुपये के बजट की स्वीकृति जैसे बड़े विकास कार्य प्रस्तावित हैं। लेकिन इन योजनाओं के बीच बेरोजगार युवाओं के लिए किसी दीर्घकालिक और स्थायी रोजगार योजना का अभाव साफ नजर आता है। आज मनेन्द्रगढ़ का आम नागरिक यही सवाल पूछ रहा है— क्या विकास सिर्फ इमारतों और सड़कों तक सीमित रहेगा, या युवाओं के भविष्य को भी संवारने की कोई ठोस पहल होगी?

रायपुर | रामा वर्ल्ड में युवक की संदिग्ध मौत

✍️ भागीरथी यादव   रायपुर – विधानसभा थाना क्षेत्र के रामा वर्ल्ड परिसर में एक युवक की संदिग्ध हालत में लाश मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान शुभम राणा के रूप में हुई है, जो देवघर (झारखंड) का निवासी बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शुभम स्वर्णभूमि क्षेत्र में निर्माणाधीन मकान में कारपेंटरी का काम करता था। बीती रात करीब 11 बजे से वह अपने कमरे से गायब था। सुबह तलाश के दौरान उसकी क्षत-विक्षत लाश मिली। घटना की सूचना पर विधानसभा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। झारखंड से पहुंचे परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

रायगढ़: मजदूरी को लेकर दबंगई, पिता–पुत्र से बेरहमी से मारपीट, 24 घंटे में 8 आरोपी गिरफ्तार

  रायगढ़। कोतरारोड थाना क्षेत्र के किरोड़ीमल नगर में मजदूरी को लेकर हुई एक सनसनीखेज मारपीट की घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। 4 जनवरी 2026 को एक निजी कंपनी में कार्यरत मजदूरों ने दबंगई दिखाते हुए एक व्यक्ति और उसके बेटे को जबरन साथ काम करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर आरोपियों ने पिता–पुत्र को कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जबरन मजदूरी का दबाव, विरोध पर हिंसा प्राप्त जानकारी के अनुसार, किरोड़ीमल नगर निवासी गोविंद राम नेताम और उनका बेटा छवि नेताम आरोपियों के निशाने पर आ गए। आरोपियों ने छवि नेताम पर जबरन अपने साथ काम करने का दबाव बनाया। जब उसने इंकार किया, तो विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने गेट बंद कर पिता–पुत्र के साथ जमकर मारपीट की। इस दौरान आरोपियों ने गोविंद नेताम के सिर पर डंडे से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके सिर से खून बहने लगा। किसी तरह जान बचाकर दोनों पीड़ित वहां से निकलने में सफल रहे और सीधे कोतरारोड थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 24 घंटे में गिरफ्तारी मामला दर्ज होते ही कोतरारोड पुलिस हरकत में आई और जांच तेज करते हुए महज 24 घंटे के भीतर 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। गिरफ्तार आरोपी बुधमन उरांव (40 वर्ष) अशोक उरांव (24 वर्ष) कार्तिक उरांव (25 वर्ष) प्रकाश गोप (19 वर्ष) मनोज उरांव (19 वर्ष) मंगलदीप उरांव (26 वर्ष) अरुण करमाली (19 वर्ष) (एक आरोपी नाबालिग होने की जांच अलग से की जा रही है – यदि लागू हो) सभी आरोपी किरोड़ीमल नगर के निवासी हैं और मूल रूप से झारखंड राज्य के रहने वाले बताए जा रहे हैं। न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और यदि अन्य आरोपी संलिप्त पाए गए तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ पुलिस में 17 सहायक उप निरीक्षकों को मिली पदोन्नति, बने उप निरीक्षक

  रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर अटल नगर द्वारा आदेश जारी किया गया है। जारी आदेश के अनुसार 17 सहायक उप निरीक्षकों (ASI) को उप निरीक्षक (SI) के पद पर पदोन्नत किया गया है। यह पदोन्नति योग्यता सूची वर्ष 2025 के आधार पर की गई है। पदोन्नत अधिकारियों को वेतन मैट्रिक्स लेवल-8 (₹35,400 से ₹1,12,400) के अंतर्गत उप निरीक्षक पद पर कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा। अधिकारियों की नई पदस्थापना के संबंध में पृथक आदेश जारी किए जाएंगे। पदोन्नत अधिकारियों की सूची में रायपुर, बालोद, जीआरपी रायपुर, नारायणपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और बलौदाबाजार जिलों में पदस्थ अधिकारी शामिल हैं।

खोंगापानी वन कार्य घोटाला: मजदूरों का हक छीना, जेसीबी से उजाड़ा गया नाला — क्या डीएफओ मनीष कश्यप की जानकारी में हुआ पूरा खेल?

  एमसीबी / मनेंद्रगढ़। मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत खोंगापानी क्षेत्र में कराए गए वन कार्यों को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जिन कार्यों को मानव श्रम से कराकर ग्रामीणों को रोजगार देना था, उन्हें खुलेआम जेसीबी मशीनों से कराया गया, जिससे न केवल मजदूरों का हक छीना गया बल्कि पर्यावरण के साथ भी खिलवाड़ किया गया। रोजगार की जगह मशीनें, पर्यावरण पर भी संकट ग्रामीणों के अनुसार बरसाती नाले में मशीनों के प्रयोग से प्राकृतिक जल प्रवाह से छेड़छाड़ की गई है। इससे आने वाले समय में जल संरक्षण व्यवस्था प्रभावित होने और क्षेत्र में पर्यावरणीय असंतुलन की आशंका बढ़ गई है। सवाल यह है कि क्या यह सब बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के संभव था? अधिकारियों के संरक्षण में काम होने का आरोप ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह पूरा कार्य वन मंडलाधिकारी (डीएफओ), अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) और संबंधित रेंजर की जानकारी एवं संरक्षण में कराया गया। जब इस संबंध में रेंजर कुर्रे से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है। पहले भी उजागर हो चुके हैं ऐसे ही मामले ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले बहरासी क्षेत्र में भी बरसाती नाले पर जेसीबी और ट्रैक्टर से तालाब निर्माण कराया गया था। उस मामले में न तो कोई जांच हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई या राशि की रिकवरी। लगातार ऐसे मामलों से वन विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। डीएफओ मनीष कश्यप का पक्ष अब तक गायब मामले में वन मंडलाधिकारी मनीष कश्यप का पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उनका मोबाइल ब्लॉक मिला। एक जिम्मेदार अधिकारी का मीडिया और आम जनता से इस तरह दूरी बनाए रखना विभागीय मंशा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। फर्जी मस्टर रोल और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में फर्जी मस्टर रोल भरकर मजदूरी राशि के आहरण और कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो भुगतान प्रक्रिया, मशीनों के उपयोग और मस्टर रोल में भारी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उच्च स्तरीय जांच की मांग ग्रामीणों ने खोंगापानी और बहरासी—दोनों मामलों में निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही मशीनों से कराए गए कार्यों की लागत, भुगतान और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जल संरक्षण जैसे कार्य स्थानीय मजदूरों से कराए जाएं, ताकि विकास के साथ रोजगार भी सुनिश्चित हो। चुप्पी या कार्रवाई? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग के शीर्ष अधिकारी इन गंभीर आरोपों पर चुप्पी तोड़ेंगे, या यह मामला भी पहले की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा? गौरतलब है कि वन विभाग की कार्यप्रणाली के विरोध में 9 दिसंबर 2025 को कांग्रेस कमेटी द्वारा उग्र प्रदर्शन भी किया गया था, लेकिन हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या खोंगापानी वन कार्य घोटाले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर आरोपों की यह फेहरिस्त भी सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगी।

सोशल मीडिया वीडियो से हड़कंप: अचानकमार टाइगर रिजर्व में हथियार लहराने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

✍️ भागीरथी यादव   कोर जोन से सटे क्षेत्र में फायरिंग, वन विभाग की सख्त कार्रवाई मुंगेली –  अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) से जुड़ा एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आ गया। प्रतिबंधित कोर जोन से लगे क्षेत्र में अवैध प्रवेश कर हथियार लहराने और फायरिंग करने के मामले में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वायरल वीडियो में खुलेआम हथियार लहराते और गोली चलाते युवक दिखाई दे रहे थे, जिससे न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की भी पोल खुल गई।  गिरफ्तार आरोपी पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार है— अजीत वैष्णव (26 वर्ष) अनिकेत (27 वर्ष) विक्रांत वैष्णव (36 वर्ष) आरोपियों के कब्जे से 2 एयर राइफल और एक टाटा सफारी स्टॉर्म वाहन जब्त किया गया है। कड़ी धाराओं में मामला दर्ज तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।  विभागीय स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई की है— संबंधित बैरियर गार्ड को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया परिक्षेत्र अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी पूरे प्रकरण की जांच के लिए सहायक संचालक (कोर) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया  वन विभाग का सख्त संदेश वन विभाग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि— “टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अवैध प्रवेश, हथियारों का प्रदर्शन और वन्यजीवों को खतरा पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”  आम नागरिकों से अपील वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें संरक्षित वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की संदिग्ध या अवैध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत विभाग को सूचित करें, ताकि वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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