रायपुर | रामा वर्ल्ड में युवक की संदिग्ध मौत
✍️ भागीरथी यादव रायपुर – विधानसभा थाना क्षेत्र के रामा वर्ल्ड परिसर में एक युवक की संदिग्ध हालत में लाश मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान शुभम राणा के रूप में हुई है, जो देवघर (झारखंड) का निवासी बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शुभम स्वर्णभूमि क्षेत्र में निर्माणाधीन मकान में कारपेंटरी का काम करता था। बीती रात करीब 11 बजे से वह अपने कमरे से गायब था। सुबह तलाश के दौरान उसकी क्षत-विक्षत लाश मिली। घटना की सूचना पर विधानसभा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। झारखंड से पहुंचे परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
रायगढ़: मजदूरी को लेकर दबंगई, पिता–पुत्र से बेरहमी से मारपीट, 24 घंटे में 8 आरोपी गिरफ्तार
रायगढ़। कोतरारोड थाना क्षेत्र के किरोड़ीमल नगर में मजदूरी को लेकर हुई एक सनसनीखेज मारपीट की घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। 4 जनवरी 2026 को एक निजी कंपनी में कार्यरत मजदूरों ने दबंगई दिखाते हुए एक व्यक्ति और उसके बेटे को जबरन साथ काम करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर आरोपियों ने पिता–पुत्र को कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जबरन मजदूरी का दबाव, विरोध पर हिंसा प्राप्त जानकारी के अनुसार, किरोड़ीमल नगर निवासी गोविंद राम नेताम और उनका बेटा छवि नेताम आरोपियों के निशाने पर आ गए। आरोपियों ने छवि नेताम पर जबरन अपने साथ काम करने का दबाव बनाया। जब उसने इंकार किया, तो विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने गेट बंद कर पिता–पुत्र के साथ जमकर मारपीट की। इस दौरान आरोपियों ने गोविंद नेताम के सिर पर डंडे से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके सिर से खून बहने लगा। किसी तरह जान बचाकर दोनों पीड़ित वहां से निकलने में सफल रहे और सीधे कोतरारोड थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 24 घंटे में गिरफ्तारी मामला दर्ज होते ही कोतरारोड पुलिस हरकत में आई और जांच तेज करते हुए महज 24 घंटे के भीतर 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। गिरफ्तार आरोपी बुधमन उरांव (40 वर्ष) अशोक उरांव (24 वर्ष) कार्तिक उरांव (25 वर्ष) प्रकाश गोप (19 वर्ष) मनोज उरांव (19 वर्ष) मंगलदीप उरांव (26 वर्ष) अरुण करमाली (19 वर्ष) (एक आरोपी नाबालिग होने की जांच अलग से की जा रही है – यदि लागू हो) सभी आरोपी किरोड़ीमल नगर के निवासी हैं और मूल रूप से झारखंड राज्य के रहने वाले बताए जा रहे हैं। न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और यदि अन्य आरोपी संलिप्त पाए गए तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ पुलिस में 17 सहायक उप निरीक्षकों को मिली पदोन्नति, बने उप निरीक्षक
रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर अटल नगर द्वारा आदेश जारी किया गया है। जारी आदेश के अनुसार 17 सहायक उप निरीक्षकों (ASI) को उप निरीक्षक (SI) के पद पर पदोन्नत किया गया है। यह पदोन्नति योग्यता सूची वर्ष 2025 के आधार पर की गई है। पदोन्नत अधिकारियों को वेतन मैट्रिक्स लेवल-8 (₹35,400 से ₹1,12,400) के अंतर्गत उप निरीक्षक पद पर कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा। अधिकारियों की नई पदस्थापना के संबंध में पृथक आदेश जारी किए जाएंगे। पदोन्नत अधिकारियों की सूची में रायपुर, बालोद, जीआरपी रायपुर, नारायणपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और बलौदाबाजार जिलों में पदस्थ अधिकारी शामिल हैं।
खोंगापानी वन कार्य घोटाला: मजदूरों का हक छीना, जेसीबी से उजाड़ा गया नाला — क्या डीएफओ मनीष कश्यप की जानकारी में हुआ पूरा खेल?
एमसीबी / मनेंद्रगढ़। मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत खोंगापानी क्षेत्र में कराए गए वन कार्यों को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जिन कार्यों को मानव श्रम से कराकर ग्रामीणों को रोजगार देना था, उन्हें खुलेआम जेसीबी मशीनों से कराया गया, जिससे न केवल मजदूरों का हक छीना गया बल्कि पर्यावरण के साथ भी खिलवाड़ किया गया। रोजगार की जगह मशीनें, पर्यावरण पर भी संकट ग्रामीणों के अनुसार बरसाती नाले में मशीनों के प्रयोग से प्राकृतिक जल प्रवाह से छेड़छाड़ की गई है। इससे आने वाले समय में जल संरक्षण व्यवस्था प्रभावित होने और क्षेत्र में पर्यावरणीय असंतुलन की आशंका बढ़ गई है। सवाल यह है कि क्या यह सब बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के संभव था? अधिकारियों के संरक्षण में काम होने का आरोप ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह पूरा कार्य वन मंडलाधिकारी (डीएफओ), अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) और संबंधित रेंजर की जानकारी एवं संरक्षण में कराया गया। जब इस संबंध में रेंजर कुर्रे से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है। पहले भी उजागर हो चुके हैं ऐसे ही मामले ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले बहरासी क्षेत्र में भी बरसाती नाले पर जेसीबी और ट्रैक्टर से तालाब निर्माण कराया गया था। उस मामले में न तो कोई जांच हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई या राशि की रिकवरी। लगातार ऐसे मामलों से वन विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। डीएफओ मनीष कश्यप का पक्ष अब तक गायब मामले में वन मंडलाधिकारी मनीष कश्यप का पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उनका मोबाइल ब्लॉक मिला। एक जिम्मेदार अधिकारी का मीडिया और आम जनता से इस तरह दूरी बनाए रखना विभागीय मंशा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। फर्जी मस्टर रोल और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में फर्जी मस्टर रोल भरकर मजदूरी राशि के आहरण और कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो भुगतान प्रक्रिया, मशीनों के उपयोग और मस्टर रोल में भारी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उच्च स्तरीय जांच की मांग ग्रामीणों ने खोंगापानी और बहरासी—दोनों मामलों में निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही मशीनों से कराए गए कार्यों की लागत, भुगतान और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जल संरक्षण जैसे कार्य स्थानीय मजदूरों से कराए जाएं, ताकि विकास के साथ रोजगार भी सुनिश्चित हो। चुप्पी या कार्रवाई? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग के शीर्ष अधिकारी इन गंभीर आरोपों पर चुप्पी तोड़ेंगे, या यह मामला भी पहले की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा? गौरतलब है कि वन विभाग की कार्यप्रणाली के विरोध में 9 दिसंबर 2025 को कांग्रेस कमेटी द्वारा उग्र प्रदर्शन भी किया गया था, लेकिन हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या खोंगापानी वन कार्य घोटाले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर आरोपों की यह फेहरिस्त भी सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगी।
सोशल मीडिया वीडियो से हड़कंप: अचानकमार टाइगर रिजर्व में हथियार लहराने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार
✍️ भागीरथी यादव कोर जोन से सटे क्षेत्र में फायरिंग, वन विभाग की सख्त कार्रवाई मुंगेली – अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) से जुड़ा एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आ गया। प्रतिबंधित कोर जोन से लगे क्षेत्र में अवैध प्रवेश कर हथियार लहराने और फायरिंग करने के मामले में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वायरल वीडियो में खुलेआम हथियार लहराते और गोली चलाते युवक दिखाई दे रहे थे, जिससे न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की भी पोल खुल गई। गिरफ्तार आरोपी पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार है— अजीत वैष्णव (26 वर्ष) अनिकेत (27 वर्ष) विक्रांत वैष्णव (36 वर्ष) आरोपियों के कब्जे से 2 एयर राइफल और एक टाटा सफारी स्टॉर्म वाहन जब्त किया गया है। कड़ी धाराओं में मामला दर्ज तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। विभागीय स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई की है— संबंधित बैरियर गार्ड को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया परिक्षेत्र अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी पूरे प्रकरण की जांच के लिए सहायक संचालक (कोर) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया वन विभाग का सख्त संदेश वन विभाग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि— “टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अवैध प्रवेश, हथियारों का प्रदर्शन और वन्यजीवों को खतरा पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” आम नागरिकों से अपील वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें संरक्षित वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की संदिग्ध या अवैध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत विभाग को सूचित करें, ताकि वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
राजधानी की सेंट्रल जेल में कैदी की संदिग्ध मौत, परिजनों का हंगामा — व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
रायपुर। राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल उस वक्त सुर्खियों में आ गई, जब एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान सुनील महानद के रूप में हुई है, जो जेल की बड़ी गोल नंबर–5 बैरक में बंद था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 6 बजे सुनील ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की खबर मिलते ही जेल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई, वहीं मृतक के परिजनों ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए जेल प्रशासन पर प्रताड़ना और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि सुनील को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसकी शिकायत पहले भी की गई थी। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि कड़ी सुरक्षा के बीच कैदी को आत्महत्या का मौका कैसे मिला? क्या जेल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही ढंग से कर रहा था? घटना के बाद गंज थाना क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में गाड़ा समाज के लोग सेंट्रल जेल के बाहर एकत्र होकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई, उच्च स्तरीय जांच और मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर पुलिस बल और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तैनात हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है कि कैदी की मौत वास्तव में आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण या साजिश छिपी है। फिलहाल, सेंट्रल जेल में हुई इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है और जांच के नतीजों पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
दुर्ग में अवैध शराब तस्करी का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार, तीन फरार
✍️ भागीरथी यादव दुर्ग। दुर्ग जिले के पद्मनाभपुर थाना पुलिस ने संगठित तरीके से अवैध शराब की बिक्री करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बिना होलोग्राम लगी बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब, स्कूटी और मोबाइल फोन सहित कुल 78 हजार 200 रुपये की सामग्री जब्त की है। इस मामले में गिरोह के तीन अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 4 जनवरी को पद्मनाभपुर थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो युवक स्कूटी से अवैध शराब लेकर बिक्री के उद्देश्य से बोरसीभाठा रेलवे फाटक की ओर जा रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल इलाके में घेराबंदी कर स्कूटी सवार दोनों युवकों को पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान ग्राम धनोरा निवासी संतोष गिरी (47 वर्ष) और सेक्टर-5 भिलाई नगर निवासी राज नायक (19 वर्ष) के रूप में कराई। तलाशी के दौरान आरोपी राज नायक के पास से स्कूटी में रखी प्लास्टिक बोरी से 10 बोतल रॉयल स्टैग सुपीरियर व्हिस्की (7.50 बल्क लीटर, अनुमानित कीमत 8,400 रुपये), एक सिल्वर रंग की एक्टिवा स्कूटी (कीमत लगभग 40,000 रुपये) और एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन (कीमत करीब 15,000 रुपये) बरामद किया गया। वहीं, आरोपी संतोष गिरी के कब्जे से खाकी रंग के कार्टन में भरे 48 पौवा रॉयल ब्लू माल्ट व्हिस्की (8.64 बल्क लीटर, कीमत 4,800 रुपये) और सैमसंग कंपनी का एक मोबाइल फोन (कीमत करीब 10,000 रुपये) जब्त किया गया। बरामद शराब पर किसी प्रकार का वैध होलोग्राम नहीं पाया गया। पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कबूल किया कि वे अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर दूसरे राज्यों से अवैध रूप से शराब लाकर दुर्ग–भिलाई शहर में संगठित ढंग से बिक्री करते थे। मामले में पद्मनाभपुर थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(1) के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें विधिवत गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल भेज दिया गया है। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
बिलासपुर में वर्दी की दबंगई का आरोप, महिला ने SP से लगाई न्याय की गुहार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से पुलिस की छवि को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम पंधी में एक महिला ने पुलिसकर्मी सहित तीन लोगों पर मारपीट, धमकी और जबरन कब्जे का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता बबली शर्मा ने अपनी शिकायत में बताया कि घटना उस समय हुई, जब वह अपने घर पर मौजूद थीं। आरोप है कि तारबहार थाने में पदस्थ ASI संजय शर्मा, उनके साथ राजीव शर्मा और आंचल शर्मा उनके कोठार के चारों ओर लगाए गए घेरा तार को काट रहे थे। विरोध करने पर भी तीनों नहीं रुके और जबरन तार काटते रहे। बबली शर्मा के अनुसार, उनके ससुर रमेश शर्मा ने जब इसका विरोध किया तो आरोपियों ने अश्लील गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि ASI संजय शर्मा ने पुलिस की वर्दी का रौब दिखाते हुए लोहे की वस्तु और डंडे से रमेश शर्मा के साथ मारपीट की। घटना यहीं नहीं रुकी। बीच-बचाव करने पहुंची बबली शर्मा और उनके पति हितेश शर्मा के साथ भी बेरहमी से मारपीट की गई। बबली शर्मा का आरोप है कि संजय शर्मा ने लोहे की वस्तु से उनके माथे पर वार किया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई। वहीं राजीव शर्मा पर हितेश शर्मा को लोहे की वस्तु से मारने और आंचल शर्मा पर हाथ-मुक्के व डंडे से पिटाई करने का आरोप लगाया गया है। घटना के बाद डरा-सहमा पीड़ित परिवार न्याय की तलाश में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
तेज रफ्तार ट्रेलर की चपेट में आने से युवक की मौत, ग्रामीणों ने किया नेशनल हाईवे जाम
बिलासपुर। जिले के रतनपुर–पाली सीमा क्षेत्र में नेशनल हाईवे 130 पर सोमवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब 6 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान नीलमदास मानिकपुरी, निवासी करतली के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि नीलमदास सड़क पार कर रहा था, तभी तेज गति से आ रहे ट्रेलर ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर बैठ गए। चक्का जाम के चलते दोपहिया वाहन चालकों समेत बसों और अन्य यात्री वाहनों में सवार लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सूचना पर पुलिस प्रशासन एवं तहसीलदार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाइश दी। मृतक के परिजनों को तत्काल सहायता राशि प्रदान किए जाने के बाद जाम समाप्त कराया गया और यातायात बहाल किया गया। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बिलासपुर अर्चना झा ने बताया कि पैदल चल रहे व्यक्ति को ट्रेलर ने कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद उत्पन्न चक्का जाम की स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि संबंधित ट्रेलर चालक के विरुद्ध अपराध दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
डीएसपी कल्पना वर्मा बनाम दीपक टंडन मामला निर्णायक मोड़ पर, जाँच रिपोर्ट जल्द आईजी रायपुर रेंज को
रायपुर। छत्तीसगढ़ में चर्चित डीएसपी कल्पना वर्मा और कारोबारी दीपक टंडन से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्ष 2025 के अंतिम महीनों में सामने आया यह मामला अब 2026 की शुरुआत में निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रकरण की जाँच लगभग पूरी हो चुकी है और शीघ्र ही इसकी विस्तृत रिपोर्ट रायपुर रेंज के आईजी को सौंपे जाने की संभावना है। जाँच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि डीएसपी कल्पना वर्मा अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए लगातार बयान दर्ज करा रही हैं, जबकि दूसरी ओर कारोबारी दीपक टंडन ने अपनी आय-व्यय और लेन-देन से संबंधित विस्तृत वित्तीय दस्तावेज जाँच एजेंसियों को सौंप दिए हैं। इनमें बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, आभूषणों की खरीद-फरोख्त और कारोबारी लिमिट से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। मामले में यह तथ्य भी सामने आया है कि डीएसपी द्वारा लगाए गए 75 लाख रुपये के कथित लेन-देन के आरोपों को लेकर उनके बयान समय-समय पर बदलते रहे हैं। वहीं, उनके पिता के सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़ी राशि के दावों को लेकर भी जाँच में ठोस प्रमाण नहीं मिल पाए हैं। सूत्रों का कहना है कि दंतेवाड़ा पुलिस ने डीएसपी की कार्यप्रणाली की अलग से जाँच शुरू की है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। जाँच के दौरान यह भी उजागर हुआ है कि दीपक टंडन ने विभिन्न बैंकों से प्राप्त कारोबारी लिमिट का उपयोग किया था और शहर के कई आभूषण व्यापारियों के खातों में बड़ी राशि का भुगतान दर्ज है। टंडन की ओर से करीब 2 करोड़ 28 लाख रुपये से जुड़े लेन-देन, डिजिटल ट्रांजेक्शन और आभूषणों का पूरा विवरण पुलिस को सौंपा गया है। इसके अलावा डीएसपी के खाते में एक लाख रुपये से अधिक की डिजिटल ट्रांसफर राशि की जानकारी भी जाँच का हिस्सा है। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में जुटाए गए दस्तावेजी और डिजिटल सबूतों का भार लगभग 30 किलो तक पहुंच गया है। निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए आईजी रायपुर रेंज ने कड़े निर्देश जारी किए हैं और दोनों पक्षों के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। गौरतलब है कि दीपक टंडन और उनकी पत्नी ने पूर्व में पंडरी और खम्हारडीह थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन शुरुआती स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप भी लगे थे। मामला मीडिया में आने के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जाँच रायपुर पुलिस को सौंपी गई, जो बीते चार महीनों से लगातार जारी है। दीपक टंडन ने बयान में कहा है कि उन्होंने जाँच एजेंसियों को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं और अब निष्पक्ष निर्णय पुलिस एवं वरिष्ठ अधिकारियों पर निर्भर करता है। वहीं, पुलिस महकमे में यह चर्चा भी है कि इस प्रकरण से जुड़े अन्य शिकायतकर्ता भविष्य में सामने आ सकते हैं। डीएसपी कल्पना वर्मा बनाम दीपक टंडन का यह मामला अब केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहकर पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता की बड़ी परीक्षा बन गया है। जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह प्रकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है।
















