OMG! काला जादू…पत्नी को मनाने के लिए ये क्या कर डाला

जयपुर: राजस्थान के खैरथल जिले में पुलिस ने पांच साल के एक बच्चे की हत्या का मामला सुलझा लिया है. पुलिस ने मंगलवार को बताया कि बच्चे की हत्या कथित तौर पर उसके चाचा ने की थी. उसने पूछताछ के दौरान अपना अपराध कबूल भी कर लिया है. मुंडावर के एसएचओ महावीर सिंह ने बताया, ‘उसने अपनी अलग रह रही पत्नी को उसके मायके से वापस लाने के लिए एक तांत्रिक के कहने पर बच्चे की बलि देने की बात कबूल की.’ लोकेश नाम के इस बच्चे की कथित तौर पर तीन दिन पहले हत्या कर दी गई थी और बाद में उसका शव एक खाली पड़े घर में घास के ढेर में छिपा दिया गया था. पुलिस ने सोमवार को आरोपी मनोज को गिरफ्तार कर लिया. एसएचओ ने बताया कि मनोज की पत्नी किसी विवाद के बाद उसे छोड़कर चली गई थी और वापस लौटने से इनकार कर रही थी. हताश होकर, मनोज ने मदद के लिए एक स्थानीय तांत्रिक सुनील कुमार से संपर्क किया. तांत्रिक ने कथित तौर पर पत्नी को वापस लाने के लिए एक अनुष्ठान के तहत एक बच्चे के खून और लीवर के साथ 12,000 रुपये की मांग की. पुलिस के अनुसार, इसके बाद मनोज ने कथित तौर पर अपने भतीजे को निशाना बनाया. शनिवार दोपहर, टॉफी दिलाने के बहाने, मनोज कथित तौर पर लोक%8

बच्चों से जुड़ी योजनाओं का हो शत-प्रतिशत गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि नौनिहालों के पोषण और उनको सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने के लिए राज्य सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। बच्चों के समुचित विकास हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय के साथ मिलकर कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की उच्च स्तरीय समीक्षा की और अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों पर केंद्रित योजनाओं की जिलेवार नियमित मॉनिटरिंग सचिव स्तर से की जाए तथा आगामी कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में इसकी गहन समीक्षा की जाएगी।

रक्षाबंधन 2025 स्पेशल : ₹5000 के अंदर भाई-बहन एक-दूसरे को दे सकते हैं ये खास गिफ्ट्स

रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। यह दिन उन पलों की याद दिलाता है जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनके दीर्घायु और खुशहाली की कामना करती हैं, और भाई उन्हें जीवनभर सुरक्षा देने का वचन देते हैं।   इस पवित्र त्योहार पर, भले ही भाई-बहन देश के किसी भी कोने में क्यों न हों, लेकिन प्यार का धागा उन्हें जोड़ता ही है। इस रिश्ते को और खास बनाने के लिए हर भाई चाहता है कि अपनी बहन को कुछ अनोखा और यादगार तोहफा दे। वहीं बहनें भी इस दिन को खास बनाने के लिए अपने भाइयों के लिए कुछ खरीदने की सोचती हैं।   बड़ी खबर:- केंदई गांव में खुजली संक्रमण से दो मासूम बच्चों की हृदय विदारक मौत… रक्षाबंधन 2025 स्पेशल   अगर आप भी गिफ्ट को लेकर असमंजस में हैं, तो हम आपके लिए लाए हैं कुछ बेहतरीन गिफ्ट आइडियाज, जो ₹5000 के अंदर हैं और भाई-बहन दोनों एक-दूसरे को दे सकते हैं।   बहनों के लिए गिफ्ट आइडिया:   कॉफी टेबल: स्टाइलिश और यूज़फुल कॉफी टेबल जो किताबों के साथ कॉफी की चुस्कियों का आनंद बढ़ाए।   सुगंधित मोमबत्तियाँ: लैवेंडर, चंदन या पचौली सुगंध वाली कैंडल्स, जो कमरे को खुशनुमा बना दें।   बेडसाइड शेल्फ: जिसमें नॉवल्स, स्किनकेयर, ईयरबड्स, वॉटर बॉटल आराम से रखी जा सके।   सिरेमिक डिफ्यूजर: रूम फ्रेशनर जो बहन के मूड को हल्का करे और सुकून दे।   फेस सीरम: डेली स्किनकेयर के लिए नायसिनेमाइड, कोजिक और गायकॉलिक एसिड बेस्ड सीरम।   भाइयों के लिए गिफ्ट आइडिया:   फोल्ड-अप डेस्क: गेमिंग, वर्क कॉल या बेड पर आराम से काम के लिए परफेक्ट।   टीवी स्पेस ऑर्गनाइज़र: रिमोट, वायर्स और गैजेट्स को सजाने के लिए स्टाइलिश शेल्फ।   लिनन स्प्रे: काम के तनाव को दूर करने वाला रिलैक्सिंग खुशबू वाला स्प्रे।   सनस्क्रीन: जल्दी अब्जॉर्ब होने वाली, मैट फिनिश और सुगंधरहित सनस्क्रीन।   हेयरकेयर किट: बालों की झड़ने की समस्या को रोकने वाला शैम्पू और सीरम।   रक्षाबंधन पर इन छोटे-छोटे लेकिन दिल से दिए गए गिफ्ट्स से रिश्ते को और मजबूत बनाएं। चाहे भाई दें या बहन, इन उपहारों के जरिए प्यार, समझदारी और साथ का एहसास हमेशा बना रहेगा।

ड़ॉ. सारस्वत पंडित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त

रायपुर// राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री रमेन डेका ने प्रोफेसर डॉ. विरेन्द्र कुमार सारस्वत को पंडित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय बिलासपुर का कुलपति नियुक्त किया गया है। राज्यपाल द्वारा डॉ. सारस्वत की नियुक्ति पंडित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय अधिनियम, 2004 (संशोधन अधिनियम, 2006, 2010 एवं 2019) की धारा 9(1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। उनका कार्यकाल, परिलब्धियां तथा सेवा शर्ते विश्वविद्यालय अधिनियम एवं परिनियम में निहित प्रावधान अनुसार होंगी। वर्तमान में डॉ. सारस्वत, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

छत्तीसगढ़ का परंपरागत तिहार हरेली कल

रायपुर// प्रदेश सरकार किसानों के आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। गांव, गरीब और किसान सरकार की पहली प्राथमिकता में हैं। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की इन डेढ़ साल के अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीतिगत फैसलों से खेती किसानी को नया संबल मिला है। बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 144.92 लाख मीेट्रिक टन धान की खरीदी कर रिकॉर्ड कायम किया है। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। इस त्यौहार से ही राज्य में खेती-किसानी की शुरूआत होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदीकर न सिर्फ किसानों को मान बढ़ाया, बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। साथ ही किसानों के खाते में रमन सरकार के पिछले दो वर्ष का बकाया धान के बोनस 3716.38 करोड़ रूपए अंतरित कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी है। मुख्यमंत्री का मानना है कि भारत गांवों में बसता है। जब किसान खुशहाल होंगे तो प्रदेश का व्यापार, उद्योग बढे़गा। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं की साथ पूजा करते हैं। गांवों के ठाकुरदेव की पूजा की जाती है। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में यादवों को भेंट करने की परंपरा रही हैं। सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है। हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गूँथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को रोगों से बचाया…

छत्तीसगढ़ में तेज़ गर्मी का कहर: 11 जिलों में लू का अलर्ट

छत्तीसगढ़ में इन दिनों बहुत तेज गर्मी पड़ रही है। राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा जैसे जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इतनी तेज धूप और गर्म हवाओं की वजह से लोग दिन में घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। 11 जिलों में लू का खतरा मौसम विभाग ने राज्य के 11 जिलों में लू का येलो अलर्ट जारी किया है। इनमें दुर्ग, बिलासपुर, बलौदाबाजार, बेमेतरा, सक्ती, कबीरधाम, मुंगेली, रायगढ़, कोरबा और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही शामिल हैं। गर्म हवाओं के चलते 25 अप्रैल से सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छुट्टियाँ कर दी गई हैं। तेज़ तापमान और परेशानी रायपुर में दिन का तापमान 43.2 डिग्री और बिलासपुर में 43.7 डिग्री रिकॉर्ड हुआ है। दुर्ग सबसे गर्म जिला बन गया है जहाँ तापमान 44 डिग्री से ज्यादा है। रात में भी गर्मी और उमस से लोग परेशान हैं। हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा तेज़ गर्मी से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सिरदर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर न निकलें और खूब पानी पिएं। खासतौर पर बच्चों और बुज़ुर्गों को ध्यान रखना चाहिए। अभी राहत की उम्मीद नहीं अगले तीन दिन भी गर्मी से राहत की उम्मीद नहीं है। तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री ऊपर रहेगा और लू चलती रहेगी। मानसून अभी दूर है। सावधानी ही सुरक्षा है सरकार और मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि बिना ज़रूरत धूप में न निकलें, और निकलें तो सिर ढककर जाएं। गर्मी से बचाव ही सुरक्षित रहने का तरीका है।

अन्य खबरे

होटल की छत पर चल रहा था हुक्का बार, चकरभाठा पुलिस की रेड में संचालक गिरफ्तार
जादू-टोना के शक में महिला की बेरहमी से हत्या, पति समेत 4 आरोपी गिरफ्तार
बालोद जिला-सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल से मिली सूचना; कोर्ट परिसर खाली कराया गया
कोरबा अग्रसेन चौक ओवरब्रिज पर स्कॉर्पियो में भीषण आग, देखें VIDEO – मची अफरा-तफरी
अयोध्यापुरी के पार्षद व एमआईसी सदस्य बंटी सरोज शांडिल भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला मंत्री नियुक्त
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में डेनियल मंगेशकर जिला उपाध्यक्ष नियुक्त, कार्यकर्ताओं में उत्साह