कटघोरा का सांस्कृतिक भवन बना कूड़े का ढेर, नगर पालिका की लापरवाही से आस्था और स्वास्थ्य दोनों खतरे में
कोरबा/कटघोरा | 16 दिसंबर 2025 कटघोरा नगर पालिका की घोर लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। वार्ड क्रमांक 4 में स्थित नगर का सांस्कृतिक भवन, जो कभी सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजनों की पहचान हुआ करता था, आज बदहाली, गंदगी और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि यह भवन अब “सांस्कृतिक केंद्र” नहीं, बल्कि खुले कूड़े का अड्डा नजर आ रहा है। नगर पालिका परिषद के अधीन होने के बावजूद भवन की देखरेख पूरी तरह से उपेक्षित है। भीतर का नजारा और भी चिंताजनक है—टूटे हुए शौचालय, क्षतिग्रस्त सभागार, जर्जर कमरे और चारों ओर फैली गंदगी नगर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव में भवन की उपयोगिता लगभग समाप्त हो चुकी है। किराया वसूली, जिम्मेदारी शून्य! सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी बदहाल भवन को नगर पालिका विवाह समारोह और अन्य आयोजनों के लिए किराए पर देती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई मामलों में भवन बिना किराया लिए भी दे दिया जाता है, वहीं तय किराया भी नाममात्र का है। इसके बावजूद आयोजनों के बाद सफाई और कचरा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की जाती। परिणामस्वरूप समारोहों के बाद बचा हुआ भोजन, डिस्पोजेबल सामग्री और मांसाहार से जुड़ा कचरा खुले में फेंक दिया जाता है। इससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है और मवेशी इस जहरीले कचरे को खाते हुए नजर आ रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। आस्था पर भी चोट स्थिति यहीं नहीं रुकती। मांस की हड्डियां और अवशेष कुत्तों द्वारा उठाकर बाजार मोहल्ला स्थित राधा-कृष्ण मंदिर तक पहुंचा दिए जा रहे हैं। इससे न केवल स्वच्छता भंग हो रही है, बल्कि स्थानीय नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंच रही है। शिकायतें हुईं, कार्रवाई नहीं स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर नगर पालिका और प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न स्थायी सफाई व्यवस्था बनाई गई, न आयोजनों के बाद कचरा निस्तारण को लेकर कोई सख्त नियम लागू किए गए। आक्रोश बढ़ा, आंदोलन की चेतावनी नगर पालिका और प्रशासन की इस उदासीनता से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि सांस्कृतिक भवन की तत्काल सफाई, मरम्मत और नियमित रखरखाव कराया जाए, साथ ही आयोजनों के बाद कचरा निस्तारण की जिम्मेदारी तय की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थानीय नागरिक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। कटघोरा का यह सांस्कृतिक भवन आज प्रशासन की अनदेखी का जीवंत उदाहरण बन चुका है—जहां संस्कृति की जगह गंदगी और जिम्मेदारी की जगह लापरवाही साफ नजर आ रही है।
छत्तीसगढ़ प्रशासन में बड़ा भूचाल, कोरबा को मिला नया कलेक्टर
✍️ भागीरथी यादव रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने एक साथ कई जिलों की प्रशासनिक कमान बदलते हुए बड़ा और निर्णायक फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी तबादला आदेशों ने राज्य की नौकरशाही में हलचल मचा दी है। इस बदलाव में कोरबा जिले के कलेक्टर का परिवर्तन सबसे अहम माना जा रहा है। शासन के आदेश के अनुसार कुणाल दुदावत (भा.प्र.से. 2017) को दंतेवाड़ा कलेक्टर पद से हटाकर कोरबा का नया कलेक्टर बनाया गया है। वहीं अब तक कोरबा की कमान संभाल रहे अजीत वसंत (भा.प्र.से. 2013) को हटाकर सरगुजा जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया है। यह बदलाव प्रशासनिक संतुलन और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर किया गया माना जा रहा है। कई जिलों में बदली प्रशासनिक कमान इस व्यापक फेरबदल में सिर्फ कोरबा ही नहीं, बल्कि कई अन्य जिलों और महत्वपूर्ण पदों पर भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं— गौरव विलास सोनी (भा.प्र.से. 2011) को सरगुजा कलेक्टर के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। राघव शर्मा (भा.प्र.से. 2012) को बेमेतरा कलेक्टर पद से हटाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध संचालक के रूप में अस्थायी पदस्थापना दी गई है। संजीव कुमार झा (भा.प्र.से. 2011) से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है। दिनेश कुमार दाश (भा.प्र.से. 2018) अब सुकमा से स्थानांतरित होकर दंतेवाड़ा के नए कलेक्टर होंगे। सुश्री प्रतिभा ममगाईं (भा.प्र.से. 2018) को नारायणपुर से हटाकर बेमेतरा जिले की कमान सौंपी गई है। प्रशासनिक रणनीति का संकेत राज्य सरकार का यह बड़ा कदम स्पष्ट करता है कि मैदानी प्रशासन को और अधिक सशक्त, सक्रिय और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में ठोस निर्णय लिए जा रहे हैं। बदली हुई प्रशासनिक टीम से अब संबंधित जिलों में विकास कार्यों और सुशासन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विधानसभा में गूंजा सड़क और शिक्षा का मुद्दा, सरकार ने दिया मरम्मत और सुविधाओं का भरोसा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही के दौरान जनहित से जुड़े अहम मुद्दे सदन में छाए रहे। प्रश्नकाल में डोंगरगढ़ विधानसभा की जर्जर सड़कों और GPM जिले में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थिति को लेकर विधायकों ने सरकार से जवाब मांगा। प्रश्नकाल के दौरान डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल ने पीएम-सीएम सड़क योजना के तहत विधानसभा क्षेत्र की सड़कों की जानकारी मांगी। इस पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सदन को बताया कि डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 48 सड़कें मरम्मत योग्य हैं। विधायक ने प्रक्रियाधीन सड़कों की जांच की मांग करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को भेजकर स्थिति का आकलन कराया जाए। इस पर स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि जांच कार्यकर्ताओं से नहीं, बल्कि अधिकारियों से कराई जाएगी। डिप्टी सीएम अरुण साव ने आश्वासन दिया कि आवश्यक जानकारी मिलने पर जांच कराई जाएगी और दिसंबर तक सड़कों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसी दौरान भाजपा विधायक प्रणब कुमार मरपच्ची ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में उच्च शिक्षण संस्थानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने जिले में नए कॉलेज और संस्थानों की स्वीकृति को लेकर सवाल किया। जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि वर्तमान में जिले में 4 उच्च शिक्षण संस्थान संचालित हैं और फिलहाल किसी नए संस्थान का प्रस्ताव नहीं है। विधायक मरपच्ची ने कॉलेजों में कमरों और शौचालयों की कमी का भी मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि कॉलेजों में कमरों और शौचालयों की कमी जल्द पूरी की जाएगी। शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन हुई चर्चा में सड़क और शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार के आश्वासन ने सदन का ध्यान आकर्षित किया।
मथुरा एक्सप्रेसवे बना मौत का रास्ता: घने कोहरे में 8 बसें और 3 कारें टकराईं, 13 की दर्दनाक मौत, 25 से ज्यादा घायल
मथुरा। जनपद मथुरा से शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई, जब बलदेव थाना क्षेत्र अंतर्गत यमुना एक्सप्रेसवे पर माइलस्टोन 127 के पास भीषण सड़क हादसा हो गया। घने कोहरे और शून्य के करीब दृश्यता के बीच एक के बाद एक 8 बसें और 3 कारें आपस में टकरा गईं। इस भयावह दुर्घटना में अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले एक बस और कार अनियंत्रित होकर आपस में भिड़ गईं। कोहरे के कारण पीछे से आ रहे वाहन समय पर ब्रेक नहीं लगा सके और देखते ही देखते एक्सप्रेसवे पर वाहनों की कतारें टकराती चली गईं। टक्कर इतनी भीषण थी कि कुछ वाहनों में आग लग गई, जिससे चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। कई यात्री जले हुए और क्षतिग्रस्त वाहनों में फंसे रह गए। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी चंद प्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। फायर ब्रिगेड, पुलिस और राहत दलों ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को वाहनों से बाहर निकाला गया और एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। घंटों की मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर मार्ग को आंशिक रूप से सुचारू किया जा सका। प्रशासन ने प्रारंभिक जांच में घने कोहरे और कम दृश्यता को हादसे का मुख्य कारण बताया है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है और उनके परिजनों को सूचना दी जा रही है। यह हादसा एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर कोहरे के दौरान तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। मथुरा की यह सुबह कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला दर्द छोड़ गई।
जांजगीर-चांपा में रेत माफिया पर बड़ा प्रहार, चैन माउंटेन मशीन सहित 6 हाईवा जब्त
✍️ भागीरथी यादव जांजगीर-चांपा। जिले में अवैध रेत कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में गठित जिला स्तरीय खनिज उड़नदस्ता दल ने अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर शिकंजा कसते हुए 1 चैन माउंटेन मशीन और 6 हाईवा वाहनों को जब्त कर लिया है। वहीं, अवैध रेत भंडारण के 2 प्रकरण दर्ज किए गए हैं और बम्हनीडीह क्षेत्र की 2 अस्थायी भंडारण अनुज्ञप्तियां निरस्त कर दी गई हैं। खनिज उड़नदस्ता दल द्वारा नवापारा, केवा, पीपरदा, पुछेली, खपरीडीह और बम्हनीडीह क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान ग्राम केवा में अवैध रूप से रेत उत्खनन करते हुए चैन माउंटेन मशीन पकड़ी गई, जिसे मौके पर सील कर संबंधितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। वहीं ग्राम पीपरदा में कार्रवाई के दौरान 6 हाईवा वाहन बिना वैध अनुमति रेत का परिवहन करते पाए गए। सभी वाहनों को मौके पर सील कर नोटिस चस्पा किया गया। इसी क्षेत्र में रेत के अवैध भंडारण के दो मामले भी सामने आए। एक प्रकरण में शासकीय भूमि पर लगभग 200 घन मीटर तथा दूसरे प्रकरण में लगभग 240 घन मीटर रेत का अवैध भंडारण पाया गया, जिसे श्री तेरस पिता समधीन, निवासी पीपरदा द्वारा किया जाना सामने आया। दोनों मामलों में अवैध रेत को जब्त कर ग्राम पंचायत की सुपुर्दगी में दिया गया है। इसके अतिरिक्त नियमों के लगातार उल्लंघन और गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए बम्हनीडीह क्षेत्र अंतर्गत ग्राम अमोदी में मेसर्स आर.बी. कंस्ट्रक्शन तथा ग्राम बम्हनीडीह में मेसर्स बाबा सिद्धेश्वर कंस्ट्रक्शन के पक्ष में स्वीकृत रेत की अस्थायी भंडारण अनुज्ञप्तियां निरस्त कर दी गई हैं। खनिज अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उड़नदस्ता दल की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान रेत माफिया के लिए स्पष्ट संदेश है कि जिले में अवैध गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है।
रायगढ़ में अवैध रेत माफिया पर बड़ी चोट, 9 ट्रैक्टर जब्त
✍️ भागीरथी यादव रायगढ़। जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर लगाम कसने के लिए खनिज विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बार फिर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। नियमों को ताक पर रखकर रेत का परिवहन कर रहे 9 ट्रैक्टरों को जब्त कर लिया गया है, जबकि संबंधित वाहन मालिकों के खिलाफ कानूनी प्रकरण दर्ज किया गया है। जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि खनिज निरीक्षक श्री सोमेश्वर सिन्हा एवं जांच दल द्वारा लगातार की जा रही निगरानी के दौरान यह कार्रवाई की गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि सभी वाहन बिना किसी वैध अनुमति के रेत का परिवहन कर रहे थे। मौके पर विधिवत जांच के बाद वाहनों को जब्त कर छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 तथा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई में जोरापाली के भानुकुमार चौहान (CG 13 BE 9014), बाल्मिकी प्रजापति (न्यू हालैंड सोल्ड), कुरमापाली के नूतन साहू (स्वराज सोल्ड), गोपालपुर के प्रेम उरांव (महिन्द्रा सोल्ड), पतरापाली के समीर पटेल (CG 13 AW 2563), बाबाधाम रायगढ़ के तिरथलाल यादव (CG 13 AH 3634), रायगढ़ के प्यारेलाल साहू (CG 13 UH 2738), धनागर के उत्तम सारथी (CG 13 AS 4893) तथा हंडी चौक रायगढ़ के गणेश अग्रवाल (महिन्द्रा सोल्ड) शामिल हैं। जिला खनिज अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी सख्ती से जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई न केवल प्रशासन की सख्ती का संदेश है, बल्कि अवैध रेत कारोबारियों के लिए भी कड़ा चेतावनी संकेत है।
प्यार का भरोसा टूटा, इंसाफ की तलाश में DSP
एक खाकी वर्दी पहने महिला अफसर… जिसने कानून की रक्षा की शपथ ली थी, आज वही खुद टूटे भरोसे और धोखे की पीड़ा से गुजर रही है। प्यार के नाम पर मिले वादों ने उसकी ज़िंदगी को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया, जहाँ सवाल सिर्फ रिश्ते का नहीं, बल्कि इंसाफ का भी है। सूत्रों के अनुसार, एक जिले में पदस्थ DSP और एक खूबसूरत पुलिस अधिकारी के बीच नज़दीकियाँ बढ़ीं। दोनों की मुलाकातें धीरे-धीरे भरोसे में बदलीं और भरोसा प्यार में। वर्दी के पीछे छिपी इंसानी भावनाएँ रिश्ते की डोर में बंध गईं। शादी के सपने देखे गए, भविष्य की योजनाएँ बनीं। लेकिन कहानी का अंत उम्मीदों जैसा नहीं निकला। आरोप है कि प्यार में पड़े DSP साहब ने इस रिश्ते के लिए अपनी डॉक्टर पत्नी को तलाक तक दे दिया। वहीं दूसरी ओर, जब हालात बदले और मुश्किल वक्त आया, तो वही रिश्ता सवालों के घेरे में आ गया। आज हालात यह हैं कि पुलिस मैडम एक मामले में फंस गई हैं और DSP साहब खुद को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं। प्यार, जो कभी ताकत बना था, अब कमजोरी बन चुका है। यह कहानी सिर्फ एक अफसर या एक रिश्ते की नहीं है… यह उस भरोसे की कहानी है, जो टूटने के बाद इंसाफ मांगता है। अब सवाल यही है — क्या कानून के रखवाले खुद अपने जज़्बातों के इंसाफ तक पहुँच पाएँगे?
रायपुर | भरोसा टूटा, इंसाफ की गुहार — DSP पर होटल व्यवसायी के गंभीर आरोप
✍️ भागीरथी यादव रायपुर से दंतेवाड़ा तक फैला यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि एक आम नागरिक के भरोसे, सुरक्षा और न्याय की लड़ाई बनता जा रहा है। होटल व्यवसायी दीपक टंडन ने दंतेवाड़ा में पदस्थ DSP कल्पना वर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि निजी संबंधों के दौरान उनसे बड़ी रकम ली गई और जब उन्होंने अपनी ही कमाई वापस मांगी, तो उन्हें धमकाया गया, दबाव बनाया गया और कथित तौर पर गुंडों से पिटवाया गया। दीपक टंडन का कहना है कि उन्होंने भरोसे के आधार पर आर्थिक सहयोग किया था। उस वक्त तक सब ठीक था—लेकिन जैसे ही उन्होंने रकम वापसी की बात की, हालात बदलते चले गए। उनके शब्दों में, “अपनी ही मेहनत की कमाई मांगना मेरे लिए गुनाह बना दिया गया।” धमकियों से मारपीट तक दीपक का आरोप है कि पैसे लौटाने की मांग के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं। दबाव बनाने की कोशिशें की गईं और अंततः उनके साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया। उनका कहना है कि यह सिर्फ लेन-देन का विवाद नहीं रहा, बल्कि कानून के दुरुपयोग और एक आम आदमी को डराने का मामला बन गया है। कार को लेकर नया मोड़ मामले में एक और गंभीर दावा सामने आया है। दीपक टंडन के अनुसार, उनकी पत्नी बर्खा टंडन के नाम पर पंजीकृत Toyota Hyryder कार इस समय DSP कल्पना वर्मा के पास है। दीपक का आरोप है कि कई बार मांग करने के बावजूद कार वापस नहीं की जा रही। उनका कहना है कि अब यह मामला केवल पैसों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी निजी संपत्ति से भी जुड़ गया है। “कानून से ही इंसाफ चाहता हूं” दीपक टंडन ने साफ शब्दों में कहा कि उनका मकसद किसी को बदनाम करना नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं एक आम नागरिक हूं। मैंने सिर्फ अपनी रकम और अपनी संपत्ति वापस मांगी है। अगर इसके बदले मुझे डराया जाए और पिटवाया जाए, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है।” प्रदेशभर में चर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग मामला सामने आते ही प्रदेशभर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। दीपक टंडन ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और आम लोगों का कानून व प्रशासन पर भरोसा बना रहे। यह कहानी एक सवाल छोड़ जाती है— जब एक आम नागरिक अपनी ही कमाई और संपत्ति के लिए न्याय मांगता है, तो क्या उसे डर और हिंसा का सामना करना पड़ेगा, या उसे कानून का सहारा मिलेगा?
नए ‘पार्टी सरदार’ के जश्न में छूट गया लौह पुरुष का स्मरण
✍️ भागीरथी यादव दर्री मंडल में सरदार पटेल की पुण्यतिथि पर सन्नाटा, भाजपा की भूमिका पर उठे सवाल कोरबा/दर्री। देश की एकता के सूत्रधार, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि पर दर्री मंडल में वह दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीति की संवेदनाओं पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा दिए। जिनके नाम पर मंचों से भाषण गूंजते हैं, जिनकी प्रतिमाओं पर चुनावी मौसम में मालाएं चढ़ती हैं—उन्हीं सरदार पटेल की पुण्यतिथि पर शाम ढलने तक भारतीय जनता पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचा। विडंबना यह रही कि इसी दिन पार्टी में नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर उत्सव का माहौल था। कार्यकर्ताओं में खुशी थी, मिठाइयां बंटी, लेकिन लौह पुरुष के प्रति कर्तव्य और संवेदना कहीं दिखाई नहीं दी। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि उस राजनीति को भी कठघरे में खड़ा करता है, जो सरदार पटेल के नाम को अपना नैतिक कवच बताती रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में इस उपेक्षा को लेकर तीखी नाराज़गी देखी गई। लोगों का कहना है— “सरदार पटेल अब पोस्टर और भाषणों तक सीमित कर दिए गए हैं। ज़मीनी सच्चाई यह है कि जैसे ही पार्टी को नया ‘सरदार’ मिला, असली सरदार को भुला दिया गया।” राजनीतिक गलियारों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज़ है। सवाल उठ रहे हैं— क्या सरदार पटेल भाजपा के लिए अब सिर्फ चुनावी प्रतीक बनकर रह गए हैं? क्या सत्ता, पद और उत्सव, विचारधारा और आदर्शों से ऊपर हो गए हैं? दर्री मंडल में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का न होना आमजन के लिए सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि भावनात्मक आघात बनकर सामने आया। लोगों का कहना है— “जो दल अपने आदर्श पुरुषों का सम्मान नहीं कर पाता, वह देश की एकता और अखंडता की बातें कैसे कर सकता है?” अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या भाजपा इस चूक पर आत्ममंथन करेगी, या फिर नए ‘पार्टी सरदार’ के उत्साह में इतिहास और आदर्शों को यूं ही दरकिनार करती रहेगी। लौह पुरुष की पुण्यतिथि पर छाया यह सन्नाटा, आने वाले दिनों में राजनीति की संवेदनशीलता पर एक गूंजता सवाल बन गया है।
अनूपपुर ट्रिपल मर्डर: सौतेले बेटे ने 5 लाख की सुपारी देकर माता-पिता की कराई हत्या, तीन की गई जान
✍️ भागीरथी यादव मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में हुए दिल दहला देने वाले ट्रिपल मर्डर केस का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इस जघन्य वारदात का मास्टरमाइंड मृतक दंपती का सौतेला बेटा आलोक उर्फ सूरज पटेल निकला, जिसने प्रॉपर्टी विवाद और जन्मदिन पर थप्पड़ मारने की रंजिश में अपने ही पिता-सौतेली मां की हत्या की साजिश रची। पुलिस के मुताबिक आलोक ने 5 लाख रुपये की सुपारी देकर अपने पिता राजेंद्र पटेल (40) और सौतेली मां रूपा पटेल की हत्या कराई। वारदात की रात आरोपी कुल्हाड़ी, वसूला और अन्य हथियारों के साथ घर पहुंचे और सोते समय हमला कर दिया। हमले में राजेंद्र पटेल और नौकरानी सीमा बैगा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल रूपा पटेल ने जबलपुर में इलाज के दौरान पांचवें दिन दम तोड़ दिया। इस हत्याकांड में आलोक पटेल के साथ देवेंद्र सोनवानी, छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का निवासी सक्षम केशरवानी और दो नाबालिग शामिल थे। शुरुआत में आलोक ने खुद को निर्दोष दिखाने की कोशिश की, लेकिन बयान बदलने पर पुलिस को शक हुआ। सख्त पूछताछ में उसने पूरी साजिश कबूल कर ली। एसपी मोती उर रहमान ने बताया कि हत्या में इस्तेमाल हथियार जब्त कर लिए गए हैं। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां तीन को जेल और दो नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया है। यह वारदात लालच, गुस्से और टूटते पारिवारिक रिश्तों की खौफनाक मिसाल बन गई है।
















