तान नदी तट संरक्षण के लिए बड़ी पहल: पोंडी-उपरोड़ा क्षेत्र में 4.23 करोड़ की स्वीकृति

✍️ भागीरथी यादव   छत्तीसगढ़ – शासन ने कोरबा जिले के विकासखंड पोंडी-उपरोड़ा में तान नदी के दाईं तट पर होने वाले कटाव को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जल संसाधन विभाग द्वारा लेपरा से पोंडी-उपरोड़ा तक बैंक प्रोटेक्शन कार्य के लिए 4 करोड़ 23 लाख 35 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।   मुख्य अभियंता को मिली प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रालय महानदी भवन से जारी आदेश के अनुसार, योजना के क्रियान्वयन के लिए जल संसाधन विभाग, बिलासपुर के मुख्य अभियंता मिनिमाता (हसदेव) बांगो परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।   कटाव रोकने से ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी राहत इस परियोजना के पूर्ण होने पर तान नदी के लगातार कटाव से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी। बैंक प्रोटेक्शन कार्य से बस्तियों, कृषि भूमि और सड़क मार्गों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।   यह मंजूरी क्षेत्र के विकास और नदी तट संरक्षण की दिशा में शासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कोरबा में सड़क बदहाली पर युवा कांग्रेस का हल्ला बोल — रविशंकर प्रसाद नगर से दादर मार्ग की मरम्मत की मांग को लेकर एकदिवसीय धरना

✍️ भागीरथी यादव   कोरबा। ✍️ शहर की जर्जर सड़कों और नगर निगम की लापरवाही को लेकर आज जिला युवा कांग्रेस (शहर) ने पीसीसी सचिव विकास सिंह के मार्गदर्शन में रविशंकर प्रसाद नगर से दादर जाने वाली सड़क की दुर्दशा के विरोध में जोरदार धरना प्रदर्शन किया। धरना स्थल पर मौजूद पीसीसी सचिव विकास सिंह ने कहा कि —   > “नगर निगम कोरबा में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी चरम पर है। जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग कर झूठे प्रचार-प्रसार में लगाया जा रहा है। शहर की वास्तविक समस्याओं — खासकर सड़कों की दुर्दशा — पर निगम और भाजपा सरकार पूरी तरह मौन है।” डीसीसी अध्यक्ष नाथूलाल यादव ने कहा कि शासन-प्रशासन झूठे आंकड़े और उपलब्धियों का हवाला देकर जनता को गुमराह कर रहा है। “शहर की सड़कों का हाल बेहाल है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बने हुए हैं।”   नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा — > “कांग्रेस सरकार के समय में पूर्व राजस्व मंत्री जी द्वारा कोरबा के लिए 64 करोड़ (गौ माता चौक से होटल रिलेक्स इन तक) और 83 करोड़ (सर्वमंगला मंदिर से दर्री मार्ग तक) की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन आज तक उसका टेंडर तक जारी नहीं हुआ। दो वर्ष बीत गए, पर विकास के नाम पर केवल वादे और विज्ञापन हैं।”   जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष राकेश पंकज ने स्पष्ट कहा कि — > “कोरबा विधानसभा की सड़कों की हालत बदतर है। दो वर्षों से भाजपा सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई। जब तक टूटी सड़कों की मरम्मत नहीं होती, तब तक युवा कांग्रेस की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी।” धरना स्थल पर बड़ी संख्या में पार्षद, कांग्रेस, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस और NSUI के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रमुख रूप से नारायण कुर्रे, बृजभूषण प्रसाद, पवन विश्वकर्मा, हरि पटेल, दाऊ लाल पटेल, अरुण यादव, रूपेश चंद्रा, पंचराम आदित्य, विजय आनंद, विजय आदिले, साहिल कुरैशी, पिंटू जांगड़े, मनोज चौहान, अरविंद सिंह, शशिराज, सुनील निर्मलकर, अमित सिंह, नारायण यादव, राजेश यादव, अभिषेक ठाकुर, विवेक श्रीवास, कमलेश गर्ग, बाबिल मिरी, नितेश यादव, शशि अग्रवाल, राजमती यादव, सरोज यादव सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी मौजूद रहे।   युवा कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया, तो नगर निगम मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

एशिया का गौरव गोंडवाना फॉसिल पार्क उपेक्षा की भेंट चढ़ा — वन विभाग की लापरवाही से उजड़ रही करोड़ों वर्ष पुरानी धरोहर

मनेंद्रगढ़। एशिया का सबसे बड़ा गोंडवाना मैरिन फॉसिल्स पार्क, जो कभी भारत की वैज्ञानिक और ऐतिहासिक शान माना जाता था, आज प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय निष्क्रियता की भेंट चढ़ चुका है। वन मंडलाधिकारी मनेंद्रगढ़ की उपेक्षा और वन विभाग की उदासीनता ने इस अनमोल धरोहर को धीरे-धीरे बर्बादी की ओर धकेल दिया है।   करीब 29 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म, जो धरती के प्राचीन समुद्री जीवन के अनमोल प्रमाण हैं, आज धूल में दबे पड़े हैं। संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए बनाई गई करोड़ों की योजनाएं अब केवल कागज़ों और पोस्टरों तक सीमित रह गई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग ने योजनाओं के नाम पर भारी खर्च दिखाया, लेकिन मौके पर न तो कोई वास्तविक कार्य हुआ, न कोई संरक्षण दिखता है। लोहे की जालियां टूटी पड़ी हैं, सूचना पट्ट गायब हैं और जीवाश्म खुले आसमान के नीचे उजड़ रहे हैं।   वन विभाग के दावे—“संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन को बढ़ावा”—सिर्फ प्रेस विज्ञप्तियों का हिस्सा बनकर रह गए हैं। जमीनी सच्चाई यह है कि यह एशिया का गौरवशाली पार्क अब अव्यवस्था और उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है।   प्रश्न यह है —   क्या वन विभाग केवल प्रचार और योजनाओं के कागज़ी आंकड़े दिखाने के लिए है? करोड़ों रुपये की योजनाओं का हिसाब कौन देगा? और सबसे अहम — वन मंडलाधिकारी मनीष कश्यप जवाबदेही से कब तक बचते रहेंगे? विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह वैज्ञानिक धरोहर सदा के लिए नष्ट हो जाएगी।   अब वक्त है कि विभाग झूठे दावों और औपचारिक बैठकों से आगे बढ़कर इस पार्क के संरक्षण को वास्तविक रूप दे। वरना, गोंडवाना मैरिन फॉसिल्स पार्क आने वाली पीढ़ियों के लिए सिर्फ इतिहास की किताबों में “खोया हुआ अवसर” बनकर रह जाएगा।  

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बड़ा बदलाव तय, 41 में से 36 जिलाध्यक्ष होंगे नए

✍️ भागीरथी यादव   रायपुर- छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी पूरी हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 41 जिलाध्यक्षों में से 36 नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि 5 वर्तमान जिलाध्यक्षों को दोबारा जिम्मेदारी मिलने की संभावना है।   नई जिलाध्यक्षों की सूची, जो लंबे समय से अटकी हुई थी, अब जल्द जारी की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान ने नामों पर अंतिम मुहर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और 14 नवंबर के बाद किसी भी समय सूची जारी हो सकती है।   इस बार कांग्रेस ‘परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्टम’ और ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति को लागू करने जा रही है। इसके साथ ही संगठन में युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को प्राथमिकता देने की भी तैयारी है।   पार्टी का उद्देश्य नए चेहरों के माध्यम से संगठन को नई दिशा और ऊर्जा देना है, ताकि आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।

कथा वाचक पंडित आशुतोष चैतन्य पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज

सतनामी समाज ने किया तखतपुर थाने का घेराव, गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा समाज —   धार्मिक कथा के दौरान विवादित टिप्पणी से भड़का समाज   बिलासपुर/तखतपुर। तखतपुर में रविवार को आयोजित एक धार्मिक कथा के दौरान कथावाचक पंडित आशुतोष चैतन्य द्वारा कथित रूप से सतनामी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने से विवाद गहरा गया। घटना के बाद सतनामी समाज के सैकड़ों लोग आक्रोशित होकर थाने पहुंच गए और कथावाचक की गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। — थाने का घेराव, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन   मामला सामने आते ही तखतपुर थाने के बाहर बड़ी संख्या में समाजजन जुट गए। विरोध के दौरान नारेबाजी और थाने का घेराव किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि > “धार्मिक मंच का उपयोग किसी समाज या वर्ग को नीचा दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई इस तरह का दुस्साहस न करे।” — समाज की मांग — आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी हो सतनामी समाज के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल थाना प्रभारी से मिला और एससी-एसटी (एट्रोसिटी) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। — पुलिस की तत्परता — एट्रोसिटी एक्ट में मामला दर्ज   विरोध बढ़ता देख तखतपुर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कथावाचक पंडित आशुतोष चैतन्य के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की। थाना प्रभारी ने बताया कि   > “मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।” पुलिस ने एहतियातन थाना परिसर और आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात किया है ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। — विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल   थाने के बाहर हुए विरोध में बिहारी सिंह टोडर, संजीव खांडे, चोवादास खांडेकर, साधेलाल भारद्वाज, संदीप खांडे, जितेंद्र बंजारे, आदर्श बंजारे, होरीलाल माथुर, रामेश्वर रात्रे, विक्की दिनकर, नरेंद्र दिनकर, मंजू खांडे, कृष्णा जांगड़े, कोमल टोडर, राजेश खांडे, जितेंद्र जांगड़े, निलेश भार्गव, प्रदीप लहरे, अनिल और फिरोज दिवाकर सहित सैकड़ों समाजजन मौजूद रहे। —   समाज का बयान — “गरिमा पर आघात बर्दाश्त नहीं”   सतनामी समाज के नेताओं ने कहा —   > “हम किसी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमारे समाज की गरिमा पर आघात करेगा, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। यह सिर्फ हमारा नहीं, सामाजिक सम्मान का सवाल है।” —   पुलिस प्रशासन की अपील — शांति बनाए रखें   पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि   > “कानून से बढ़कर कोई नहीं है। दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” — स्थिति फिलहाल नियंत्रण में, पर तनाव बरकरार   हालांकि पुलिस की समझाइश के बाद माहौल शांत हुआ, लेकिन तखतपुर नगर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच एट्रोसिटी एक्ट के प्रावधानों के तहत कर रही है और कहा गया है कि “साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई शीघ्र की जाएगी।”

शासन से वार्ता विफल — सहकारी समिति कर्मचारियों का आंदोलन और उग्र होगा

धान खरीदी ऑपरेटर संघ और सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ की हड़ताल 12वें दिन भी जारी, कर्मचारियों में उबाल —   शासन के रवैए से नाराज कर्मचारी, हड़ताल पर अडिग   बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की चार सूत्रीय मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल गुरुवार को 12वें दिन भी जारी रही। प्रदेशभर के कर्मचारी शासन के उदासीन रवैए से नाराज हैं और साफ कहा है कि जब तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। —   प्रेस क्लब में फूटा कर्मचारियों का आक्रोश   गुरुवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शासन केवल आश्वासन दे रहा है, मगर जमीनी स्तर पर कोई पहल नहीं दिख रही। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 2058 सहकारी समितियों और 2739 उपार्जन केंद्रों में करीब 15 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं, जो हर साल लाखों किसानों को धान खरीदी की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। फिर भी वर्षों से इन्हें नियमित वेतन, स्थायी नियुक्ति और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है।     — धान खरीदी ऑपरेटर संघ और सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ की हड़ताल 12वें दिन भी जारी, कर्मचारियों में उबाल — शासन के रवैए से नाराज कर्मचारी, हड़ताल पर अडिग बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की चार सूत्रीय मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल गुरुवार को 12वें दिन भी जारी रही। प्रदेशभर के कर्मचारी शासन के उदासीन रवैए से नाराज हैं और साफ कहा है कि जब तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। — प्रेस क्लब में फूटा कर्मचारियों का आक्रोश गुरुवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शासन केवल आश्वासन दे रहा है, मगर जमीनी स्तर पर कोई पहल नहीं दिख रही। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 2058 सहकारी समितियों और 2739 उपार्जन केंद्रों में करीब 15 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं, जो हर साल लाखों किसानों को धान खरीदी की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। फिर भी वर्षों से इन्हें नियमित वेतन, स्थायी नियुक्ति और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। — चार सूत्रीय मांगें जिन पर टकराव जारी 1️⃣ वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान धान खरीदी में हुई सुखत राशि का तत्काल भुगतान। 2️⃣ परिवहन के बाद संपूर्ण सुखत राशि समितियों को दी जाए ताकि आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके। 3️⃣ आउटसोर्सिंग प्रणाली समाप्त कर ऑपरेटरों का नियमितीकरण किया जाए। 4️⃣ मध्यप्रदेश की तर्ज पर ₹3 लाख वार्षिक प्रबंधकीय अनुदान और वेतनमान प्रदान किया जाए। — “किसानों की सेवा करने वालों को ही नजरअंदाज किया जा रहा” महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शासन किसान हितैषी नीतियों की बात तो करता है, लेकिन जो कर्मचारी किसानों को सुविधा देते हैं, वही उपेक्षित हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव स्तर की बैठकों में आश्वासन तो मिला, पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। > “अब कर्मचारी सिर्फ लिखित आदेश चाहते हैं, खोखले वादे नहीं,” — महासंघ के नेताओं ने कहा।   — धान खरीदी कार्य ठप पड़ने की चेतावनी महासंघ ने चेतावनी दी है कि अगर शासन ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला, तो आगामी धान खरीदी कार्य पूरी तरह ठप हो जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि अब उनकी हड़ताल सिर्फ अधिकार की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान का आंदोलन बन चुकी है। — प्रदेशभर से मिल रहा समर्थन प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि आंदोलन को अब प्रदेशव्यापी समर्थन मिल रहा है। ग्रामीण समितियों और किसान संगठनों ने भी कर्मचारियों की मांगों को न्यायसंगत बताते हुए समर्थन का ऐलान किया है। संघ का कहना है कि यदि शासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह हड़ताल राज्यव्यापी जनआंदोलन का रूप ले लेगी। — कर्मचारियों ने दी अंतिम चेतावनी महासंघ और संघ के पदाधिकारियों — एकलव्य चंद्रा, रूद्रदत्त तिवारी, भोलाराम यादव, कमलकांत पाटनवार, विद्याशंकर यादव और मीनाक्षी यादव — ने एक स्वर में कहा कि > “हम किसानों की सेवा करते हैं, लेकिन शासन हमें केवल आश्वासन दे रहा है। अब अगर जल्द ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो हम धान खरीदी कार्य से पूरी तरह अलग होकर आंदोलन को और तेज करेंगे।” चार सूत्रीय मांगें जिन पर टकराव जारी   1️⃣ वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान धान खरीदी में हुई सुखत राशि का तत्काल भुगतान। 2️⃣ परिवहन के बाद संपूर्ण सुखत राशि समितियों को दी जाए ताकि आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके। 3️⃣ आउटसोर्सिंग प्रणाली समाप्त कर ऑपरेटरों का नियमितीकरण किया जाए। 4️⃣ मध्यप्रदेश की तर्ज पर ₹3 लाख वार्षिक प्रबंधकीय अनुदान और वेतनमान प्रदान किया जाए। —   “किसानों की सेवा करने वालों…

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ₹61.20 करोड़ की संपत्ति ईडी ने कुर्क की

✍️ भागीरथी यादव   धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई, ईडी ने बताया — चैतन्य बघेल थे शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर — ईडी की बड़ी कार्रवाई, राज्य की राजनीति में हलचल छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ₹61.20 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। ईडी की इस कार्रवाई से राज्य की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। —   364 प्लॉट और बैंक खातों पर लगी रोक   ईडी ने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों में ₹59.96 करोड़ मूल्य की 364 आवासीय और कृषि भूमि शामिल हैं। इसके अलावा, ₹1.24 करोड़ की चल संपत्तियां बैंक खातों और सावधि जमा के रूप में जब्त की गई हैं। यह कार्रवाई उन संपत्तियों पर केंद्रित है, जिन्हें ईडी ने “अपराध से अर्जित आय (POC)” बताया है। —   2500 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ी है जांच   ईडी के मुताबिक, यह कुर्की छत्तीसगढ़ में चल रहे कथित 2500 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ी जांच का हिस्सा है। एजेंसी ने कहा कि अपराध की इस आय को विभिन्न माध्यमों से रियल एस्टेट और अन्य व्यावसायिक संपत्तियों में निवेश किया गया था। —   ईडी का दावा — चैतन्य बघेल थे शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर   ईडी की जांच में दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर कार्यरत थे। पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र होने के कारण उन्हें “अंतिम नियंत्रक और निर्णयकर्ता” की भूमिका दी गई थी। एजेंसी के अनुसार, शराब कारोबार से जुटाए गए अवैध धन के संग्रह, चैनलाइजेशन और वितरण से जुड़े प्रमुख फैसले चैतन्य बघेल के निर्देश पर लिए जाते थे। —   रियल एस्टेट में लगाया गया अवैध धन   ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, चैतन्य बघेल ने कथित रूप से शराब घोटाले से प्राप्त अवैध धन को अपने रियल एस्टेट कारोबार “मेसर्स बघेल डेवलपर्स” के माध्यम से वैध दिखाने की कोशिश की। उन्होंने इस राशि का उपयोग “विट्ठल ग्रीन” नामक रियल एस्टेट परियोजना में किया। ईडी ने बताया कि इस तरह घोटाले से कमाई गई रकम को वैध निवेश के रूप में पेश किया गया। —   18 जुलाई 2025 को हुई गिरफ्तारी, अब न्यायिक हिरासत में   ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है। — पूर्व आबकारी मंत्री और अन्य अफसर भी गिरफ्तार इस घोटाले में पहले भी कई बड़े नाम सामने आ चुके हैं। ईडी ने अब तक पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी (आईटीएस) और कवासी लखमा (तत्कालीन आबकारी मंत्री और विधायक) को गिरफ्तार किया है। ईडी ने कहा कि चैतन्य बघेल की संपत्ति की यह कुर्की, पहले से कुर्क की गई ₹215 करोड़ की अचल संपत्तियों का हिस्सा है। — ईडी ने कहा — जांच जारी रहेगी ईडी ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामले में जांच अभी जारी है। एजेंसी ने कहा कि और भी संपत्तियां व व्यक्तियों की भूमिका सामने आ सकती है।  

पुराना बस स्टैंड बना नशे का गढ़: अवैध चखना दुकानों का बोलबाला, पुलिस-आबकारी पर उठे गंभीर सवाल

बिलासपुर का पुराना बस स्टैंड नशे के शिकंजे में अवैध चखना दुकानों का साम्राज्य, आबकारी और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल रौनक से बर्बादी तक – एक इलाका जो पहचान खो बैठा   बिलासपुर का पुराना बस स्टैंड कभी यात्रियों और दुकानदारों की रौनक से भरा इलाका था। लेकिन आज यही इलाका नशे, अवैध बिक्री और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का अड्डा बन गया है। शाम ढलते ही यहां हुड़दंगियों और नशेड़ियों का कब्जा हो जाता है।     कानून की अनदेखी, खुलेआम चल रहा धंधा   आबकारी अधिनियम के मुताबिक, किसी भी शराब दुकान से 50 मीटर की दूरी में चखना दुकान या शराब सेवन स्थल चलाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद पुराने बस स्टैंड में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सड़क किनारे अवैध चखना दुकाने दिन-रात खुली रहती हैं और शराबियों को खुली छूट मिली हुई है।     —   नशे का कारोबार बेखौफ, पुलिस-आबकारी पर सवाल   स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत के बिना यह कारोबार चल ही नहीं सकता। शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, जिससे लोगों में नाराजगी है। एक नागरिक ने कहा —   > “यहां हर शाम कानून का मखौल उड़ता है, और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।”

कोरबा में रफ्तार बनी खतरा: डॉक्टर की कार ने मचाई तबाही, बड़ा हादसा टला

✍️ भागीरथी यादव   कोरबा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के रजगामार रोड पर शुक्रवार शाम रफ्तार ने फिर कहर बरपाया। चावल गोदाम तिराहे के पास एक तेज रफ्तार कार ने पहले एक इलेक्ट्रिक ऑटो को टक्कर मारी और फिर सामने खड़ी कार से जा भिड़ी। हादसा इतना जोरदार था कि आसपास मौजूद राहगीर बाल-बाल बच गए, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।   प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सीजी 12 बीजी 3303 नंबर की कार को एक डॉक्टर चला रहा था। बताया गया कि डॉक्टर ने दो बाइक सवारों को टक्कर से बचाने की कोशिश में अचानक दिशा बदली, जिससे वाहन का नियंत्रण खो बैठा और लगातार दो टक्करों के बाद कार सड़क किनारे जा रुकी।   स्थानीय होटल संचालक लूतन वर्मा ने बताया कि यह तिराहा अब दुर्घटनाओं का गढ़ बन गया है। हाल ही में इसी जगह बस की टक्कर से एक युवक की मौत हो चुकी है।   लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि चावल गोदाम तिराहे पर स्पीड ब्रेकर, सिग्नल और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

अवैध धान परिवहन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: तीन पिकअप जब्त, 200 बोरी धान बरामद

✍️ भागीरथी यादव   बलरामपुर, 13 नवंबर 2025: जिले में अवैध धान परिवहन पर नकेल कसते हुए प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से धान लाने वाले तीन पिकअप वाहनों को पकड़कर लगभग 200 बोरी धान जब्त किया गया है। वाहनों के चालकों से पूछताछ के दौरान किसी भी प्रकार के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। संयुक्त टीम की रातभर की कार्रवाई   अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वाड्रफनगर, श्री नीर निधि नंदेहा ने बताया कि विगत रात्रि संयुक्त टीम द्वारा गश्त के दौरान तीन पिकअप वाहन संदिग्ध स्थिति में पाए गए। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि धान को उत्तर प्रदेश से बलरामपुर जिले के धान खरीदी केंद्रों या सहकारी समितियों में अधिक मूल्य पर विक्रय के उद्देश्य से लाया जा रहा था।   कानूनी कार्रवाई दर्ज   मामले में राजस्व, मंडी और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर ही आवश्यक कार्रवाई करते हुए कृषि उपज मंडी अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया है। प्रशासन ने सभी जब्त वाहनों को थाने में सुपुर्द कर दिया है।   प्रशासन की सख्त चेतावनी   एसडीएम श्री नंदेहा ने कहा कि धान खरीदी सत्र की शुरुआत के साथ ही जिले में निगरानी और सघन जांच की कार्रवाई और अधिक तेज़ कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “राज्य में अन्य प्रदेशों से अवैध धान की आवाजाही और बिक्री पर पूर्ण नियंत्रण रखा जाएगा। जो भी व्यक्ति इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”    

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