मुंगेली में छठ पूजा की धूम — आगर नदी घाट पर महिलाओं ने डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, कल उगते सूर्य के साथ होगा व्रत का समापन

📍मुंगेली, छत्तीसगढ़ से अतुल श्रीवास्तव की रिपोर्ट

 

मुंगेली। लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर मुंगेली में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। नगर की आगर नदी घाट पर सोमवार शाम बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। कल तड़के उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाएगा।

घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सोलह श्रृंगार कर सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल, सिंघाड़ा और केला सजाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती नजर आईं। प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस एवं नगर निगम का अमला तैनात रहा।

पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल और जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पांडेय ने घाट पहुंचकर श्रद्धालुओं को छठ पर्व की बधाई दी और प्रशासन की ओर से सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

 

🌞 चार दिनों तक चलने वाला व्रत

 

छठ पूजा की शुरुआत 25 अक्टूबर से नहाय-खाय के साथ हुई थी। इस दिन व्रती महिलाएं पवित्र स्नान कर सात्विक भोजन — लौकी-भात और चने की दाल — से व्रत का आरंभ करती हैं।

26 अक्टूबर को खरना मनाया गया, जिसमें व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर पूजा करती हैं। इसके बाद वे 36 घंटे तक बिना अन्न और जल ग्रहण किए उपवास रखती हैं।

 

27 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य दिया गया, जिसमें महिलाएं सूर्यास्त के समय घाटों पर पूजा करती हैं। अब 28 अक्टूबर की सुबह प्रातः अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा। यह क्षण छठ पूजा का सबसे पवित्र माना जाता है।

 

🌅 व्रतियों की श्रद्धा और भावनाएं

 

व्रती अनामिका सिंह ने कहा —

 

> “छठ पूजा भगवान सूर्य की उपासना का पर्व है। डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर हम अपने परिवार की खुशहाली और उन्नति की कामना करते हैं।”

 

 

 

वहीं समिति के अध्यक्ष अभिलाष सिंह ने पर्व के दौरान प्रशासन और पुलिस के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके सहयोग से घाटों पर सुरक्षा और स्वच्छता की उत्तम व्यवस्था रही।

 

🌼 छठ पर्व का महत्व

 

छठ पूजा सूर्य देव और छठी मइया की आराधना का त्योहार है, जो शुद्धता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। मान्यता है कि इस व्रत से संतान सुख, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

 

मुंगेली के घाटों पर दीपों की रोशनी, भक्ति गीतों और व्रतियों की आस्था से वातावरण पूरी तरह पावन और भक्तिमय बना हुआ है।

 

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