
✍️मुंगेली | अतुल श्रीवास्तव
छत्तीसगढ़ में व्यापारियों पर एक और आर्थिक बोझ थोपे जाने के आरोप के साथ छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, मुंगेली इकाई ने ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। चेम्बर प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुंगेली कलेक्टर को मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की।

चेम्बर पदाधिकारियों ने कहा कि मौजूदा दौर में स्थानीय व्यापार पहले ही गहरे संकट से गुजर रहा है। ऑनलाइन कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट नेटवर्क के बढ़ते प्रभाव से बाजार लगभग 50 प्रतिशत तक सिमट चुका है। किराना, मेडिकल, मनिहारी, इलेक्ट्रॉनिक और कपड़ा जैसे परंपरागत व्यवसाय भारी दबाव में हैं। ऐसे समय में ट्रेड लाइसेंस के नाम पर नया शुल्क लगाना व्यापारियों की कमर तोड़ने जैसा है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सरकार की बार-बार बदलती नीतियों से व्यापारी वर्ग असमंजस और असुरक्षा की भावना से जूझ रहा है। पूर्व में गुमास्ता और ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त की गई थी, लेकिन अब फिर से गुमटी से लेकर मॉल तक सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर इसे लागू कर दिया गया है।
चेम्बर का कहना है कि व्यापारी पहले से ही जीएसटी, आयकर, खाद्य सुरक्षा लाइसेंस, ड्रग लाइसेंस, मंडी लाइसेंस और संपत्ति कर जैसी अनेक प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं। ऐसे में दुकान के क्षेत्रफल के आधार पर 3 से 6 रुपये प्रति वर्गफीट तक प्रस्तावित शुल्क एक नए संपत्ति कर के समान है, जो किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं है।
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेम आर्य, प्रदेश मंत्री प्रवीण वैष्णव, अध्यक्ष नरेन्द्र कोटड़िया, महामंत्री कोमल शर्मा, उपाध्यक्ष गुरजीत मक्कड़, मन्नू श्रीवास्तव, नितेश ललवानी, अमितेश आर्य, राम तलरेजा सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता वापस नहीं ली गई, तो व्यापारी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।






