
✍️ भागीरथी यादव
मनेंद्रगढ़। शहर के भगत सिंह तिराहा के पास स्वरोजगार की एक छोटी-सी पहल सोमवार को विवाद का कारण बन गई। रोजगार की तलाश में जुटे एक शिक्षित युवक द्वारा लगाए गए अस्थायी चाय ठेले को शासकीय भूमि बताई जा रही जगह से हटवा दिया गया, जिससे मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आकाश शर्मा नामक युवक भगत सिंह तिराहा के समीप शासकीय भूमि के किनारे चलित चाय ठेला लगाकर आजीविका शुरू करने का प्रयास कर रहा था। परिवार का कहना है कि ठेला अस्थायी रूप से लगाया गया था और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं हटाने की तैयारी भी थी।
इसी दौरान संतोष गुप्ता नामक व्यक्ति ने उक्त स्थान को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए ठेला हटवा दिया। परिजनों का आरोप है कि जब भूमि शासकीय बताई जा रही है, तो निजी स्वामित्व का दावा किस आधार पर किया गया? उनका कहना है कि इस घटनाक्रम से युवक मानसिक रूप से आहत हुआ है और परिवार स्वयं को दबाव में महसूस कर रहा है।
मामले की शिकायत सिटी कोतवाली थाना मनेंद्रगढ़ में दर्ज कराई गई है। परिवार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि युवक के साथ कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी।
परिजनों ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि कोई भूमि शासकीय है, तो उसकी स्थिति स्पष्ट की जाए, और यदि अतिक्रमण का मामला है तो वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाए—न कि व्यक्तिगत दबाव के माध्यम से कार्रवाई हो।
मंगलवार दोपहर लगभग 2:30 बजे मीडिया द्वारा थाना प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। स्थानीय नागरिकों ने दिन के समय जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क न हो पाने को लेकर चिंता जताई है।
अब प्रश्न यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करता है। स्वरोजगार की कोशिश और भूमि स्वामित्व के दावे के बीच उपजा यह विवाद शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।






