
कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा | सुशील जायसवाल
कोरबा जिले के धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी प्रक्रिया समाप्त हुए 19 दिन बीत चुके हैं, लेकिन धान का उठाव न होने से अब संकट गहराने लगा है। विशेष रूप से पोड़ी उपरोड़ा और कटघोरा विकासखंड के हाथी प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति भयावह है। खुले आसमान और खेतों में रखा लाखों क्विंटल धान हाथियों के दल को रिहायशी इलाकों की ओर खींच रहा है, जिससे जन-धन की हानि का खतरा बढ़ गया है।
आंकड़ों की स्थिति: 11 लाख क्विंटल धान अब भी केंद्रों में
जिले में इस वर्ष कुल 27.47 लाख क्विंटल धान की खरीदी की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से लगभग 11 लाख क्विंटल धान अभी भी केंद्रों में ही डंप है। सबसे अधिक चिंता उन 11 संवेदनशील केंद्रों की है जो सीधे तौर पर ‘एलीफेंट कॉरिडोर’ (हाथी प्रभावित क्षेत्र) में आते हैं। यहाँ करीब 2 लाख क्विंटल धान रखा है, जिसकी महक हाथियों को आकर्षित कर रही है।
हाथियों का तांडव और प्रभारियों में खौफ
पसान, जटगा, कोरबी, मोरगा और लेमरू जैसे क्षेत्रों में हाथियों का दल लगातार विचरण कर रहा है। हाल ही में जटगा परिक्षेत्र के धोबीबारी में हाथियों ने 10 मकानों को ध्वस्त कर दिया और मवेशियों को नुकसान पहुँचाया है। अब फड़ प्रभारियों को डर है कि धान की महक हाथियों को सीधे उपार्जन केंद्रों तक ले आएगी।
कलेक्टर के निर्देशों की अनदेखी?
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने पहले ही निर्देश दिए थे कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों से धान उठाव को प्राथमिकता दी जाए। इसके बावजूद मिलर्स की सुस्ती बरकरार है। मिलर्स केवल डिलीवरी ऑर्डर (DO) कटवा रहे हैं, लेकिन परिवहन की गति अत्यंत धीमी है।
फड़ प्रभारियों पर दोहरी मार
वर्तमान स्थिति में कर्मचारी और प्रभारी दोतरफा संकट झेल रहे हैं:
जान का जोखिम: हाथियों के डर के बीच रात भर जागकर धान की रखवाली करना।
आर्थिक जिम्मेदारी: यदि धूप के कारण धान सूखता है (वजन में कमी) या हाथी उसे नुकसान पहुँचाते हैं, तो नियमतः इसकी रिकवरी नोडल अधिकारी और प्रभारी से की जाती है।
प्रशासनिक रुख
प्राधिकारी शशिकांत द्विवेदी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विपणन अधिकारी को सख्त निर्देश दिए हैं कि 28 फरवरी तक हर हाल में संवेदनशील केंद्रों से धान का उठाव पूर्ण कर लिया जाए।
चेतावनी: यदि समय रहते धान का परिवहन नहीं किया गया, तो हाथियों का दल बड़ी जन-धन की हानि कर सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और लापरवाह मिलर्स की होगी।






