
✍️ भागीरथी यादव
कोरबा – आज की तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी में हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि हमारी साँसें, हमारा अस्तित्व और हमारी आने वाली पीढ़ियाँ सब कुछ उस प्रकृति पर टिका है, जिसे हम लगातार नज़रअंदाज़ करते जा रहे हैं। प्रदूषण, अवैध कटाई और शहरीकरण ने वातावरण को असंतुलित कर दिया है। ऐसे दौर में यदि कोई व्यक्ति समाज को पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, तो यह अपने आप में एक क्रांति से कम नहीं।
इसी भावना का जीवंत उदाहरण हैं दर्री जमनीपाली (छत्तीसगढ़ प्रांत)। हाल ही में अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच ने पर्यावरण माह 2025 के दौरान आयोजित वन महोत्सव कार्यक्रम में उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उस सोच को दिया गया है, जो हरियाली को भविष्य की जीवनरेखा मानती है।
दर्री जमनीपाली ने अपने प्रयासों से यह साबित किया है कि पौधारोपण सिर्फ पेड़ लगाने का काम नहीं, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए साँसों का निवेश है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर वृक्षारोपण, संरक्षण और जन-जागरूकता की जो मुहिम चलाई, वह समाज को प्रकृति से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर है।
मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश एम. जैन और राष्ट्रीय संयोजक मनीष अग्रवाल का यह कथन गौर करने योग्य है कि— “दर्री जमनीपाली का योगदान हरित चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उनके प्रयास हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि समाज और मंच दोनों ही इस हरित आंदोलन से नई ऊर्जा पाएंगे।”
आज आवश्यकता है कि हम सब दर्री जमनीपाली जैसे प्रयासों को अपनाएँ। हर व्यक्ति यदि अपने जीवन में सिर्फ एक पेड़ लगाने और उसका संरक्षण करने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हम एक सुरक्षित और स्वच्छ धरती छोड़ सकते हैं।
🌱 दरअसल, यह केवल एक सम्मान की खबर नहीं है, बल्कि यह संदेश है—
“प्रकृति हमें जीवन देती है, अब हमारी बारी है कि हम उसे संरक्षित करें।”






