दुर्ग का दोगुना हत्याकांड सुलझा: 18 महीने बाद पुलिस ने खोला सनसनीखेज राज

✍️ भागीरथी यादव

 

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 18 महीने से रहस्य बना दादी–पोती का दोहरा हत्याकांड आखिरकार पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलगांव थाना क्षेत्र के गनियारी गांव में 6 मार्च 2024 की रात हुई इस वारदात में 62 वर्षीय रजवती बाई साहू और उनकी 17 वर्षीय पोती सविता साहू की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। लंबे समय तक कोई ठोस सुराग न मिलने के बाद यह मामला पुलिस के लिए चुनौती बन गया था, लेकिन तकनीकी जांच और धैर्यपूर्ण कार्रवाई ने आखिरकार पूरे षड्यंत्र से पर्दा उठा दिया।

 

 

 

प्रेम-प्रसंग बना खून की वजह

 

जांच में पता चला कि सविता का गांव के युवक चुमेन्द्र से प्रेम संबंध था। इसी दौरान चुमेन्द्र की सगाई दूसरी लड़की से हो गई। जब यह बात सविता तक पहुंची तो उसने अपनी सहेलियों से कहा कि वह आरोपी और उसके परिवार को बर्बाद कर देगी। यही आशंका आरोपी के मन में घर कर गई। अफेयर उजागर होने के डर और प्रतिष्ठा खोने की भय से चुमेन्द्र ने अपनी गर्लफ्रेंड और उसकी दादी को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।

 

 

 

योजना बनाकर दोस्तों संग पहुंचा हत्या करने

 

पुलिस के अनुसार घटना वाली रात चुमेन्द्र पहले अपने दोस्तों के साथ घुघसीडीह गया, ताकि किसी को उसके इरादों पर शक न हो। देर रात करीब 1 बजे वह गांव लौटा और भाई को फोन कर दरवाज़ा खुलवाया। भाई के सो जाने के बाद उसने अपने साथी पंकज निषाद और एक अन्य फरार आरोपी को व्हाट्सऐप कॉल कर बुलाया। तीनों स्कॉर्पियो में सवार होकर सविता के घर पहुंचे और अंदर घुसकर वारदात को अंजाम दिया।

 

पीड़िता को आरोपी ने पहले शादी का झांसा दिया, लेकिन सगाई की बात सुनकर लड़की के इनकार से वह बौखला उठा। गुस्से में उसने घर में रखी टंगिया से सविता पर हमला कर दिया। शोर मचाने पर उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। इतने में दादी रजवती बाई जाग गईं, तो आरोपी ने चाकू से वार कर उनकी भी हत्या कर दी।

 

 

 

सबूत मिटाने की कोशिश

 

दोनों की हत्या के बाद तीनों आरोपी तालाब पहुंचे और अपने कपड़े व हथियार वहीं धोकर वापस घर लौट गए। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चाकू, मोबाइल फोन और स्कॉर्पियो जब्त कर लिए हैं। गिरफ्तार दोनों आरोपी पूर्व में भी आबकारी और मारपीट के मामलों में जेल जा चुके हैं।

 

 

 

62 संदिग्धों से पूछताछ—तकनीक ने खोला जाल

 

जांच के दौरान पुलिस ने एफएसएल, फिंगरप्रिंट, डॉग स्क्वॉड की मदद ली तथा अहमदाबाद और रायपुर में कई संदिग्धों के ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट भी कराए। आखिरकार घटनास्थल से मिले तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस सच्चाई तक पहुंच सकी।

 

 

 

एक आरोपी फरार

 

आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया कि यह मामला पुलिस के धैर्य, वैज्ञानिक जांच और लगातार प्रयास का परिणाम है। पुलिस अब भी फरार तीसरे आरोपी की तलाश कर रही है।

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