बिलासपुर की सड़कों पर ई-रिक्शा का कहर, नियमों की अनदेखी से बढ़ा हादसों का खतरा

✍️ भागीरथी यादव 

बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में ई-रिक्शा जहां आम लोगों के लिए सस्ता और सुविधाजनक परिवहन साधन बनकर उभरा है, वहीं इनका बेलगाम संचालन अब शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सड़कों पर ई-रिक्शा चालकों की मनमानी इस हद तक बढ़ चुकी है कि ट्रैफिक नियम केवल कागजों तक सिमटते नजर आ रहे हैं।

 

शहर के व्यस्त इलाकों—गोल बाजार, पुराना बस स्टैंड, नेहरू चौक, सत्यम टॉकीज क्षेत्र, व्यापार विहार, सिरगिट्टी रोड और रेलवे स्टेशन—में दिनभर ई-रिक्शा का अव्यवस्थित जमावड़ा लगा रहता है। बिना संकेत अचानक मोड़ लेना, सड़क के बीचों-बीच ब्रेक लगाना और जहां-तहां सवारी चढ़ाना-उतारना आम बात हो गई है। इससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि पीछे चल रहे वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।

 

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई चौराहों पर ई-रिक्शा चालकों ने सड़क को ही अपना निजी स्टैंड बना लिया है। अवैध पार्किंग से सड़कें संकरी हो गई हैं, नतीजतन पीक आवर्स में लंबा जाम लगना आम हो गया है। इन जामों में स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और यहां तक कि एंबुलेंस भी फंस जाती हैं, जिससे आम नागरिकों में भारी नाराजगी है।

 

नियमों की अनदेखी, सुरक्षा से खिलवाड़

 

चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक न तो प्रशिक्षित हैं और न ही उन्हें यातायात संकेतों की सही जानकारी है। कई चालक बिना वैध लाइसेंस और परमिट के वाहन चला रहे हैं। मुनाफे की होड़ में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही हैं—बच्चों को गोद में, बुजुर्गों और महिलाओं को असुरक्षित हालात में सफर कराया जा रहा है, जो किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है।

 

यातायात पुलिस पर भी सवाल

 

शहरवासियों का आरोप है कि यातायात पुलिस की ढिलाई ने ही ई-रिक्शा चालकों के हौसले बढ़ा दिए हैं। शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से नियमों का उल्लंघन लगातार जारी है। कई चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नियम तोड़ते ई-रिक्शा साफ देखे जा सकते हैं।

 

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

 

अब शहरवासी मांग कर रहे हैं कि ई-रिक्शा संचालन के लिए निर्धारित रूट, स्टैंड और समय का सख्ती से पालन कराया जाए। बिना लाइसेंस और परमिट वाले वाहनों को जब्त किया जाए, नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और बार-बार उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं। साथ ही सभी ई-रिक्शा चालकों को अनिवार्य यातायात प्रशिक्षण देने की भी जरूरत बताई जा रही है।

 

यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो ई-रिक्शा की यह अव्यवस्था आने वाले दिनों में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। न्यायधानी की सड़कों को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए अब सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि ठोस और कठोर कार्रवाई की जरूरत है।

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