
✍️ भागीरथी यादव
रायपुर, 11 दिसंबर 2025।
मानवाधिकार दिवस के अवसर पर मानवता की एक अनूठी मिसाल सामने आई। नारी निकेतन अम्बिकापुर ने 4–5 वर्षों से लापता मानसिक रूप से विक्षिप्त और शारीरिक रूप से विकलांग युवती ममता उर्फ अंशु पासवान को उसके परिवार से मिलाकर एक बड़ी संवेदनशील पहल की है।
अक्टूबर 2025 में बैकुंठपुर रेलवे स्टेशन के पास भटकती मिली ममता न तो अपना नाम बता पा रही थी, न ही घर का पता। नारी निकेतन में उपचार, पोषण और काउंसलिंग के बाद धीरे-धीरे उसकी स्मृति लौटी और उसे अपने पिता का मोबाइल नंबर याद आया। इसी सुराग से उसकी पहचान नालंदा (बिहार) निवासी के रूप में हुई। सखी वन स्टॉप सेंटर नालंदा के सहयोग से परिवार का पता भी मिल गया।
10 दिसंबर को नारी निकेतन में ममता को औपचारिक रूप से उसके पिता कैलाश पासवान के सुपुर्द किया गया। वर्षों बाद बेटी को देखकर पिता की आंखें भर आईं। उन्होंने संस्था द्वारा दी गई सुरक्षा, देखभाल और उपचार के लिए गहरी कृतज्ञता जताई और कहा—“बेटी का सुरक्षित मिलना हमारे लिए चमत्कार से कम नहीं।”
नारी निकेतन के समर्पित प्रयासों ने न सिर्फ एक युवती की पहचान लौटाई, बल्कि एक बिछड़े परिवार को फिर से मिलाकर मानवता और मानवाधिकारों की सच्ची जीत को भी साबित किया।






