मनेंद्रगढ़ नगरपालिका में ‘प्रॉक्सी राज’ का अंत: स्वास्थ्य मंत्री ने परिवारवाद के बजाय वरिष्ठता को दी प्राथमिकता

✍️ भागीरथी यादव

 

 

मनेंद्रगढ़/एमसीबी। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘पारदर्शिता’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। मनेंद्रगढ़ नगरपालिका में अब महिला जनप्रतिनिधियों के नाम पर उनके रिश्तेदारों या पतियों (प्रॉक्सी) का हस्तक्षेप पूरी तरह बंद होगा।

इसी कड़ी में मंत्री जायसवाल ने कड़ा फैसला लेते हुए महेंद्र पाल सिंह को नगरपालिका परिषद मनेंद्रगढ़ में विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किया है। उन्होंने पूर्व प्रतिनिधि सरजू यादव को हटाकर भाजपा के वरिष्ठ नेता महेंद्र पाल सिंह पर भरोसा जताया है।

नियम सबके लिए एक बराबर: स्वास्थ्य मंत्री का संदेश

नगरीय प्रशासन विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पतियों या रिश्तेदारों के दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में इस नियम का सख्ती से पालन कर यह साफ कर दिया है कि सत्ता में नियम और अनुशासन सर्वोपरि है।

इस नियुक्ति के पीछे मुख्य उद्देश्य ‘परिवारवाद’ को खत्म कर ‘वरिष्ठता’ और ‘अनुभव’ को मान देना है।

चर्चा में क्यों है यह ‘पावर शिफ्ट’?

अक्सर देखा जाता है कि स्थानीय निकायों में महिला अध्यक्षों या पार्षदों के कार्यों का संचालन उनके पति या पुत्र करते हैं, जिसे आम बोलचाल में ‘प्रॉक्सी राज’ कहा जाता है।

पारदर्शिता की पहल: प्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण को वास्तविक रूप देने के लिए रिश्तेदारों की नियुक्ति पर रोक लगाई है।

बड़ा राजनीतिक फैसला: इस बदलाव को केवल एक नियुक्ति के रूप में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में कार्यप्रणाली बदलने की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

कार्यकर्ताओं में उत्साह: वरिष्ठ नेता महेंद्र पाल सिंह की नियुक्ति से पार्टी के जमीनी और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश गया है।

“सत्ता में परिवारवाद के लिए कोई जगह नहीं है। नियम सभी के लिए समान हैं और पारदर्शिता के साथ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देना ही हमारी सरकार की प्राथमिकता है।” — श्यामबिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री