
✍️ भागीरथी यादव
बिलासपुर। कोविड-19 से हुई मृत्यु के एक मामले में बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनियों के लिए नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस को मृतका के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का निर्देश दिया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना और वाद व्यय के रूप में 2 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान का आदेश भी दिया गया है।
उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना मानते हुए लगाया जुर्माना
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि बीमा दावा खारिज करना न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे पीड़ित परिवार को गहरी मानसिक पीड़ा भी पहुंची। आयोग ने माना कि कंपनी का यह रवैया बीमा नियमों के खिलाफ है और इसी आधार पर हर्जाना लगाया गया।
पॉलिसी जारी होने से पहले पूरी तरह स्वस्थ थीं मृतका
मामले के अनुसार बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक ने अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मैक्स लाइफ इंश्योरेंस का ‘प्लैटिनम वेल्थ प्लान’ लिया था। पॉलिसी जारी करने से पहले बीमा कंपनी द्वारा कराई गई मेडिकल जांच में शैल कौशिक को पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया था।
कोविड संक्रमण के बाद बिगड़ी हालत, इलाज के दौरान मौत
सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से संक्रमित हुईं। इलाज के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और 11 अक्टूबर 2020 को उनका निधन हो गया। इसके बाद पति द्वारा नियमानुसार बीमा दावा प्रस्तुत किया गया।
‘पहले से बीमारी’ का दावा आयोग ने किया खारिज
बीमा कंपनी ने यह कहकर दावा अस्वीकार कर दिया था कि पॉलिसीधारक पहले से गंभीर बीमारी से ग्रस्त थीं। आयोग ने इस दलील को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि कंपनी की अपनी मेडिकल रिपोर्ट में महिला को स्वस्थ बताया गया था, ऐसे में दावा खारिज करना अनुचित है।
तुरंत भुगतान करने के निर्देश
उपभोक्ता आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस को निर्देश दिए हैं कि मृतका के परिजनों को—
1 करोड़ रुपये की बीमा राशि
उस पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज
2 लाख रुपये मानसिक पीड़ा व वाद व्यय
का भुगतान तत्काल किया जाए।
आयोग के इस फैसले को कोविड से जुड़े बीमा दावों में उपभोक्ताओं के अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है।








