
✍️ भागीरथी यादव
पेरिस, 26 अक्टूबर 2025 —
वैश्विक आतंक वित्तपोषण पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अक्टूबर 2022 में ग्रे लिस्ट से बाहर किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अब उस पर निगरानी समाप्त हो गई है।
एफएटीएफ की अध्यक्ष एलिसा दे आंडा माद्राजो ने फ्रांस में आयोजित बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान सहित सभी देशों को अवैध आर्थिक गतिविधियों और आतंक वित्तपोषण के खिलाफ लगातार सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा,
> “कोई भी देश जो कभी ग्रे लिस्ट में रहा है, वह अपराधियों की गतिविधियों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता — चाहे वे धन शोधन करने वाले हों या आतंकवादी।”
माद्राजो ने स्पष्ट किया कि ग्रे लिस्ट से बाहर होना प्रक्रिया का अंत नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की शुरुआत है कि देश अपनी नीतियों और वित्तीय तंत्र को मजबूत करें ताकि अपराधी उनका दुरुपयोग न कर सकें।
पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से हटाया गया था, लेकिन उसकी निगरानी एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) के माध्यम से अब भी जारी है। यह देखा जा रहा है कि पाकिस्तान आतंक वित्तपोषण रोकथाम के उपायों को किस हद तक लागू कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैसे जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) डिजिटल वॉलेट और छिपे वित्तीय नेटवर्क के जरिए अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।
भारत की ‘नेशनल रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट 2022’ ने भी पाकिस्तान को आतंक वित्तपोषण के प्रमुख स्रोत के रूप में चिन्हित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वहां की सरकारी संस्था ‘नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (एनडीसी)’ से जुड़े संगठनों के माध्यम से आतंकियों को वित्तीय सहायता मिलती रही है।
पेरिस में हुई बैठक में एफएटीएफ ने नए मूल्यांकन मानकों के तहत बेल्जियम और मलेशिया की समीक्षा की, जबकि बुर्किना फासो, मोज़ाम्बिक, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका को ग्रे लिस्ट से हटा दिया गया।
माद्राजो ने कहा,
“हमारा लक्ष्य स्पष्ट है — आतंकवादियों और अपराधियों को धन से वंचित करना और वैश्विक वित्तीय तंत्रको सुरक्षित बनाना।”








