
✍️ भागीरथी यादव
रायपुर। राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का स्टाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्टाल में विभाग की प्रमुख योजनाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी उपलब्धियों को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2024 में शुरू की गई ‘एक पेड़ माँ के नाम’ योजना को स्टाल में विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। इस योजना के तहत अब तक 6.41 करोड़ पौधे छत्तीसगढ़ में लगाए जा चुके हैं। वहीं, राज्य में विकसित किए जा रहे मियावाकी फॉरेस्ट और ग्रीन गुफा जैसी पहलें हरित पर्यावरण और जलवायु संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही हैं।

स्टाल में हांदावाड़ा जलप्रपात (नारायणपुर), कुटुमसर गुफा (कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान) और बारनवापारा अभयारण्य जैसे प्रमुख प्राकृतिक स्थलों की झलक भी दी गई है। वन्यजीव संरक्षण के सफल प्रयासों के चलते राज्य में काला हिरण की संख्या 77 से बढ़कर 190 और बाघों की संख्या वर्ष 2021 के 17 से बढ़कर अप्रैल 2025 में 35 तक पहुंच गई है।
विभाग की ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ जैसी पहलें मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में कारगर साबित हुई हैं। इसके अलावा, औषधीय पौधों के संरक्षण और ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के माध्यम से वन संपदा के मूल्यवर्धन पर भी बल दिया जा रहा है।

स्टाल में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की ग्रीन गुफा परियोजना और घोटुल संस्था से जुड़ी जानकारी भी प्रदर्शित की गई है, जो बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को उजागर करती है।
राज्योत्सव में पहुंचे आगंतुकों ने विभाग के इस स्टाल को न केवल आकर्षक बल्कि ज्ञानवर्धक भी बताया। पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और सतत विकास के संदेश से सुसज्जित यह स्टाल छत्तीसगढ़ की हरित उपलब्धियों की जीवंत तस्वीर पेश कर रहा है।






