
✍️ भागीरथी यादव
छत्तीसगढ़ में वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। राज्य के वन मंत्री श्री केदार कश्यप के स्पष्ट निर्देशों के बाद वन विभाग द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध लगातार ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। वन मंत्री श्री कश्यप स्वयं उच्च अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कर वन सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन को लेकर रणनीति तय कर रहे हैं तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं।
इन्हीं निर्देशों के तहत प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेशभर में एंटी स्नेयर वॉक अभियान को तेज कर दिया गया है। इस अभियान के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं और शिकारियों पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है।
गरियाबंद में बड़ी कार्रवाई
गरियाबंद जिले के कुल्हाड़ीघाट वन परिक्षेत्र अंतर्गत ओड़ सर्कल में वन विभाग ने वन्यजीव अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। सघन गश्त और सतर्क निगरानी के दौरान 6 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें ग्राम सुनाबेड़ा (ओडिशा) के 2 और ग्राम ओड़ के 4 आरोपी शामिल हैं।
वन विभाग की टीम ने आरोपियों के कब्जे से खरगोश पकड़ने के फंदे, तीर-कमान और मछली पकड़ने के जाल जैसे अवैध शिकार में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए हैं। यह सामग्री वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई थी।
कड़ी कानूनी कार्रवाई
पकड़े गए सभी आरोपियों के विरुद्ध दो अलग-अलग प्रकरणों में पी.ओ.आर. (प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट) दर्ज की गई है तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है। सभी 6 अभियुक्तों को दिनांक 07 जनवरी को माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरियाबंद के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
आधुनिक तकनीक से बढ़ी निगरानी
वन विभाग द्वारा अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए अब ड्रोन, ट्रैप कैमरे, आधुनिक तकनीक, सघन गश्त, वनकर्मियों की अतिरिक्त तैनाती और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। खासकर पिकनिक या अन्य गतिविधियों की आड़ में होने वाले अवैध शिकार पर विशेष नजर रखी जा रही है।
शिकारियों के हौसले पस्त
वन विभाग की यह सख्त और सतत कार्रवाई न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम है, बल्कि शिकारियों के हौसले तोड़ने का भी मजबूत संदेश है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि वनों और वन्यप्राणियों के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
आने वाले समय में गश्त अभियान को और अधिक सशक्त करते हुए वन विभाग शिकार जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए प्रतिबद्ध है।






