
✍️ भागीरथी यादव
8 साल की उम्र में कमरे में बंद की गई लड़की 20 साल बाद रेस्क्यू, रोशनी और पहचान दोनों खो चुकी… परिवार ने दिया हैरान कर देने वाला तर्क
बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक बच्ची को उसके पालन-पोषण करने वाले परिवार ने पूरे 20 साल तक एक कमरे में कैद करके रखा। जब उसे बंद किया गया था तब वह मात्र 8 साल की थी, और अब लगभग 28 साल की उम्र में अधिकारियों ने उसे रेस्क्यू किया है।
रेस्क्यू के समय लड़की न अपना नाम बता पा रही थी न किसी पहचान पर प्रतिक्रिया दे पा रही थी। लंबे समय तक अंधेरे कमरे में बंद रहने की वजह से उसकी आंखों की रोशनी लगभग खत्म हो चुकी है। सामाजिक संपर्क न होने के कारण मानसिक रूप से भी वह गहरे आघात में है। उसके आसपास की दुनिया उसके लिए एकदम अपरिचित हो चुकी है।
बस्तर कलेक्टर हरीश एस ने बताया कि सामाजिक कल्याण विभाग इस पूरे मामले को जबरन कैद, आपराधिक लापरवाही और मानवाधिकार उल्लंघन के तौर पर जांच रहा है। यह जांच उन सवालों को भी खंगालेगी कि आखिर किस आधार पर एक बच्ची को दो दशकों तक कमरे में कैद रखा गया।
परिवार का तर्क चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि बच्ची को पड़ोस के एक व्यक्ति से खतरा था, जो कथित तौर पर उसका पीछा करता था और यौन उत्पीड़न की कोशिश करता था। परिवार का दावा है कि भय व सुरक्षा के नाम पर उन्होंने उसे घर से बाहर निकलने ही नहीं दिया। लेकिन यह सवाल जस का तस खड़ा है—क्या सुरक्षा के नाम पर किसी बच्चे को 20 साल तक कैद रखना सही था?
रेस्क्यू के बाद चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि उसकी आंखों की पूरी दृष्टि वापस आना लगभग असंभव है। वहीं सिस्टर क्लेयरलिट ने उम्मीद की एक किरण दिखाते हुए कहा है कि लड़की धीरे-धीरे वातावरण को समझने लगी है, प्रतिक्रिया दे रही है और सहारे से चलना भी सीख रही है।
यह मामला न सिर्फ मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल उठाता है, बल्कि इस बात पर भी कि समाज और सिस्टम की नजरों से इतने साल तक ऐसी एक बच्ची कैसे ओझल रही। बस्तर की यह कहानी एक बार फिर याद दिलाती है कि डर, अज्ञानता और सामाजिक उपेक्षा मिलकर किसी की पूरी जिंदगी छीन सकती है।
अब पूरा जिला इस बात की प्रतीक्षा कर रहा है कि जांच में क्या सामने आता है और लड़की को आगे किस तरह से सुरक्षित व सम्मानजनक जीवन दिया जाएगा।






