
✍️ भागीरथी यादव
प्रदेश में जमीन रजिस्ट्री की कलेक्टर गाइडलाइन दरों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। इसे लेकर विपक्ष तो पहले से हमलावर था, अब सत्ता पक्ष से भी इसे तत्काल रोकने की मांग तेज हो गई है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर गाइडलाइन वृद्धि को अव्यावहारिक और जनविरोधी बताते हुए तुरंत स्थगित करने की मांग की है।
विपक्ष का हमला : “जनता पर आर्थिक बोझ”
विपक्षी दलों का कहना है कि गाइडलाइन में अचानक 100 से 800 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों में जमीन खरीदना महंगा कर दिया है। इससे आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ेगा और संपत्ति संबंधी लेन-देन ठप होने का खतरा है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर बिना सामाजिक-आर्थिक आकलन के निर्णय लेने का आरोप लगाया है।
सांसद अग्रवाल का पत्र : “बिना जन-परामर्श लिया गया फैसला”
अग्रवाल ने कहा है कि गाइडलाइन बढ़ोतरी बिना वास्तविक मूल्यांकन और जनभागीदारी के लागू की गई है, जिससे किसानों, छोटे व्यवसायियों, कुटीर-उद्यमियों, रियल एस्टेट सेक्टर और मध्यम वर्ग में खासा असंतोष है।
उन्होंने यह भी कहा कि भूमि अधिग्रहण में किसानों को अधिक मुआवजा देने की दलील भ्रामक है, क्योंकि प्रदेश में केवल 1% भूमि ही अधिग्रहित होती है, जबकि 99% जनता पर अनावश्यक वित्तीय बोझ लाद दिया गया है।
सांसद ने पंजीयन शुल्क को 4% से घटाकर पुनः 0.8% करने की भी मांग की है और 20 नवंबर से लागू नई गाइडलाइन को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की अपील की है।
कांग्रेस का पलटवार : “सांसद की नौटंकी”
सांसद के पत्र को कांग्रेस ने “खानापूर्ति” करार देते हुए इसका प्रतीकात्मक दहन किया।
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि यदि भाजपा नेताओं को वाकई जनता की चिंता है, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करें—“कांग्रेस साथ खड़ी मिलेगी।”
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि गाइडलाइन वापस नहीं ली गई तो किसान–व्यापारी संगठनों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सरकारी अधिकारियों का दावा : “बाजार मूल्य के अनुरूप की गई बढ़ोतरी”
अधिकारियों के अनुसार, कई वर्षों से गाइडलाइन अपडेट न होने के कारण जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी दरों में भारी अंतर आ गया था। नई गाइडलाइन से:
किसानों को भूमि अधिग्रहण में तीन गुना तक अधिक मुआवजा,
संपत्ति के बदले अधिक बैंक ऋण की सुविधा,
और नगरीय क्षेत्रों में रोड-वाइज, संतुलित दर निर्धारण का लाभ मिलेगा।
राजनीतिक हलचल जारी — फैसला हवाओं में
बढ़ती प्रतिस्पर्धी राजनीति और व्यापक जनविरोध के बीच माना जा रहा है कि सरकार वित्त विभाग से समीक्षा करा सकती है। हालांकि नई गाइडलाइन वापस ली जाएगी या संशोधित—इस पर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं है।
प्रदेश में इस मुद्दे ने जमीन से जुड़ी राजनीति को नया मोड़ दे दिया है, और आने वाले दिनों में इसका असर सत्ता–विपक्ष की रणनीतियों पर साफ दिखाई दे सकता है।





