*माटी अधिकार मंच का एसईसीएल मुख्यालय में 13 अगस्त को हड़ताल* *चारों परियोजना की सैकड़ो भूविस्थापित रहेंगे उपस्थित*

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कोरबा जिले के चारों परियोजना के भूविस्थापित एवं प्रभावित जिन्होंने कोयला उत्खनन हेतु अपनी पुरखों की जमीन एसईसीएल कंपनी को दी है । कई दशक गुजर जाने के बाद भी आज रोजगार , मुआवजा , पुनर्वास एवं मूलभूत सुविधाओं के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं । समस्याओं की निराकरण हेतु अनेक बार निवेदन कर चुके है , परंतु झूठा आश्वासन देकर गुमराह किया जा रहा है । जिसके कारण चारों क्षेत्र के भूविस्थापित अत्यधिक व्यथित हैं । अर्जित भूमि के एवज में रोजगार , मुआवजा एवं पुनर्वास देने हेतु शासन एवं प्रशासन के द्वारा निर्देश दिए गए हैं । उन निर्देशों का एसईसीएल के द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है । जिसके कारण बार-बार खदान में हड़ताल की स्थिति निर्मित हो रही है । जिसके कारण उत्पादन क्षमता में कमी आ रही है । जिसके लिए प्रबंधन के अधिकारी जवाबदार हैं ।

भूविस्थापित एवं प्रभावितों की रोजगार , मुआवजा , पुनर्वास , मूलभूत समस्याएं , वैकल्पिक रोजगार , फसल क्षतिपूर्ति एवं अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं को देखकर निराकरण हेतु माटी अधिकार मंच के द्वारा एसईसीएल मुख्यालय में अनिश्चित कालीन गेट जाम आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है । यह आंदोलन 13 अगस्त दिन बुधवार को किया जाएगा । सीएमडी एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर को पत्र प्रेषित कर 13 बिंदुओं की मांग पत्र सौंपी गई है । उक्त समस्याओं के निराकरण हेतु एरिया एवं मुख्यालय स्तर पर अनेक बार पत्राचार एवं अधिकारियों से मुलाकात कर निवेदन किया गया है परंतु अधिकारियो के द्वारा टालमटोल करने एवं झूठा आश्वासन देने के फलस्वरूप गेट जाम आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है । इस गेट जाम आंदोलन धरना प्रदर्शन में एसईसीएल कुसमुंडा , कोरबा , दीपिका , एवं गेवरा क्षेत्र के प्रभावित एवं भूविस्थापित उपस्थित रहेंगे ।

*तत्कालीन मध्य प्रदेश शासन के आदेशों एवं निर्देशों का पालन एसईसीएल के द्वारा नहीं किया जा रहा है*

प्रावधान के अनुसार पुराने अर्जन में पुराने नियमों के अनुसार एवं नए अर्जन में नए नियमों के अनुसार रोजगार , मुआवजा एवं पुनर्वास देने का प्रावधान है । मध्य प्रदेश शासन के दौरान अधिग्रहित की गई भूमि के लिए मध्यप्रदेश शासन उद्योग विभाग के द्वारा निर्देश जारी किए गए थे । जिसके अनुसार अधिग्रहित भूमि के एवज में खातेदार के परिवार के कम से कम एक सदस्य को रोजगार देने हेतु निर्देशित किया गया है । इस आदेश के विरुद्ध जाकर एसईसीएल के अधिकारी रोजगार कम देने की नियत से दो खातेदारों की भूमि को जोड़कर एक व्यक्ति को रोजगार प्रदान किए है । फर्जी रूप से दूसरे खातेदार की भूमि को जोड़ा गया है । खाते को जोड़ने हेतु व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरती गई है । अधिकांश प्रकरणों में देखा गया है खातेदारों की फर्जी सहमति के आधार पर खाता जोड़कर रोजगार दिया गया है । संगठन के द्वारा इस संबंध में नियमों की जानकारी मांगने पर प्रबंधन के द्वारा यह जानकारी उपलब्ध कराई गई है , कि खाता जोड़कर रोजगार देने हेतु नियम संबंधी दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं है । फिर किस आधार पर खाता जोड़कर रोजगार प्रदान किया गया है यह समझ से परे है ।इससे स्पष्ट होता है कि प्रबंधन के अधिकारी तानाशाही पूर्वक रोजगार कम देने की नियत से खाते को जोड़कर एक व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध कराए हैं । जिस पर संगठन के द्वारा मांग की गई है कि नियम विरुद्ध संयुक्त कर रोजगार दिए गए खाते को पृथक पृथक मानकर रोजगार हेतु आदेशित किया जाए ।

*माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश उपरांत अर्जन के बाद जन्मे व्यक्ति को रोजगार नहीं*

पुराने अर्जन में एसईसीएल की चारों परियोजना में सभी खातेदारों को रोजगार प्रदान किया जा रहा था। प्रबंधन के अधिकारी एकाएक वर्ष 2014 से रोजगार में कटौती करने की नीयत से यह कहकर खातेदारों के नामांकित व्यक्ति को रोजगार से वंचित कर दिए हैं । जिनका जन्म अर्जन के बाद हुआ है
। ज्ञात हो कि प्रबंधन के द्वारा पुराने अर्जन में सैकड़ो अर्जन के बाद जन्मे नामांकित उम्मीदवार को रोजगार प्रदान किया गया है । परंतु रोजगार नही देने की नीयत से तानाशाही फरमान लाते हुए यह कहकर रोजगार से वंचित किया गया है , कि अर्जन के बाद जन्मा व्यक्ति रोजगार के लिए पात्र नहीं है । पीड़ित खातेदार के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में पिटीशन दायर करने पर माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के द्वारा खातेदारों के हित में आदेश पारित कर अधिग्रहण के बाद जन्मे व्यक्ति को रोजगार देने का आदेश पारित किया है । यह आदेश अलग-अलग पिटीशन के संबंध मे किया गया है । कुसमुंडा क्षेत्र में राहुल जायसवाल , गेवरा परियोजना में गोपाल कृष्ण एवं निर्मला देवी के पक्ष में यह आदेश पारित किया गया है । इस आदेश के आने के बाद अर्जन के बाद जन्में सभी व्यक्ति को रोजगार देने का मार्ग प्रशस्त हो गया है । संगठन के द्वारा मांग की गई है कि , माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेशानुसार अर्जन के बाद जन्में सभी नामांकित उम्मीदवार को एक महीने के भीतर रोजगार प्रदान किया जाय ।

*सरायपाली बुड़बुड़ परियोजना के छोटे खातेदारों के लिए हाईकोर्ट का रोजगार देने आदेश*

बुड़बुड़ सरायपाली परियोजना का अधिग्रहण 2007 में एल ए एक्ट के तहत किया गया है अधिग्रहण के दौरान एसईसीएल कोरबा क्षेत्र के महाप्रबंधक एवं वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति के तहत रोजगार देने का लिखित आश्वासन एसडीएम कटघोरा को दिया गया था एवं खातेदारों को रोजगार पात्रता प्रमाण भी प्रदान किया गया था । इसके उपरांत रोजगार संबंधी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद कोल इंडिया पॉलिसी 2012 लागू कर रोजगार देना प्रारंभ कर दिया गया । जिससे छोटे खातेदार रोजगार से वंचित हो गए। माटी अधिकार मंच के द्वारा पीड़ित खातेदारों को सहयोग प्रदान किया गया । जिसके फल स्वरुप माननीय हाई कोर्ट बिलासपुर के द्वारा रोजगार देने का आदेश पारित किया गया है । माननीय हाईकोर्ट बिलासपुर ने तीन बार खातेदारों को रोजगार देने हेतु आदेश पारित किया गया है सर्वप्रथम आदेश पारित होने के उपरांत प्रबंधन के द्वारा रिव्यू पिटिशन दायर करने पर पिटीशन खारिज किया गया । इसके बाद डिविजनल बेंच में अपील करने पर वहां से भी अपील खारिज किया गया है । भूविस्थापितों को परेशान करने की नियत से बार-बार अपील किया जाता है । जिससे कि हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट की फीस देने में अक्षम होने पर कोर्ट जाने का रास्ता त्याग दे एवं खातेदारों को रोजगार देना ना पड़े ।

*एसईसीएल के कारण हजारों लोग बेघर हो जाएंगे*

एसईसीएल के द्वारा शासकीय भूमि पर निर्मित मकान या अन्य व्यक्ति के भूमि पर बने मकान के एवज में पुनर्वास या पुनर्वास के बदले राशि प्रदान नहीं की जा रही है । इस नीति के कारण चारों परियोजना के हजारों परिवार के लोग बेघर हो जाएंगे शासन के द्वारा लोगों को बसाने के लिए आवास की व्यवस्था की जा रही है इसके विरुद्ध एसईसीएल के द्वारा विकास के नाम पर लोगों को बेघर किया जा रहा है । माटी अधिकार मंच के द्वारा गांव के सभी परिवारों के लिए पुनर्वास या पुनर्वास के बदले राशि प्रदान करने की मांग की गई है ।

*प्रबंधन पुनर्वास के लिए गंभीर नहीं , कोल उत्खनन पर ध्यान केंद्रित*

एसईसीएल के द्वारा केवल कोयला उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने पर ध्यान दिया जा रहा है । अर्जित भूमि के एवज में खातेदारों को समय पर रोजगार , मुआवजा एवं पुनर्वास प्रदान नहीं की जा रही है । पुनर्वास की व्यवस्था नहीं करने के कारण ग्रामीण अत्यधिक परेशान है । खदान का संचालन गांव के किनारे किया जा रहा है जिसके कारण जीवन संकटमय हो गया है । इस समस्या को ध्यान में रखकर तत्कालीन कलेक्टर के द्वारा वर्ष 2018 में सीएमडी बिलासपुर को पत्र प्रेषित कर यह निर्देश दिया गया था कि पुनर्वास प्रदान करने एवं पुनर्वासित करने के उपरांत ग्राम में उत्खनन कार्य किया जाए । जिसका पालन नहीं किया जा रहा है ।

*प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण समस्याओं के निराकरण के लिए गंभीर नहीं*

अभी वर्तमान में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के द्वारा बल प्रयोग कर उत्खनन हेतु भूमि उपलब्ध कराई जा रही है । जिसके कारण एसईसीएल प्रबंधन के अधिकारी समस्या निराकरण के लिए गंभीर नहीं है । प्रबंधन यह आश्वस्त हो गया है कि प्रशासन के द्वारा हमें भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी इस स्थिति में प्रभावित , भूविस्थापितों की समस्याओं का निराकरण करना आवश्यक नहीं है ।

माटी अधिकार मंच के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार ने बताया कि संगठन के द्वारा भूविस्थापितों , प्रभावितों के हित में 13 बिंदुओं की समस्याओं पर तत्काल कार्यवाही करने की मांग की गई है । समस्याओं के निराकरण हेतु 13 अगस्त को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर में गेट जाम आंदोलन किया जाएगा ।

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