Loksadan। 
दंतेवाड़ा – नक्सल उन्मूलन की दिशा में जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ को बड़ी सफलता मिली है। शासन की “लोन वर्राटू” योजना और “पूना नर्का मारगेम” पहल से प्रभावित होकर बुधवार को 21 माओवादी साथियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। इनमें 13 इनामी नक्सली भी शामिल हैं।
आत्मसमर्पण के दौरान डीआईजी कमलोचन कश्यप, सीआरपीएफ डीआईजी राकेश चौधरी और पुलिस अधीक्षक गौरव राय की मौजूद रहे। अधिकारियों ने माओवादियों का स्वागत करते हुए उन्हें शासन की पुनर्वास योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया।
सबसे बड़ा नाम आठ लाख के इनामी केये उर्फ केशा लेकाम, कम्पनी नंबर-1 का सक्रिय सदस्य रहा। इसके अलावा दो लाख इनाम वाली महिला मंगली कोवासी (प्लाटून 24 सदस्य, कोड़ोपाल), बुधराम कोवासी (प्लाटून 09 सदस्य, बीजापुर), और सन्नू कुंजाम (डीएकेएमएस अध्यक्ष, कुटरेम) सहित कई नामचीन नक्सली अब समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बन गए हैं। इसी तरह अलग-अलग इलाकों से जुड़े अन्य इनामी और सक्रिय कैडर भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल रहे।
जिला प्रशासन के अनुसार, बीते 18 महीनों में दंतेवाड़ा जिले में अब तक 390 से अधिक नक्सली, जिनमें 99 इनामी भी हैं, हथियार छोड़ चुके हैं। यह बदलती सोच इस बात का संकेत है कि अब जंगलों से हिंसा की जगह विकास और शांति का नया रास्ता निकल रहा है ।अधिकारियों का कहना है कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति न सिर्फ़ माओवादियों के जीवन को नई दिशा दे रही है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में शांति स्थापित करने की राह भी प्रशस्त कर रही है।





