
✍️ भागीरथी यादव
नई दिल्ली। भारतीय विज्ञापन जगत के दिग्गज और ओगिल्वी इंडिया के चीफ क्रिएटिव ऑफिसर पीयूष पांडे का 70 वर्ष की आयु में गुरुवार को निधन हो गया। उनके निधन से न केवल विज्ञापन उद्योग बल्कि पूरे रचनात्मक जगत में शोक की लहर है। पांडे को भारतीय विज्ञापन को उसकी “अपनी भाषा और आत्मा” देने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता था।
दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
लेखक और कॉमेडियन सुहेल सेठ ने एक्स पर लिखा, “मेरे सबसे प्यारे दोस्त पीयूष पांडे जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति के निधन से मैं बेहद दुखी और स्तब्ध हूं। भारत ने विज्ञापन जगत की एक महान हस्ती ही नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और सज्जन इंसान को खोया है। अब जन्नत में भी गूंजेगा ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा।’”
अदाणी ग्रुप के एग्रो और ऑयल एंड गैस डिवीजन के एमडी प्रणव अदाणी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “मेरे प्रिय मित्र पीयूष पांडे के निधन से स्तब्ध हूं। उन्होंने भारतीय विज्ञापन जगत को वैश्विक शक्ति के रूप में आकार दिया और कई पीढ़ियों के कहानीकारों को प्रेरित किया। उनकी गर्मजोशी और बुद्धिमत्ता की कमी हमेशा महसूस होगी। ओम शांति।”
फिल्ममेकर हंसल मेहता ने भी पोस्ट कर लिखा, “फेविकोल का जोड़ टूट गया, आज विज्ञापन जगत ने अपनी चमक खो दी। पीयूष पांडे, आप हमेशा याद रहेंगे।”
जयपुर से विज्ञापन की दुनिया तक
1955 में जयपुर में जन्मे पीयूष पांडे नौ भाई-बहनों में चौथे स्थान पर थे। उनके भाई प्रसून पांडे प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक हैं, जबकि बहन ईला अरुण जानी-मानी गायिका और अभिनेत्री हैं। पांडे ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर किया और 1982 में ओगिल्वी इंडिया से अपने करियर की शुरुआत की।
आइकॉनिक विज्ञापनों के जनक
उनका पहला विज्ञापन ‘सनलाइट डिटर्जेंट’ के लिए था। बाद में उन्होंने फेविकोल, कैडबरी, एशियन पेंट्स और हच जैसे ब्रांड्स के लिए ऐसे विज्ञापन बनाए जो भारतीय जनमानस की स्मृतियों में अमर हो गए। “कुछ खास है”, “हर खुशी में रंग लाए”, और “व्हेरेवर यू गो, आवर नेटवर्क फॉलोज” जैसे टैगलाइन उनकी ही सोच का नतीजा थीं।
उन्होंने 2014 में बीजेपी के लिए चर्चित नारा “अबकी बार, मोदी सरकार” भी तैयार किया था। साथ ही, ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ जैसे एकता गीत और कई सामाजिक अभियानों में भी उनका योगदान रहा।
पुरस्कार और सम्मान
पीयूष पांडे को 2016 में पद्मश्री, 2024 में एलआईए लीजेंड अवार्ड, तथा क्लियो लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया ने लगातार 12 वर्षों तक देश की नंबर 1 एजेंसी का दर्जा बनाए रखा।
विरासत जो हमेशा जिंदा रहेगी
पीयूष पांडे सिर्फ एक विज्ञापन निर्माता नहीं, बल्कि एक कहानीकार, प्रेरक और भारतीय रचनात्मकता के प्रतीक थे। उनके बनाए शब्द, भाव और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।








