
✍️ भागीरथी यादव
एमसीबी | जिले में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह ने एक संवेदनशील और प्रेरक पहल की है। इस अनोखे अभियान के तहत बच्चों को स्पेशल ट्रैफिक वॉलिंटियर बनाकर सड़क सुरक्षा जागरूकता का दायित्व सौंपा गया है।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि बच्चों की मासूम अपील और परिवार के प्रति उनका स्नेह, ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए सबसे सशक्त माध्यम साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक दर्दनाक सड़क हादसे देखे हैं, जिनका मुख्य कारण हेलमेट न पहनना, शराब पीकर वाहन चलाना, तेज रफ्तार और बिना लाइसेंस वाहन चलाना रहा है।
नियम नहीं मानेंगे तो नुकसान अपनों का होगा
एसपी रत्ना सिंह ने कहा कि लोग अक्सर यह सोचकर नियमों की अनदेखी कर देते हैं कि “कुछ नहीं होगा”, जबकि यही लापरवाही कई परिवारों की खुशियां छीन लेती है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे अपने घर के बड़ों को—
दोपहिया वाहन चलाते समय आईएसआई प्रमाणित हेलमेट पहनने
नशे की हालत में वाहन न चलाने
वैध ड्राइविंग लाइसेंस और नंबर प्लेट के साथ ही वाहन चलाने
तेज रफ्तार और स्टंट से दूरी बनाए रखने
के लिए प्रेरित करें।
‘हेलमेट डर से नहीं, परिवार की सलामती के लिए’
पुलिस अधीक्षक ने भावुक संदेश देते हुए कहा—
“हेलमेट पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पहनना चाहिए। जब बच्चे अपने माता-पिता से उनकी सलामती की बात करते हैं, तो यह संदेश सीधे दिल तक पहुंचता है और नियम बोझ नहीं, आदत बन जाते हैं।”
‘राह-वीर योजना’: मानवता को सम्मान
एसपी रत्ना सिंह ने जानकारी दी कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले नागरिकों को पुलिस द्वारा परेशान नहीं किया जाता।
केंद्र सरकार की ‘राह-वीर योजना’ के तहत घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25,000 रुपये नकद पुरस्कार और सम्मान प्रदान किया जाता है, जिससे समाज में सहयोग और मानवता की भावना को बढ़ावा मिलता है।
नन्हे वॉलिंटियर बनेंगे बदलाव के वाहक
अंत में पुलिस अधीक्षक ने विश्वास जताया कि जिले के ये नन्हे सिपाही अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगे और सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन का रूप देंगे, जिससे आने वाले समय में जिले की सड़कों पर दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।






