
✍️ भागीरथी यादव
रायपुर। चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में गुरुवार 2 अप्रैल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
बताया जा रहा है कि मामले की सुनवाई शुरू होने के कुछ ही देर बाद कोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाया। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने करीब 11 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की थी, जिसमें अमित जोगी के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं।
गौरतलब है कि इस मामले में पहले अमित जोगी को अदालत से बरी कर दिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस को दोबारा खोलते हुए हाईकोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू की गई है।
यह मामला साल 2003 का है, जब राकांपा नेता रामावतार जग्गी की रायपुर में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में वर्ष 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
दो साल पहले भी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दोषियों की अपील खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। वहीं, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को पुनः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा था।
अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी कार्रवाई और तेज हो सकती है।
