Loksadan:- कोरबा (पाली)। दुरुस्त अंचल के पहाड़ों के बीच बसे ग्राम सुरका में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर साल बड़े ही अनोखे और परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। इस दिन गांव की सभी बहुएं और बेटियां उपवास रखती हैं। जो महिलाएं विवाह के बाद ससुराल चली जाती हैं, उन्हें भी विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है।
जन्माष्टमी के दिन उपवास रखने के बाद महिलाएं पारंपरिक लोकगीत गाते हुए झूला झूलती हैं। यहां झूला भी साधारण नहीं होता बल्कि लकड़ी का बना बहुत बड़ा झूला पेड़ों की ऊंचाई पर बांधा जाता है, जिसमें एक साथ आठ से दस महिलाएं बैठ सकती हैं। लोकगीतों की धुन पर झूला झूलती महिलाएं मानो कृष्ण को आमंत्रित कर रही हों। इन गीतों में कभी दर्द झलकता है तो कभी नटखटपन, मानो वे अपने दुख-सुख की व्यथा कह रही हों।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सुरका की जन्माष्टमी की यह परंपरा अद्वितीय है और आसपास कहीं और इस तरह नहीं मनाई जाती। भले ही बाहरी लोग इसके बारे में ज्यादा न जानते हों, लेकिन गांववाले हर साल बड़ी श्रद्धा और खुशी के साथ इस पर्व को मनातेहैं।


जन्माष्टमी के अगले दिन सुबह पूजा-पाठ के बाद महिलाएं अपना व्रत तोड़ती हैं। इस आयोजन में पुरुष वर्ग भी महिलाओं को हर संभव सहयोग प्रदान करते हैं।






