
✍️ भागीरथी यादव
कोरबा। जिले के जंगलों से निकलकर गांवों में तबाही मचा रहे हाथियों ने ग्रामीणों की जिंदगी भय और दर्द से भर दी है। कभी खेतों में पसीने से सींची गई धान की फसल रौंद दी जाती है, तो कभी सब्जियों की बाड़ी चंद मिनटों में बर्बाद हो जाती है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोग घरों में सुरक्षित नहीं रह गए—कभी भी हाथी दीवार तोड़कर अंदर घुस जाते हैं और सब कुछ तहस-नहस कर डालते हैं।
रात ढलते ही गांवों में सन्नाटा नहीं, बल्कि दहशत का पहरा बैठ जाता है। ग्रामीण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग नींद छोड़कर जागरण करने को मजबूर हैं, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, किसान कर्ज और नुकसान से टूट चुके हैं, और बूढ़े-बुजुर्ग असहाय होकर भगवान से ही रक्षा की प्रार्थना कर रहे हैं।
इसी दर्दनाक हालात को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी (शहर) के अध्यक्ष नथ्थूलाल यादव ने प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप को पत्र लिखकर त्वरित समाधान की गुहार लगाई है।

पत्र में साफ लिखा गया है कि कटघोरा वन मंडल के गांव—तनेरा, सरगुजा गोरैया, पेंड्रापारा, सतरेंगा, जरगढ़ूगुड़ा समेत कई इलाकों में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। धान और सब्जियों की फसलें चौपट हो रही हैं, मकान ढह रहे हैं और कई परिवार जानमाल के खतरे में जी रहे हैं।
जिला कांग्रेस कमेटी ने मंत्री से निवेदन किया है कि अब सिर्फ कागजी योजनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि ग्रामीणों को इस भय और तबाही से मुक्ति मिल सके।






