
✍️ भागीरथी यादव
कोरबा। कुसमुंडा कोयला खदान में ड्यूटी के दौरान एक मजदूर की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजन और सहकर्मी मुआवजे व आश्रित को नौकरी देने की मांग को लेकर शव के साथ जीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही।
मृतक की पहचान जांजगीर-चांपा जिले के कठरा बुड़गहन निवासी कांशी दास महंत (34 वर्ष) के रूप में हुई है। वह कुसमुंडा थाना क्षेत्र के नरईबोध में पत्नी और बच्चों के साथ रहता था और ठेका कंपनी रवि एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (आरईपीएल) में कोल सैंपलिंग का कार्य करता था।
बताया गया कि कांशी दास महंत बुधवार रात की पाली में ड्यूटी पर था। सुबह घर लौटने से पहले ही कार्यस्थल पर उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। सहकर्मियों ने तत्काल उसे विकासनगर स्थित एसईसीएल डिस्पेंसरी पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे रेफर कर दिया गया।
इसके बाद उसे कोसाबाड़ी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजन और सहकर्मी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मॉर्च्युरी पहुंच गए और ठेका कंपनी के अधिकारियों से मुआवजा एवं नौकरी की मांग की।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आक्रोशित ग्रामीणों और मजदूरों ने शव को लेकर कुसमुंडा खदान स्थित जीएम कार्यालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान रवि एनर्जी कंपनी के कोऑर्डिनेटर अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन श्रमिक हितों से जुड़े सवालों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दे सके।
गौरतलब है कि एसईसीएल की खदानों में कोल सैंपलिंग का कार्य कोयला मंत्रालय द्वारा QCPL कंपनी को ठेके पर दिया गया है, जिसने यह काम आगे पेटी ठेके पर गुजरात की कंपनी रवि एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया। कुसमुंडा खदान में यह कंपनी वर्ष 2023 से कार्यरत है, जहां लगभग 160 मजदूर काम कर रहे हैं।
घटना के बाद खदान क्षेत्र में श्रमिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और ठेका मजदूरों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।






