
सुशील जायसवाल
कोरबी चोटिया:-
मातिन पहाड़ पर स्थित प्राचीन मां मातिन दाई मंदिर आस्था, परंपरा और रहस्य का अद्भुत संगम है। यहां देवी की मूर्ति नहीं, बल्कि उनके आसन की पूजा की जाती है, जो इस मंदिर को अन्य शक्तिपीठों से अलग पहचान देता है।
मान्यता है कि प्राचीन काल में मातिन क्षेत्र में गोड़वशी राजा का शासन था, उसी समय से मां मातिन दाई की पूजा-अर्चना शुरू हुई, जो आज भी निरंतर जारी है। बताया जाता है कि माता पीपर कुंड में स्नान करने आती थीं और उनका मूल स्थान वर्तमान मंदिर के उत्तर दिशा में स्थित एक गुफा में था, जहां बैगा पुजारी पूजा किया करते थे।
लोककथा के अनुसार, एक बार पूजा के बाद बैगा अपनी कटार गुफा में भूल गया और उसे लेने वापस गया, लेकिन फिर कभी लौटकर नहीं आया। इसके बाद उस गुफा का मार्ग पत्थरों से बंद कर दिया गया, जिसके निशान आज भी मौजूद हैं। स्थान के खतरनाक होने के कारण अब उस गुफा में जाना प्रतिबंधित है।
इसके पश्चात माता के आसन को पहाड़ के टापू पर साल वृक्ष के नीचे स्थापित कर पूजा प्रारंभ की गई। बाद में जटगा निवासी स्व. अमरचंद सेठ द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया। तभी से श्रद्धालु माता के आसन की पूजा कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं।
नवरात्र में भक्ति का अद्भुत नजारा
चैत्र नवरात्र के अवसर पर 19 मार्च से 27 मार्च तक यहां भव्य आयोजन हो रहा है। इस वर्ष मंदिर में 575 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए, जिससे पूरा परिसर श्रद्धा की रोशनी से आलोकित हो उठा। गरीब-अमीर, सभी वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के ज्योति प्रज्वलित कर माता का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहता है। छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर कठिन पहाड़ी चढ़ाई पार कर माता के आसन के दर्शन करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
सेवा भावना का उदाहरण बने युवा
मातिन पहाड़ पर पानी और भोजन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मातिन दाई सेवा समिति, जटगा जल सेवा समिति और नव युवक मंडल के युवाओं द्वारा सराहनीय पहल की जा रही है।
नौ दिनों तक ये युवा कांवर के माध्यम से पानी भरकर श्रद्धालुओं तक पहुंचाते हैं और पहाड़ी चढ़ाई शुरू करने वाले स्थानों पर भी पेयजल की व्यवस्था करते हैं। उनकी इस सेवा भावना की श्रद्धालु खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं।
आस्था, परंपरा और सेवा का संगम
मातिन दाई मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, त्याग, रहस्य और सेवा का जीवंत उदाहरण है, जहां हर वर्ष नवरात्र में भक्ति का अनोखा स्वरूप देखने को मिलता है।
