
सुशील जायसवाल
कोरबा (कोरबी-जलेके)। पसान क्षेत्र के ग्राम पंचायत जलेके में मंगलवार 24 फरवरी को रूंगटा कोल ब्लॉक आवंटन के विरोध में एक विशाल महापंचायत आयोजित की गई। यह आयोजन क्षेत्रीय विधायक एवं तुलेश्वर सिंह मरकाम के निर्देश तथा जिला पंचायत सदस्य एवं विद्वान सिंह मरकाम के मार्गदर्शन में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की ब्लॉक इकाई पसान द्वारा किया गया।
महापंचायत में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और प्रस्तावित कोल खनन परियोजना के खिलाफ एकजुटता दिखाई। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी स्थिति में वे अपने क्षेत्र में नई खदान नहीं खुलने देंगे। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज करते हुए विरोध प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने का संकल्प भी लिया गया।
बीजाड़ांड़ में जारी है अनिश्चितकालीन धरना
जलेके गांव से कुछ दूरी पर स्थित SECL की रानी अटारी विजय वेस्ट कोल माइंस के समीप पुटी पखना बीजाड़ांड़ क्षेत्र में ग्रामीण पिछले एक माह से अधिक समय से प्रस्तावित रूंगटा कोल ब्लॉक आवंटन को निरस्त करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
महापंचायत में उपस्थित ग्रामीणों ने बीजाड़ांड़ में चल रहे धरना प्रदर्शन को खुला समर्थन देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक गांव की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अस्मिता और पर्यावरण संरक्षण का प्रश्न है।
“किसी भी शर्त पर नहीं खुलने देंगे खदान” – विद्वान सिंह मरकाम
मीडिया से चर्चा करते हुए जिला पंचायत सदस्य एवं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिलाध्यक्ष विद्वान सिंह मरकाम ने कहा कि एक माह से चल रहे आंदोलन को क्षेत्रवासियों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ग्रामीणों की जायज मांगों की अनदेखी करता है, तो पार्टी जिला स्तर पर बड़ा जनांदोलन खड़ा करेगी।
उन्होंने कहा, “यह संघर्ष जमीन, जल और जंगल की रक्षा का है। ग्रामीणों की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का खनन कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी
महापंचायत में गोंगपा युवा मोर्चा जिला संगठन मंत्री विनोद कुमार आरमो, ब्लॉक उपाध्यक्ष मुकेश पोया सहित कई जनप्रतिनिधि, सरपंच और सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। सभा में सभी ने एक स्वर में खनन परियोजना का विरोध करते हुए आंदोलन को निर्णायक चरण तक ले जाने की बात कही।
महापंचायत के बाद क्षेत्र में आंदोलन को लेकर माहौल और अधिक गर्म हो गया है। अब सबकी निगाहें शासन-प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।






