
✍️ भागीरथी यादव
एमसीबी | मनेद्रगढ़
मनेद्रगढ़ शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मुख्य सड़कों पर चार पहिया वाहनों की अवैध पार्किंग और दुकानों के बाहर पसरे अतिक्रमण ने आम नागरिकों का पैदल चलना भी दूभर कर दिया है। प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह समस्या अब स्थायी रूप लेती जा रही है।
प्रमुख समस्याएँ और हॉटस्पॉट
अवैध पार्किंग: स्टेशन रोड से गांधी चौक और राम मंदिर से भगत सिंह तिराहा तक संकरी सड़कों पर चार पहिया वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े किए जा रहे हैं।
स्थायी अतिक्रमण: नियमों को ताक पर रखकर सड़कों से सटकर दुकानें और मकान बना लिए गए हैं, जिन पर निर्माण के समय कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दिखावटी कार्रवाई: पुलिस की चालानी कार्रवाई अभियान थमते ही बंद हो जाती है, जिससे स्थिति जस की तस बनी रहती है।
कार्रवाई में बाधा बनता ‘सिफारिश’ का खेल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब भी व्यापारियों या रसूखदारों पर कार्रवाई शुरू होती है, तो राजनीतिक सिफारिशों का दौर शुरू हो जाता है। नागरिकों ने सुझाव दिया है कि पारदर्शिता लाने के लिए कार्रवाई के दौरान पत्रकारों को साथ रखा जाए और बिना किसी भेदभाव के कठोर कदम उठाए जाएं।
केवल समझाइश से बात नहीं बनेगी
पुलिस की बार-बार दी गई समझाइश और चेतावनी का वाहन मालिकों पर कोई असर नहीं हो रहा है। लोग जानबूझकर मुख्य मार्गों पर गाड़ियाँ खड़ी कर रहे हैं। अब शहरवासी मांग कर रहे हैं कि केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि निरंतर और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि सार्वजनिक सड़कें निजी संपत्ति बनने से बच सकें।
