
✍️ भागीरथी यादव
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में एक साल लंबे बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए नक्सलियों को निर्णायक झटका दिया है। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की अंतिम प्रमुख अंतरराज्यीय आवाजाही एवं सप्लाई गलियारे को पूरी तरह सील कर दिया है। यह उपलब्धि क्षेत्र में नक्सली प्रभाव के ताबूत में अंतिम कील मानी जा रही है।
लंका में नया ऑपरेटिंग बेस – नक्सलियों की कमर टूटी
28 नवंबर को लंका कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) की स्थापना ने इस सफलता को और पुख्ता कर दिया। नारायणपुर से 135 किमी दूर स्थित यह नया कैंप तीन महीने से भी कम समय में आईटीबीपी और छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा खोले गए नौवें बड़े कैंप के रूप में उभरा है।
यह बेस महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की सीमा से मात्र 3 किमी दूर, अत्यंत रणनीतिक स्थान पर स्थापित किया गया है। यहां आईटीबीपी की 44वीं बटालियन, छत्तीसगढ़ पुलिस व डीआरजी के जवान तैनात किए गए हैं।
इसके बाद नक्सलियों के पास दक्षिण-पूर्वी कॉरिडोर पर होने वाली आवाजाही और आपूर्ति श्रृंखला लगभग पूरी तरह समाप्त हो गई है। गढ़चिरौली, बीजापुर और तेलंगाना को जोड़ने वाला उनका केंद्रीय गलियारा अब सुरक्षा बलों की मजबूत पकड़ में है।
बरसात में भी चला अभियान – बड़े नेताओं का अंत
अभियान बेहद कठिन रहा। एडजुम, जाट्लूर और पदमेटा जैसे घने जंगलों में बारिश के बीच कैंप खोलकर सुरक्षा बलों ने अभेद्य माने जाने वाले अबूझमाड़ में अप्रत्याशित प्रभुत्व कायम किया।
इसी दबाव का नतीजा था कि बोटेर हिल के पास हुई मुठभेड़ में वरिष्ठ नक्सली नेता बसवाराजू ढेर हो गया।
नक्सलियों का नेटवर्क ध्वस्त – सामूहिक समर्पण जारी
आईटीबीपी की इन नई चौकियों के खुलने के बाद सैकड़ों नक्सलियों और उनके समर्थकों ने आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह संकेत है कि नक्सलियों का कमांड और नियंत्रण ढांचा अब अपने कमजोरतम दौर में पहुंच चुका है।
2025 में बने रोड-कनेक्शन से मिला दम
इस अभियान की नींव 2025 की शुरुआत में नारायणपुर-नेलंगुर मार्ग को महाराष्ट्र के लाहेरी क्षेत्र से जोड़ने के बाद रखी गई थी। मोहंडी, कोड्लियार व पदमकोट जैसे कठिन क्षेत्रों में बनाए गए कैंपों ने ‘नक्सल राजधानी’ माने जाने वाले कुतुल को भी सुरक्षा घेरे में ले लिया।
अब विकास का दौर – बेड्रे पुल निर्माण को मिलेगी रफ्तार
इंद्रावती नदी से 6 किमी उत्तर लंका में बने नए कैंप ने क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद जगा दी है।
वर्षों से रुका बेड्रे पुल अब तेजी से बन सकेगा।
ओरछा–लंका रोड स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए जीवनरेखा बनेगी।
स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और सरकारी सेवाएँ अब उन गांवों तक पहुँच सकेंगी, जहां आज तक प्रशासन कदम नहीं रख पाया था।
स्थानीय ग्रामीणों ने आईटीबीपी का खुले दिल से स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि यह फैसला अबूझमाड़ को हिंसा से विकास की ओर ले जाएगा।





