
मनेंद्रगढ़/एमसीबी। ग्राम पंचायत नेऊर निवासी बुद्धसेन सिंह द्वारा अपने 14 वर्षीय भांजे के साथ हुए हादसे की शिकायत ने अब स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का ध्यान आकर्षित किया है। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। गरीब की आवाज़ आखिरकार तब सुनी गई जब यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया।
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शिकायत के बावजूद कार्रवाई में देरी
बुद्धसेन सिंह ने 18 सितंबर 2025 को थाना झगड़ाखांड में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए समीर बस मालिक पर अपने भांजे, बहन और जीजा को अगवा करने का आरोप लगाया था।
इसके बाद 22 सितंबर को उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी शिकायत सौंपी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कार्रवाई तब शुरू हुई जब यह मामला मीडिया में प्रमुखता से सामने आया।
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स्वास्थ्य मंत्री ने लिया संज्ञान
मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को निर्देश दिए। विभाग की ओर से एंबुलेंस भेजकर घायल बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनेंद्रगढ़ में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
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नाबालिग से कराई जा रही थी मजदूरी
इसी प्रकरण में थाना कोटाडोल निवासी पीड़ित की मां ने भी शिकायत दर्ज कराई है कि उनके 14 वर्षीय बेटे से बस मालिक और चालक जबरन मजदूरी करा रहे थे।
इसी दौरान बच्चा हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया। फिलहाल वह जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
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रात में बिना महिला पुलिसकर्मी के कार्रवाई
22 अक्टूबर की रात करीब 10:20 बजे झगड़ाखांड पुलिस के दो आरक्षक पीड़ित की मां को बयान के लिए थाने ले गए।
इस दौरान कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी, जो नियमों के खिलाफ है।
मामला मीडिया में आने के बाद थाना प्रभारी के निर्देश पर एक महिला आरक्षक को अस्पताल भेजा गया।
सवाल यह भी उठा कि शिकायत में बस क्रमांक CG 16 H 0132 कैसे दर्ज हो गया, जबकि पीड़िता को बस का नंबर पता ही नहीं था।
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दो अलग-अलग बस नंबरों से जांच पर संशय
बुद्धसेन सिंह की शिकायत में बस क्रमांक CG 15 DP 3302, जबकि पीड़िता की रिपोर्ट में CG 16 H 0132 दर्ज है।
दो अलग-अलग बस नंबरों के सामने आने से जांच की पारदर्शिता और पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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गरीब परिवार न्याय की राह देख रहा
पीड़ित परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। पिता पोलियोग्रस्त हैं और घर में छोटे बच्चे हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने बार-बार पुलिस और प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन कार्रवाई तब हुई जब मामला मंत्री तक पहुंचा।
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थाना प्रभारी से संपर्क नहीं हो सका
मामले पर जानकारी लेने के लिए शुक्रवार को थाना झगड़ाखांड प्रभारी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
थाने में मुलाकात का प्रयास भी असफल रहा।






