
सुशील जायसवाल
कोरबी चोटिया।
आस्था, उल्लास और लोक परंपरा के प्रतीक गौरा–गौरी महोत्सव के दिन ही कोरबी क्षेत्र से दो हृदयविदारक घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया। जहां एक ओर गांव में पर्व की तैयारियां चल रही थीं, वहीं अचानक आई इन घटनाओं ने खुशियों को मातम में बदल दिया।
ग्राम पंचायत घोसरा में रहने वाले बेलासर सिंह बिंझवार की 12 वर्षीय पुत्री गुरुवार सुबह घर से नहाने के लिए पास ही स्थित बागों डुबान गई थी। नहाते समय वह अनजाने में गहरे पानी में चली गई और डूब गई। जब तक ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिलती, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मासूम बच्ची की असमय मौत से गांव में कोहराम मच गया।
सूचना मिलते ही कोरबी चौकी प्रभारी सुरेश कुमार जोगी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। शव का पंचनामा कर उसे पोड़ी उपरोड़ा अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। जिस गांव में ढोल–मंजीरे बजने थे, वहां अब केवल रोते-बिलखते परिजनों की आवाजें गूंज रही हैं।
इधर, उसी दिन एक और दुखद खबर सामने आई। फुलसर गांव में एक नाबालिग ने अज्ञात कारणों के चलते फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। नाबालिग द्वारा उठाया गया यह कदम कई सवाल छोड़ गया है, जिनके जवाब अब तलाशे जा रहे हैं।
एक ही दिन में घटी इन दो दर्दनाक घटनाओं ने गौरा–गौरी पर्व की खुशियों को पूरी तरह फीका कर दिया। गांव-गांव में शोक की लहर है और लोग स्तब्ध हैं कि किस्मत ने त्योहार के दिन ही इतना बड़ा घाव क्यों दे दिया।
मासूमों की असमय मौत ने यह अहसास करा दिया कि जीवन कितना नश्वर है और एक पल में सब कुछ बदल सकता है।






