
विकास की आभा खो चुका शहर, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के साए में जकड़ा मुंगेली
अतुल श्रीवास्तव
जिला – मुंगेली, छत्तीसगढ़
मुंगेली।
कभी विकास की उम्मीदों से भरा हुआ शहर आज नगर पालिका की उदासीनता और अक्षम प्रशासन की वजह से जर्जर और अव्यवस्थित होता जा रहा है। बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाने में असमर्थ यह व्यवस्था अब सीमाओं का विस्तार करने की बात कर रही है, जबकि मौजूदा हालात पर न तो जनता का भरोसा है और न ही प्रशासन का नियंत्रण।
शहर की जमीनी हकीकत
सड़कों पर ठेले और सब्जी की दुकानों का कब्जा
टूटी-फूटी नालियां और हर मोहल्ले में गंदगी
अव्यवस्थित सार्वजनिक जल प्रबंधन, टूटी पाइपलाइन और स्वच्छ पानी की किल्लत
हसदेव नदी प्रदूषण और कचरे के ढेर में तब्दील
प्रशासन की बेरुखी
नगर पालिका अधिकारी और कर्मचारी शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय टालमटोल की राजनीति में उलझे रहते हैं। नेताओं की गतिविधियां केवल फोटोशूट और छवि चमकाने तक सीमित रह गई हैं। विकास योजनाएं सिर्फ कागजों तक सिमटी हुई हैं।
बुनियादी सुविधाओं की कमी
जर्जर सड़कें और जगह-जगह पानी का जमाव
चौपाटी और सार्वजनिक स्थल का अभाव
आवारा पशुओं की समस्या और उस पर कोई नियंत्रण नहीं
बच्चों के लिए खेल मैदान और पार्क का न होना
भ्रष्टाचार की छाया
कई योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित हैं। भ्रष्टाचार और उदासीनता ने शहर के विकास की रफ्तार को रोक दिया है। नतीजा यह है कि नागरिकों ने अब विकास के सपने देखना तक बंद कर दिया है।
तात्कालिक सुधार की जरूरत
मुंगेली आज ऐसे मोड़ पर है, जहां तत्काल पारदर्शी और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। स्वच्छता, सुरक्षा, जल प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और सामाजिक-सांस्कृतिक ढांचे के लिए नई शुरुआत अनिवार्य है।
निष्कर्ष
मुंगेली के नागरिक बेहतर जीवन स्तर और स्वच्छ, व्यवस्थित शहर के हकदार हैं। नगर पालिका और प्रशासन को जवाबदेह बनाते हुए सुधार की दिशा में ठोस कार्रवाई तत्काल करनी होगी।






