महानदी काम्प्लेक्स निहारीका में श्री शिव आयुर्वेद वेलनेस सेंटर पंचकर्म चिकित्सालय के संस्थापक नाड़ीवैद्य पंडित शिव कुमार शर्मा जी के मुख्य आतिथ्य में हर्षोल्लास के साथ 79वां स्वतंत्रता दिवस समारोह महानदी काम्प्लेक्स परिसर में हर्षोल्लास से मनाया गया। सर्वप्रथम ध्वज का पूजन कर ध्वजारोहण समारोह के मुख्य अतिथि नाड़ीवैद्य पंडित शिव कुमार शर्मा द्वारा किया गया। राष्ट्रगान के पश्चात भारत माता की जय वंदेमातरम के उदघोष के साथ मुख्य अतिथि की आसंदी से नाड़ीवैद्य पंडित शिव कुमार शर्मा ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में स्वतंत्रता दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला एवं सुस्वास्थ्य की दृष्टि से स्वतंत्रता एवं स्वच्छंदता का अंतर समझाते हुये कहा कि स्वतंत्रता का अर्थ स्वछंदता नही है वरन अनुशासित एवं नियमयुक्त कर्म है जो कि निरोगी जीवन हेतु अति आवश्यक है। स्वतंत्रता में दो शब्द “स्व” अर्थात स्वयँ “तंत्र” अर्थात नियम, प्रबंध युक्त व्यवस्था, मतलब आयुर्वेद शास्त्र में जो नियम बताये गये हैं उन नियमों का अनुपालन कर जीवन जीना ही स्वतंत्रता है न कि नियमों को तोड़कर जीने में। स्वछंदता नियंत्रणहीन व्यवहार है और स्वतंत्रता नियंत्रित नियमयुक्त व्यवहार। और नियंत्रित नियमयुक्त व्यवहार से ही सुस्वास्थ्य की प्राप्ति होगी औऱ जीवन निरोगी होगा। स्वतंत्रता दिवस समारोह का संचालन अपनी ऊर्जामयी वाणी में नेत्र नंदन साहू ने कीया। समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन महानदी काम्प्लेक्स के कोषाध्यक्ष अंदाज कलेक्शन के संचालक संतोष अग्रवाल ने किया। स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि नाड़ीवैद्य पंडित शिव कुमार शर्मा, महानदी काम्प्लेक्स के हरेंद्र साहू, विजेंद्र गुप्ता, फिरोज मेमन, विकास अग्रवाल, सचिन अग्रवाल, संजय अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा, प्रतिभा शर्मा, डॉ.वागेश्वरी शर्मा, पवन मोदी, शिव जायसवाल, गजेंद्र राठौड, सुधीर सक्सेना, नेत्रनंदन साहू, अश्विनी बुनकर, अरुण मानिकपुरी, कमल धारिया, देवबलि कुंभकार, राजकुमार पटेल, कमला कुंभकार, सिद्धराम शाहनी, राकेश इस्पात, सुलोचना यादव, सिमरन जायसवाल एवं हर्ष नारायण शर्मा के अलावा बड़ी संख्या मे महानदी काम्प्लेक्स के समस्त व्यापारी बंधु एवं नागरिकगण उपस्थित थे।
डोंगरगढ़: मड़ई मेले में खूनी संघर्ष, आयोजन समिति के सदस्य पर जानलेवा हमला; ‘आदिवासी नेता’ समेत 7 गिरफ्तार
बोरतलाव | 25 जनवरी, 2026 डोंगरगढ़ के बोरतलाव थाना क्षेत्र में पारंपरिक ‘मड़ई मेले‘ का उल्लास उस वक्त मातम और दहशत में बदल गया, जब एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान आयोजन समिति के सदस्य पर धारदार हथियार से प्राणघातक हमला कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और कथित आदिवासी नेता उदय नेताम समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। विवाद की जड़: मंच पर हुल्लड़बाजी और समझाइश घटना रविवार रात की है। ग्राम बोरतलाव में वार्षिक मड़ई के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां चल रही थीं। चश्मदीदों के मुताबिक, ग्राम बुढ़ानछापर निवासी उदय नेताम अपने पुत्र के साथ मंच पर चढ़कर शोर-शराबा करने लगा। जब आयोजन समिति के सदस्य बशीर मोहम्मद और अन्य साथियों ने उसे अनुशासन बनाए रखने और मंच से उतरने की समझाइश दी, तो विवाद बढ़ गया। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद उदय वहां से चला तो गया, लेकिन यह शांति महज एक बड़े तूफान से पहले की खामोशी थी। योजनाबद्ध हमला और अफरा-तफरी कुछ ही देर बाद उदय नेताम अपने बेटे मनीष और अन्य साथियों (पंकज साहू, योगेश कोर्राम, बंटी साहू, जाफर खान, विकास गोंडाने और हर्षित निषाद) के साथ वैगनआर कार में सवार होकर वापस लौटा। आरोप है कि इन सभी ने एकजुट होकर बशीर मोहम्मद को घेर लिया और जान से मारने की नीयत से उनके पेट पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले के बाद लहूलुहान बशीर को गिरते देख मेले में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और उत्सव का माहौल चीख-पुकार में बदल गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई: सभी आरोपी सलाखों के पीछे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बोरतलाव पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की। पुलिस ने दबिश देकर सभी सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जब्ती: पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई वैगनआर कार, धारदार हथियार और 6 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। धाराएं: आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। चिंता का विषय: मुख्य आरोपी उदय नेताम की पहचान क्षेत्र में एक सक्रिय आदिवासी नेता के रूप में है। एक सार्वजनिक मंच और सांस्कृतिक आयोजन में एक ‘नेता’ की इस तरह की हिंसक संलिप्तता ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। सुरक्षा पर सवाल मड़ई जैसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी ने स्थिति को और बिगड़ने से रोक लिया, लेकिन इस घटना ने पारंपरिक उत्सवों में बढ़ती गुंडागर्दी और हथियारों के बढ़ते चलन की ओर इशारा किया है।






