
✍️ भागीरथी यादव
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड मामले में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। रायपुर सेशन कोर्ट ने 24 जनवरी को CBI की लोअर कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को निरस्त करते हुए CBI की रिव्यू पिटिशन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को एक बार फिर मुकदमे का सामना करना होगा।
सेशन कोर्ट ने भूपेश बघेल को नियमित कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की पहली सुनवाई 23 फरवरी 2026 को तय की गई है। भूपेश बघेल के अधिवक्ता फैजल रिजवी ने कोर्ट में पेशी की तारीख की पुष्टि की है।
सेशन कोर्ट के फैसले के बाद भूपेश बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “यह केंद्र और राज्य सरकार की सोची-समझी चाल है। अदालत में सच्चाई सामने आएगी। हम लड़ेंगे और जीतेंगे।”
गौरतलब है कि इसी मामले में 4 मार्च 2025 को रायपुर की विशेष CBI कोर्ट ने भूपेश बघेल को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई ठोस आधार नहीं है और सभी धाराएं हटा दी गई थीं।
हालांकि, CBI ने उस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है। सेशन कोर्ट ने 2024-25 में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा दिए गए राहत आदेश को रद्द कर दिया है, जिससे भूपेश बघेल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
इससे पहले भूपेश बघेल की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा था कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने दलील दी थी कि भूपेश बघेल ने न तो किसी सीडी का निर्माण कराया और न ही उसका वितरण किया, और उन्होंने किसी भी प्रकार का अपराध नहीं किया है।
अब सेशन कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला फिर से ट्रायल के दौर में प्रवेश कर गया है, जिस पर पूरे प्रदेश की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं।





