
✍️ भागीरथी यादव
नई दिल्ली// देश को झकझोर देने वाले निठारी कांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को अंतिम दर्ज एफआईआर में भी बरी कर दिया। इसके साथ ही कोली अब निठारी कांड से जुड़े सभी मामलों में बरी हो गया है।
अदालत ने कहा कि निठारी में हुए अपराध जघन्य थे, लेकिन अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आरोपी के कथित कबूलनामे के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।
कबूलनामे को अदालत ने ठुकराया
कोर्ट ने कोली के कबूलनामे को अविश्वसनीय मानते हुए कहा कि वह 60 दिनों से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रहा और उसे कानूनी सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में उसका बयान स्वतंत्र या स्वैच्छिक नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की — “कबूलनामा तभी मान्य होता है जब वह बिना दबाव और भय के दिया गया हो।”
दोषपूर्ण जांच पर कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पुलिस जांच में गंभीर खामियां और रिकॉर्ड संबंधी कमियां थीं, जिससे न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हुई। कोर्ट ने कहा — “इतने संवेदनशील और भयावह अपराध में जांच निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से होनी चाहिए थी, परंतु ऐसा नहीं हुआ।”
पीड़ित परिवारों का दर्द
अदालत ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा — “निठारी में हुए अपराध अमानवीय थे और पीड़ित परिवारों का दुख माप से परे है। यह गहरे अफसोस की बात है कि दो दशक बाद भी उन्हें न्याय का संतोष नहीं मिल सका।”
पृष्ठभूमि
2005-06 में नोएडा के निठारी गांव में दर्जनों बच्चों के लापता होने और उनके मानव अवशेष मिलने से यह मामला सामने आया था। उस समय देशभर में इस कांड ने सनसनी फैला दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही, निठारी कांड के सभी मामलों में सुरेंद्र कोली को कानूनी रूप से बरी कर दिया गया है। अदालत ने कहा कि “न्याय का तकाज़ा केवल सजा देना नहीं, बल्कि निष्पक्ष और प्रमाणिक जांच सुनिश्चित करना भी है।”








