
ज्ञान शंकर तिवारी
कोरबा/पाली।
जिला कोरबा की तहसील पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत चैतमा में शासकीय (राजस्व) भूमि पर अवैध कब्जा अब एक-दो मामलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संगठित और बेखौफ गतिविधि का रूप ले चुका है। स्थिति यह है कि ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बने हुए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत चैतमा में शासकीय भूमि पर कब्जा कर न केवल मकान बनाए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें खुलेआम खरीदा-बेचा भी जा रहा है। शिकायतों के बावजूद न तो अवैध निर्माण रोका जा रहा है और न ही किसी पर ठोस कार्रवाई हो रही है।
खसरा नंबर 76/1क बना अवैध निर्माण का केंद्र
ताजा मामला शासकीय भूमि खसरा नंबर 76/1क, रकबा 17.3590 हेक्टेयर का है। बताया जा रहा है कि यह भूमि पहले बेलतरा निवासी द्वारा अवैध रूप से खरीदी गई और बाद में तीसरे व्यक्ति को बेचकर कब्जा सौंप दिया गया। इसके बाद रातों-रात मकान निर्माण शुरू कर दिया गया।
सरपंच द्वारा मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रोकने को कहा गया, लेकिन इसके बावजूद निर्माण जारी है। इससे स्पष्ट है कि अवैध कब्जाधारियों को न प्रशासन का डर है और न ही कानून का।
पहले भी हो चुकी हैं शिकायतें, कार्रवाई शून्य
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पंचायत प्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने अवैध कब्जों की लिखित शिकायत तहसीलदार पाली एवं अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) पाली से की थी। बावजूद इसके अवैध निर्माण पूरे हुए और आज वहां पक्के मकान खड़े हैं।
इस निष्क्रियता ने अवैध कब्जाधारियों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं।
आरक्षित भूमि तक सुरक्षित नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि चैतमा में केवल एक ही खसरा नंबर नहीं, बल्कि
शासकीय भवन हेतु आरक्षित भूमि,
देवस्थल की जमीन,
वन विभाग के लिए आरक्षित भूमि
तक पर अवैध कब्जा कर बिक्री की जा चुकी है। हैरानी की बात यह है कि इन गंभीर मामलों में भी अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
कलेक्टर के आदेश की उड़ रही धज्जियां
कुछ समय पूर्व कलेक्टर कोरबा द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किया गया था कि सभी शासकीय भूमियों पर खसरा नंबर और रकबा सहित सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि भूमि की पहचान स्पष्ट हो सके।
लेकिन ग्राम पंचायत चैतमा में आज तक एक भी शासकीय भूमि पर बोर्ड नहीं लगाया गया, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में ग्राम पंचायत चैतमा में एक इंच भी शासकीय भूमि नहीं बचेगी।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि
तत्काल अवैध निर्माण रोका जाए,
दोषी कब्जाधारियों पर कड़ी कार्रवाई हो,
और सभी शासकीय भूमियों पर बोर्ड लगाकर भूमि को सुरक्षित किया जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि राजस्व विभाग कब जागेगा?
या फिर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?






