ट्रांसपोर्ट नगर नहर में मिला अज्ञात युवक का शव, इलाके में मचा हड़कंप, जांच में जुटी पुलिस
भिलाई। ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र स्थित नहर में एक अज्ञात युवक का शव मिलने से आज सुबह इलाके में सनसनी फैल गई। नहर किनारे टहल रहे स्थानीय लोगों ने पानी में शव को तैरते हुए देखा, जिसके बाद तुरंत खुर्शीपार थाना पुलिस को इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नहर से बाहर निकलवाकर पंचनामा कार्रवाई की। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भेज दिया है। घटना स्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। नहर किनारे शराबखोरी, कई सवाल खड़े पुलिस को जांच के दौरान नहर के आसपास शराब की खाली बोतलें भी मिली हैं। बताया जा रहा है कि यह इलाका कुछ असामाजिक तत्वों का अड्डा माना जाता है, जहां अक्सर बैठकर शराबखोरी होती है। ऐसे में युवक की मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं—क्या यह हादसा है या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश? फॉरेंसिक टीम और CCTV से सुराग तलाश मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जो हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। वहीं नहर और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि मृतक की पहचान और घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। शव की पहचान अब तक नहीं फिलहाल मृत युवक की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और गुमशुदगी के मामलों से भी मिलान किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो पाएगा। अज्ञात युवक की रहस्यमयी मौत ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है, वहीं पुलिस हर एंगल से जांच कर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है।
सेमरिया हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा: मामूली बात पर भड़की हिंसा, चाकूबाजी में युवक की मौत, 7 आरोपी गिरफ्तार
बलौदाबाजार। जिले के सेमरिया गांव में 28 दिसंबर की रात हुए जघन्य हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया, जिसमें परमेश्वर यदू नामक युवक की जान चली गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में शामिल सभी 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें 3 विधि से संघर्षरत बालक शामिल हैं। जयंती कार्यक्रम के बाद हुआ खूनी टकराव जानकारी के मुताबिक 28 दिसंबर को सेमरिया गांव में जयंती कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद परमेश्वर यदू अपने साथियों के साथ घर लौट रहा था। इसी दौरान उसकी गली के पास कुछ युवक आपस में गाली-गलौज करते हुए झगड़ रहे थे। परमेश्वर के एक साथी ने उन्हें ऐसा करने से रोका, लेकिन यही बात आरोपियों को नागवार गुजरी। गली में निकले चाकू, युवक पर जानलेवा हमला विवाद बढ़ते ही आरोपियों ने परमेश्वर यदू और उसके साथियों पर हमला कर दिया। मारपीट के दौरान कुछ आरोपियों ने चाकू निकालकर वार किए। परमेश्वर को गंभीर चोटें आईं और वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा। साथी उसे तत्काल शासकीय अस्पताल भाटापारा लेकर पहुंचे, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 24 घंटे में पुलिस की बड़ी कार्रवाई घटना के बाद सभी आरोपी फरार हो गए थे, लेकिन पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने महज 24 घंटे के भीतर सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया। जांच में सामने आया कि इस हत्या में कुल 7 लोग शामिल थे। गिरफ्तार आरोपी बाहल दास बंजारे (18 वर्ष), निवासी ग्राम बिजराडीह धनेश चेलक (20 वर्ष), निवासी ग्राम बिजराडीह धनराज बघेल (18 वर्ष), निवासी ग्राम बिजराडीह छन्नु कोसले (18 वर्ष), निवासी ग्राम बिजराडीह 03 विधि से संघर्षरत बालक सभी आरोपी थाना भाटापारा ग्रामीण क्षेत्र के निवासी हैं। जुर्म कबूल, आवेश में लिया गया खौफनाक फैसला पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि गाली देने से मना करने पर उन्हें गुस्सा आ गया और सभी ने मिलकर हाथ-मुक्कों व चाकू से हमला किया। पुलिस के अनुसार यह घटना आवेश, असंयम और कानून के प्रति लापरवाही का परिणाम है। सभी बालिग आरोपियों को 30 दिसंबर 2025 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है, जबकि नाबालिगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का सख्त संदेश एएसपी अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ पुलिस की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। समाज की शांति भंग करने और हिंसा फैलाने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि मामूली विवाद कैसे जानलेवा हिंसा में बदल जाते हैं, और संयम की कमी किस तरह पूरे परिवार को उजाड़ देती है।
रात के अंधेरे में खनन माफिया पर जिला प्रशासन की बड़ी चोट धमतरी में अवैध मुरूम और रेत परिवहन करते 3 हाईवा जब्त, मचा हड़कंप
✍️ भागीरथी यादव धमतरी। अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन धमतरी लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी कड़ी में 28 दिसंबर 2025 की रात करीब 11 बजे जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने ग्राम कलारतराई में औचक कार्रवाई कर खनन माफियाओं पर बड़ी चोट की है। रात के सन्नाटे में की गई इस अचानक जांच के दौरान खनिज मुरूम और रेत के अवैध परिवहन में लिप्त तीन हाईवा वाहनों को मौके पर ही जब्त किया गया। कार्रवाई इतनी त्वरित और सटीक थी कि अवैध परिवहन में संलिप्त लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तीन हाईवा जब्त, अलग-अलग प्रकरण दर्ज जांच में सामने आया कि दो हाईवा वाहन अवैध रूप से मुरूम का परिवहन कर रहे थे एक हाईवा वाहन बिना वैध अनुमति के रेत ले जाते हुए पकड़ा गया तीनों ही मामलों में प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। जब्त वाहनों से जुड़े संबंधित व्यक्तियों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। प्रशासन का सख्त संदेश इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अवैध खनन और परिवहन करने वालों के लिए जिले में कोई जगह नहीं है। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसी औचक और सख्त कार्रवाइयां और तेज की जाएंगी। खनन माफियाओं में हड़कंप रात के वक्त हुई इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है। प्रशासन की यह पहल न सिर्फ राजस्व की सुरक्षा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मजबूत कदम मानी जा रही है। धमतरी प्रशासन का साफ संदेश — कानून से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई तय है, रात हो या दिन, अवैध खनन बर्दाश्त नहीं।
नियम किताबों में, लूट तराजू पर — जनपद सीईओ के निरीक्षण में भी दबा सच
कैमरे के सामने उजागर हुई पहरिया धान खरीदी केंद्र की कड़वी हकीकत जांजगीर–चांपा। यह किसी आरोप की कहानी नहीं, बल्कि कैमरे में कैद वह है, जो पहरिया धान खरीदी केंद्र पर हर दिन किसानों के साथ हो रही है। यहां धान नहीं तौला जा रहा — किसानों का हक तौला जा रहा है। शासन-प्रशासन के स्पष्ट नियम कहते हैं कि धान खरीदी में 40 किलो 680 ग्राम (धान + बोरा) की तौल होनी चाहिए, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कैमरे के सामने 3–4 बोरों की तौल हुई और एक भी बोरा नियम के अनुसार नहीं निकला। हर बोरे में 900 ग्राम से 1 किलो 110 ग्राम तक की खुली कटौती पाई गई। यह कोई तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक लूट का साफ सबूत है। सुरक्षा राशि, पर सुरक्षा नदारद धान खरीदी केंद्र को ₹2.40 प्रति क्विंटल सुरक्षा राशि दी जाती है, लेकिन केंद्र पर न कोई गार्ड दिखा, न हमाल, न ही बुनियादी व्यवस्था। जब इस पर सवाल किया गया तो धान खरीदी प्रभारी जवाब देने से बचते नजर आए, जबकि उनके सहयोगी पत्रकारों पर ही भड़क उठे। यहां तक कहा गया — “क्या मंडी प्रभारी अपना घर या खेत बेचकर पूर्ति करे?” यानी सवाल किसानों की लूट पर नहीं, सवाल उठाने वालों पर! कागज में नियम, जमीन पर नियमों की कब्र धान की चट्टा व्यवस्था में जहां दो लेयर अनिवार्य हैं, वहां केवल एक लेयर दिखाई दी। बाहर दिखावे की भूसी, अंदर नियमों की धज्जियां। कागजों में सब कुछ सही — लेकिन हकीकत में सब कुछ फेल। किसान नहीं, मजदूर बना दिया गया यहां किसान सिर्फ किसान नहीं रह गया, उसे मजदूर बना दिया गया है। धान पलटना बोरा सिलाई तौल सब काम किसान खुद कर रहा है। एक किसान बताता है — “मजदूर साथ लाना पड़ा, मजदूरी भी खुद देनी पड़ी, तब जाकर तौल हो पाई।” निरीक्षण या दिखावा? धान खरीदी प्रभारी का दावा है कि जनपद सीईओ बलौदा निरीक्षण पर आए थे, लेकिन उन्हें कोई गड़बड़ी नजर नहीं आई। अब सवाल साफ है — निरीक्षण था या सिर्फ औपचारिकता? आंखें बंद थीं या सच्चाई जानबूझकर छुपाई गई? जब प्रभारी जयप्रकाश सिंह से जवाब मांगा गया तो उन्होंने केवल “सूखती के नाम पर 900 ग्राम से 1 किलो 110 ग्राम” कहकर बाकी सवालों से किनारा कर लिया। सवाल सिस्टम से है अगर अब भी इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो मान लेना चाहिए कि किसानों की इस लूट में सिस्टम खुद कटघरे में खड़ा है। कैमरा बोलेगा, सवाल जिंदा रहेंगे। अब सबसे बड़ा सवाल — क्या भोले-भाले किसानों को न्याय मिलेगा? या यूं ही नियमों के खिलाफ धान खरीदी कर उनका शोषण होता रहेगा? क्या जिम्मेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह लूट यूं ही जारी रहेगी? किसानों का सब्र टूट रहा है, अब जवाब चाहिए — सिर्फ आश्वासन नहीं।
छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की आवाज बना ‘सर्व पत्रकार एकता महासंघ’, अधिकार और सुरक्षा को लेकर जमीनी स्तर पर सक्रिय
कोरबा | पाली से ज्ञान शंकर तिवारी की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के क्षेत्र में एक नई उम्मीद और मजबूत मंच के रूप में सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह संगठन न केवल पत्रकारों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है, बल्कि असहाय, पीड़ित और जरूरतमंद लोगों के लिए भी सहारा बनकर सामने आया है। कोरबा जिले में निवासरत महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे ने बताया कि सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ का उद्देश्य पत्रकारों को एकजुट करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और पत्रकार सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार प्रयास करना है। संगठन राज्यभर में सक्रिय होकर पत्रकारों से जुड़े शोषण, बेरोजगारी और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहा है। पत्रकारों को जोड़ने और सशक्त करने का संकल्प प्रदेशाध्यक्ष बंजारे ने बताया कि महासंघ पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराता है, जहां वे अपनी समस्याओं को खुलकर रख सकें और समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयास कर सकें। संगठन का फोकस केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के उन वर्गों तक भी पहुंचना है जो असहाय और पीड़ित हैं। महासंघ के प्रमुख उद्देश्य पत्रकारों के बीच एकता और संगठनात्मक मजबूती पत्रकारों के शोषण और उत्पीड़न को रोकना बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना असहाय और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने में सहयोग पत्रकारों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ना जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्य सर्व पत्रकार एकता महासंघ द्वारा समय-समय पर सामूहिक बैठकें, पत्रकार सम्मान समारोह और सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कोरबा जिले में संगठन की सक्रियता लगातार बढ़ रही है और अब अन्य जिलों से भी पत्रकार इससे जुड़ रहे हैं, जिससे महासंघ को नई ऊर्जा और मजबूती मिल रही है। छत्तीसगढ़ में सकारात्मक बदलाव की दिशा में पहल महासंघ का मानना है कि सशक्त और सुरक्षित पत्रकारिता ही लोकतंत्र की मजबूत नींव है। इसी सोच के साथ संगठन छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की आवाज को मजबूती देने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ आज न सिर्फ पत्रकारों का संगठन है, बल्कि न्याय, एकता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
डोंगरगढ़ में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म: आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
✍️ भागीरथी यादव डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करने वाला मामला सामने आया है। शादी का झांसा देकर एक युवक ने युवती के साथ बार-बार दुष्कर्म किया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। 2019 से जान-पहचान, भरोसे का उठाया गया गलत फायदा पीड़िता ने 22 दिसंबर 2025 को थाना डोंगरगढ़ पहुंचकर दर्ज कराई शिकायत में बताया कि उसकी पहचान वर्ष 2019 में नीरज देवांगन, निवासी मोतीपुर नवागांव, से हुई थी। बातचीत के दौरान आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी भरोसे पर उसके साथ नजदीकियां बढ़ाईं। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने शादी का झांसा देकर अलग-अलग मौकों पर, विशेषकर डोंगरगढ़ स्थित एक लॉज में, जबरन शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया, जिसके बाद पीड़िता ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई, आरोपी ने किया अपराध स्वीकार शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन में आरोपी को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने आरोपी नीरज देवांगन पिता अगनू राम देवांगन (उम्र 25 वर्ष) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया और उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। महिला अपराधों पर जीरो टॉलरेंस पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। डोंगरगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
गरियाबंद में सनसनीखेज हत्या का खुलासा: 24 घंटे में 11 आरोपी गिरफ्तार, पुरानी रंजिश में युवक की पीट-पीटकर हत्या
✍️ भागीरथी यादव राजिम। गरियाबंद जिले के ग्राम देवरी में हुई नृशंस हत्या की गुत्थी पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर सुलझा ली। पुरानी रंजिश के चलते लाठी-डंडे और पत्थरों से युवक को बेरहमी से पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया था। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिससे क्षेत्र में दहशत फैलाने वालों को कड़ा संदेश मिला है। सड़क किनारे मिली थी युवक की लाश, फैली थी सनसनी घटना उस समय सामने आई जब देवरी गांव में सड़क किनारे एक युवक की संदिग्ध हालत में लाश मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मृतक की पहचान हितेश तारक उर्फ चंदू तारक के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार मृतक आदतन अपराधी था। उसके खिलाफ मारपीट और चोरी के 8 आपराधिक मामले, साथ ही 9 प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां थाना राजिम में दर्ज थीं। पुरानी रंजिश ने लिया खौफनाक रूप जांच में सामने आया कि मृतक और आरोपियों के बीच पुरानी दुश्मनी थी। इसी रंजिश के चलते 11 लोगों ने एकजुट होकर युवक पर लाठी-डंडों और पत्थरों से जानलेवा हमला किया। मारपीट के बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना को हादसा दिखाने के इरादे से आरोपियों ने शव को सड़क किनारे फेंक दिया। 24 घंटे में पुलिस की बड़ी सफलता मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित कर तकनीकी साक्ष्य, मुखबिर तंत्र और पूछताछ के आधार पर सभी आरोपियों को चिन्हित कर लिया। दबिश देकर सभी 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। इलाके में पुलिस की सख्ती का संदेश पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जिले में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। इस त्वरित कार्रवाई से स्पष्ट है कि अपराध कर बच निकलने की कोई गुंजाइश नहीं। गरियाबंद पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ बड़ी सफलता है, बल्कि अपराधियों के लिए कड़ा चेतावनी संदेश भी है।
दुर्ग पुलिस की बड़ी कामयाबी: दो थाना क्षेत्रों की चोरी का खुलासा, 4 शातिर आरोपी सलाखों के पीछे
✍️ भागीरथी यादव दुर्ग। जिले में बढ़ती चोरी की वारदातों पर दुर्ग पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई चोरियों का खुलासा कर दिया है। थाना पुरानी भिलाई और जामुल पुलिस की संयुक्त सतर्कता और तेज़ विवेचना के चलते कुल चार शातिर चोरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, वहीं लाखों रुपये की चोरी गई संपत्ति भी बरामद की गई है। मोबाइल दुकान में सेंध: शटर तोड़कर 40 हजार की चोरी, दो आरोपी गिरफ्तार पहला मामला थाना पुरानी भिलाई क्षेत्र का है। 5 जुलाई 2025 को ट्रांसपोर्ट नगर हथखोज स्थित एक मोबाइल दुकान में अज्ञात चोरों ने शटर तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। चोर दुकान से कीपैड मोबाइल, एयर बर्ड, पुराने इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और दराज व गुल्लक में रखी नगदी सहित करीब 40 हजार रुपये लेकर फरार हो गए थे। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि खुर्सीपार निवासी कुलदीप कौशिक चोरी के मोबाइल बेचने की फिराक में है। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपने साथी विराज निर्मलकर के साथ मिलकर चोरी करना स्वीकार किया। आरोपियों के कब्जे से 6 कीपैड मोबाइल और 2 एयर बर्ड बरामद किए गए, जबकि नगदी खर्च हो जाना बताया गया। दोनों आरोपियों को 29 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। सूने मकान पर हाथ साफ: 1.83 लाख की चोरी का पर्दाफाश दूसरा मामला थाना जामुल क्षेत्र का है। शंकर नगर छावनी स्थित एक सूने मकान में चोरी की वारदात सामने आई थी। प्रार्थी पुरेंद्र कुमार साहू ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह पत्नी के इलाज के लिए रायपुर गए थे। वापस लौटने पर घर में रखे सोने-चांदी के जेवरात, चांदी के सिक्के और नगदी गायब मिले। मुखबिर की सूचना और संदिग्धों के हुलिए के आधार पर पुलिस ने खुर्सीपार निवासी कुलदीप सिंह उर्फ बी. कुलदीप और एस. विनय उर्फ बुल्लू को हिरासत में लिया। पूछताछ में दोनों ने चोरी की वारदात स्वीकार कर ली। आरोपियों के पास से सोने की अंगूठी, टॉप्स, 9 चांदी के सिक्के, चांदी की बिछिया सहित कुल 1,83,500 रुपये की संपत्ति बरामद की गई। दोनों को 29 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर केन्द्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। अन्य मामलों में भी बढ़ेगी कार्रवाई दुर्ग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वर्ष के शेष बचे मामलों में भी आरोपियों की पतासाजी लगातार जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में कड़ियां जुड़ रही हैं, उनमें जल्द गिरफ्तारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि इस वर्ष के अधिकांश पेंडिंग मामले सुलझा लिए गए हैं, और साल के अंतिम दो दिनों में भी अन्य मामलों में बड़ी कार्रवाई संभव है। दुर्ग पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के लिए साफ संदेश है—चोरी और अपराध करने वालों के लिए जिले में कोई जगह नहीं।
घटिया सीसी रोड निर्माण ने उजागर की पंचायत से प्रशासन तक की कार्यप्रणाली
✍️ भागीरथी यादव विकास के नाम पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और मिलीभगत का आरोप कोरबा/पाली। विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हुए विकासखंड पाली के अंतर्गत ग्राम पंचायत मादन से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां मुख्य मार्ग से बस्ती की ओर बन रही सीसी रोड ग्रामीणों के लिए सुविधा बनने से पहले ही भ्रष्टाचार और लापरवाही की तस्वीर बनती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के शुरुआती चरण में ही सड़क की हालत देखकर इसके टिकाऊ होने पर संदेह गहराने लगा है। जिस सड़क से बरसात में राहत, सुगम आवागमन और गांव के विकास की उम्मीद थी, वही सड़क अब घटिया निर्माण की मिसाल बनकर पंचायत से लेकर प्रशासन तक की कार्यप्रणाली को उजागर कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। न तो सड़क की मोटाई का ध्यान रखा गया, न ही बेस तैयार करने और क्योरिंग जैसे अनिवार्य नियमों का पालन किया जा रहा है। मिलर मशीन से जल्दबाजी में कंक्रीट डालकर काम निपटाया जा रहा है, जिससे सड़क की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मानकों को दरकिनार कर हो रहा निर्माण स्थानीय लोगों के अनुसार सीमेंट, गिट्टी और रेत का अनुपात नियमों के अनुरूप नहीं रखा जा रहा। ढलाई से पहले न तो मजबूत बेस बनाया गया और न ही बाद में उचित क्योरिंग की व्यवस्था की गई। नतीजा यह है कि सड़क की ऊपरी परत निर्माण के दौरान ही कमजोर दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गुणवत्ता जांच के बिना ही काम को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और गहरी हो गई है। मशीनों से काम, ग्रामीणों का रोजगार छीना ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जहां हाथ से काम कराकर स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सकता था, वहां मशीनों का इस्तेमाल कर दिया गया। मनरेगा और रोजगारपरक योजनाओं की भावना के विपरीत यह कार्यवाही ग्रामीण मजदूरों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है। लोगों का कहना है कि ऐसा विकास, जो रोजगार छीन ले, वह विकास नहीं बल्कि शोषण है। बनी नहीं सड़क, तोड़ने की तैयारी सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सड़क पूरी तरह बनने से पहले ही पाइपलाइन बिछाने के नाम पर कोर कटिंग की तैयारी शुरू कर दी गई है। यानी सड़क बनते ही उसे तोड़ने की योजना तैयार है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि योजना निर्माण और क्रियान्वयन में भारी लापरवाही बरती गई है या फिर यह सब पहले से तय रणनीति का हिस्सा है। ग्रामीणों को आशंका है कि कुछ ही महीनों में यह सड़क गड्ढों में तब्दील हो जाएगी और फिर मरम्मत के नाम पर दोबारा सरकारी राशि खर्च की जाएगी। शिकायतों के बावजूद प्रशासन मौन ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में हो रही अनियमितताओं की शिकायतें कई बार संबंधित अधिकारियों से की गईं, लेकिन न तो काम रोका गया और न ही कोई जांच शुरू हुई। अधिकारियों की चुप्पी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े भ्रष्टाचार का उदाहरण बन जाएगा। ठेकेदार की राजनीतिक पहुंच की चर्चा ग्रामीणों के मुताबिक संबंधित ठेकेदार खुलेआम विधायक और मंत्री तक पहुंच होने की धौंस देता है। शिकायत करने पर ठेकेदार बेखौफ नजर आता है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। बताया जा रहा है कि इससे पहले तेंदूपारा क्षेत्र में इसी ठेकेदार द्वारा बनाई गई सीसी रोड के उखड़ने की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरपंच-सचिव की भूमिका संदेह के घेरे में निर्माण की निगरानी की जिम्मेदारी जिन सरपंच और सचिव पर है, उनके कार्यस्थल पर न पहुंचने के आरोप भी लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गुणवत्ता की बजाय कथित कमीशन को प्राथमिकता दी जा रही है, इसी कारण घटिया सामग्री और अधूरी क्योरिंग खुलेआम हो रही है। स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांग ग्राम पंचायत मादन के ग्रामीणों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही दोषी ठेकेदार, संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण मानकों के अनुरूप दोबारा कराया जाए, ताकि आने वाले वर्षों तक गांव को इसका वास्तविक लाभ मिल सके। ग्रामीणों की यह आवाज अब केवल एक गांव की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सीधा सवाल है, जो विकास के नाम पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और इस…
खैरागढ़ | मानपुर नाका से सनसनीखेज घटना
✍️ भागीरथी यादव शनिवार सुबह मानपुर नाका क्षेत्र उस समय दहशत में डूब गया, जब एक खेत में रखे पैरा (भूसा) के ढेर से धुआं उठता दिखाई दिया। आग की लपटें देखकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो पैरा के भीतर एक वृद्ध का जला हुआ शव नजर आया। यह दृश्य देखते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाया गया, जिसके बाद पैरा के ढेर के बीच से शव निकाला गया। घटनास्थल पर मिली छड़ी और अन्य पहचान संबंधी तथ्यों के आधार पर मृतक की पहचान दुर्जनराम वर्मा (95 वर्ष), पिता स्व. धरसिया वर्मा, निवासी मानपुर नाका क्षेत्र के रूप में की गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, दुर्जनराम वर्मा अक्सर उसी खेत के आसपास रहते थे, जहां पैरा का ढेर रखा हुआ था। ऐसे में यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर आग कैसे लगी और वृद्ध पैरा के भीतर कैसे पहुंचे। यह हादसा था, लापरवाही या फिर इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश—इन तमाम बिंदुओं ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। पुलिस ने घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण कर अहम साक्ष्य जुटाए हैं और हर संभावित एंगल से जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। इस घटना के बाद मानपुर नाका और आसपास के गांवों में भय और अनिश्चितता का माहौल है। ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जबकि पुलिस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है।
















