भाई ने छीना बहन का हक, न्याय की चौखट पर पहुंची बेबस पीड़िता

✍️ भागीरथी यादव   बिलासपुर। रिश्तों की डोर जब स्वार्थ और लालच से उलझ जाए, तो खून के रिश्ते भी बोझ बन जाते हैं। ऐसा ही एक मार्मिक मामला बिलासपुर जिले से सामने आया है, जहां एक सगी बहन को अपने ही भाई से न्याय की गुहार लगानी पड़ी। कोटा नगर पंचायत निवासी श्रीमती गनेशिया बाई बिंझवार आज अपनी पैतृक जमीन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि आरोप है कि उनके सगे भाई ने ही उनके हक पर डाका डाल दिया। तखतपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कोड़ापुरी में स्थित लगभग पौने दो एकड़ पैतृक भूमि, जो विधिवत पारिवारिक बंटवारे में गनेशिया बाई के हिस्से में आई थी, आज उनके हाथों से फिसलती नजर आ रही है। पीड़िता का कहना है कि गांव में कम आना-जाना होने का फायदा उठाकर उनके भाई धनवान सिंह बिंझवार ने जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया और उसे खेत में तब्दील कर फसल भी बो दी। जब बहन ने अपने अधिकार की बात उठाई, तो भाई ने न सिर्फ जमीन लौटाने से इनकार कर दिया, बल्कि धमकियों का सहारा लेकर उसे चुप कराने की कोशिश भी की। इस अन्याय ने गनेशिया बाई को अंदर तक तोड़ दिया। मानसिक पीड़ा, सामाजिक अपमान और आर्थिक नुकसान के बीच वह खुद को असहाय महसूस करने लगीं। आखिरकार हिम्मत जुटाकर उन्होंने सामाजिक संगठन आज़ाद युवा संगठन के प्रमुख इशहाक कुरैशी से संपर्क किया। संगठन के सहयोग से पीड़िता जिला कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की शरण में पहुंचीं, जहां उन्होंने लिखित ज्ञापन सौंपकर अपने हक की गुहार लगाई। ज्ञापन में अवैध कब्जा हटाने, जमीन वापस दिलाने और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए जिला कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लिया और संबंधित एसडीएम से चर्चा कर शीघ्र जांच व उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रशासन की इस तत्परता से गनेशिया बाई की आंखों में उम्मीद की एक नई चमक दिखाई देने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे पारिवारिक विवादों में अक्सर महिलाएं और कमजोर वर्ग ही सबसे ज्यादा पीड़ित होते हैं। समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप ही उन्हें न्याय दिला सकता है। अब सबकी नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि एक बहन को उसका छीना हुआ हक वापस मिल सके और रिश्तों पर लगे इस दाग को इंसाफ से धोया जा सके।

कोरबा में वन कटाई को लेकर बवाल, ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन, 50 पर दर्ज हुआ मामला

  कोरबा, 22 दिसंबर।: बनमंडल कोरबा अंतर्गत कोलगा क्षेत्र में कूप कटाई के नाम पर बड़े पैमाने पर जंगल साफ किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वन विभाग की कार्रवाई और पुलिस में दर्ज प्रकरण के विरोध में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपना आक्रोश जाहिर किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कूप कटाई की आड़ में हरे-भरे जंगल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण असंतुलन के साथ-साथ कोलगा गुफा जैसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर को भी क्षति पहुंची है। ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील है और यहां किसी भी प्रकार की अंधाधुंध कटाई भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। बीते दिनों इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग की टीम के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। आक्रोशित ग्रामीणों ने कटाई में उपयोग किए जा रहे औजार जब्त कर लिए थे। इसके बाद वन विभाग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर लगभग 50 ग्रामीणों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में नाराजगी और बढ़ गई है। मामले को लेकर कोलगा के जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला प्रशासन के साप्ताहिक जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने वन विभाग पर मनमानी का आरोप लगाते हुए दर्ज किए गए सभी मामलों को वापस लेने की मांग की है। ग्रामीण चंद्रशेखर सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी कोयला सर्वेक्षण को लेकर क्षेत्र में विवाद हो चुका है और वे जंगल कटाई को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जंगल ही उनकी आजीविका और पर्यावरण सुरक्षा का आधार है। वहीं, वन विभाग का पक्ष है कि संबंधित क्षेत्र में शासन की अनुमति के तहत केवल अनुपयोगी और चिन्हित पेड़ों की ही कटाई की जा रही है। विभाग का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जा रही है और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर विचाराधीन है। जिला प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायत पर जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

दमोह में 18 वर्षीय दलित युवक की आत्महत्या से मचा हड़कंप, सुसाइड वीडियो ने खड़े किए पुलिस पर गंभीर सवाल

  दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले से सामने आए एक सनसनीखेज आत्महत्या मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। हटा थाना क्षेत्र के गढ़िया गांव में रहने वाले 18 वर्षीय दलित युवक रीतेश बंसल ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले उसने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने पुलिस पर झूठी शिकायत के आधार पर डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो सामने आते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। रीतेश की मौत के बाद जहां पुलिस कटघरे में खड़ी नजर आ रही है, वहीं मृतक के परिजन न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की धमकियों और सामाजिक बदनामी के डर ने उनके बेटे को मौत के मुंह में धकेल दिया। एक मामूली घटना, और टूट गया पूरा भविष्य परिजनों और मृतक के दोस्त के अनुसार, दो दिन पहले रीतेश अपने दोस्त श्रीराम के साथ हटा गया था। लौटते समय हारट के पास स्कूल से लौट रही दो छात्राओं से बाइक हल्की टकरा गई। दोनों युवकों ने तुरंत माफी मांगी और आसपास मौजूद लोगों ने भी समझाइश दी। मामला वहीं शांत हो सकता था, लेकिन छात्राओं ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस बुला ली। पुलिस के पहुंचने पर रीतेश का दोस्त मौके से चला गया, जबकि रीतेश वहीं रुक गया। कुछ देर बाद वह घर लौट आया, लेकिन परिवार का कहना है कि उसी दिन पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे और उसे जेल भेजने, घर पर बुलडोजर चलवाने जैसी धमकियां दी गईं। इस घटनाक्रम से रीतेश बुरी तरह डर गया। डर, बदनामी और बेबसी… और फिर मौत परिजनों का कहना है कि रीतेश को अपने घर के उजड़ने और समाज में बदनामी का डर सताने लगा था। इसी मानसिक दबाव में उसने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। उसकी मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया वीडियो इस बात की गवाही देता है, जिसमें उसने साफ तौर पर पुलिस की धमकी और झूठी शिकायत को अपनी मौत की वजह बताया है। दो दिन तक कार्रवाई नहीं, फूटा परिजनों का गुस्सा रीतेश का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन दो दिन बीत जाने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आक्रोशित परिजनों ने हटा थाना के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सड़क जाम करने की भी कोशिश की गई, हालांकि बाद में पुलिस की समझाइश के बाद स्थिति शांत हुई। जांच के घेरे में पुलिस इस मामले में पुलिस अब बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत भदौरिया ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर जांच शुरू कर दी गई है। वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता की भी पुष्टि कराई जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि दो दिन पहले डायल 112 पर कॉल आया था और पुलिस मौके पर पहुंची थी, लेकिन युवक ने आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाया, इसकी गहन जांच की जा रही है। एडिशनल एसपी ने कहा कि यह भी जांच की जा रही है कि रीतेश के घर कौन-कौन से पुलिसकर्मी गए थे और उनके बीच क्या बातचीत हुई थी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। न्याय की मांग, सिस्टम पर सवाल इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवा जीवन का यूं खत्म हो जाना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं—क्या रीतेश को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

सुकमा में नक्सल नेटवर्क पर करारा प्रहार, जंगल के भीतर छिपी माओवादियों की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ध्वस्त

✍️ भागीरथी यादव   सुकमा। नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षाबलों ने माओवादियों के खिलाफ बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए उनकी अवैध ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों की आड़ में संचालित यह फैक्ट्री नक्सल हिंसा की रीढ़ मानी जा रही थी, जहां से हथियार और विस्फोटक बनाकर नक्सली दस्तों तक पहुंचाए जा रहे थे। यह बड़ी सफलता 21 दिसंबर 2025 को सुकमा जिले में चलाए जा रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशन के तहत मिली। G/F कंपनी 150वीं बटालियन सीआरपीएफ और जिला पुलिस बल सुकमा की संयुक्त टीम ने पुख्ता खुफिया सूचना के आधार पर ग्राम मीनागट्टा क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। अभियान के दौरान जंगल के भीतर पहाड़ी इलाके में छिपाकर बनाई गई नक्सलियों की हथियार निर्माण फैक्ट्री का खुलासा हुआ। सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर फैक्ट्री को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया। हथियारों और विस्फोटकों का बड़ा जखीरा बरामद ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से सुरक्षा बलों को भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और निर्माण उपकरण मिले हैं, जिनमें— 8 सिंगल शॉट राइफल 12 बोर के 15 कारतूस 5 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर 30 मीटर कॉर्डेक्स वायर 30 मीटर सेफ्टी फ्यूज 2 किलोग्राम पीईके विस्फोटक 1 किलोग्राम एएनएफओ विस्फोटक 10 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट 8 वायरलेस वीएचएफ सेट हथियार बनाने की मशीनें, गन पार्ट्स नक्सली वर्दी व वर्दी निर्माण सामग्री मल्टीमीटर, वेल्डिंग मशीन, कटर मशीन प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस फैक्ट्री से क्षेत्र में सक्रिय नक्सली दस्तों को लगातार हथियार और विस्फोटक सप्लाई किए जा रहे थे, ताकि सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाया जा सके और इलाके में दहशत कायम रखी जा सके। एसपी किरण चव्हाण बोले— शांति और विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने इस कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा— “सुकमा पुलिस और सुरक्षा बल बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। नक्सलियों की हिंसक विचारधारा और उनके सप्लाई नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेंगे।” आंकड़े बताते हैं— दबाव में नक्सली संगठन पुलिस आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 से अब तक सुकमा जिले में 599 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, 460 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 71 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि सुरक्षाबलों की सख्त कार्रवाई से नक्सली संगठन कमजोर पड़ता जा रहा है। हिंसा छोड़ें, मुख्यधारा से जुड़ें— एसपी की अपील एसपी किरण चव्हाण ने नक्सलियों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास का मार्ग अपनाएं तथा ‘पूना मार्गेम पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटें। सुकमा में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के ध्वस्त होने से माओवादियों की कमर टूटती नजर आ रही है और बस्तर में स्थायी शांति की दिशा में यह कार्रवाई एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

ड्यूटी का फर्ज निभाते हुए बुझ गया घर का चिराग, PSP योजना ने थामा परिवार का सहारा

✍️ भागीरथी यादव    दुर्ग। तालाब में डूबने से आरक्षक की असामयिक मौत ने पूरे पुलिस महकमे को शोक में डुबो दिया। परिवार का एकमात्र सहारा छिन जाने के बाद गहरे दुख में डूबे परिजनों के लिए पुलिस सैलरी पैकेज (PSP) योजना राहत की किरण बनकर सामने आई। भारतीय स्टेट बैंक और पुलिस विभाग के संयुक्त प्रयास से शहीद आरक्षक के परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। जिला दुर्ग में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 776 विक्रम सिंह का 4 मई 2018 को एक दुर्घटना में दुखद निधन हो गया था। बेटे को खोने का दर्द झेल रहीं उनकी माता सरोज ठाकुर की आंखें उस वक्त नम हो गईं, जब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल, एसबीआई क्षेत्रीय प्रबंधक रूपक मंडल और आदर्श नगर शाखा प्रबंधक विनीता कोसरिया ने उन्हें एक करोड़ रुपये का चेक सौंपा। यह सहायता राशि पुलिस विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच हुए एमओयू के तहत पुलिस सैलरी पैकेज योजना से प्राप्त हुई है। इस योजना का उद्देश्य ड्यूटी के दौरान या दुर्घटना में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि परिवार को कमाऊ सदस्य के न रहने का बोझ अकेले न उठाना पड़े। एसएसपी विजय अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि, “पुलिसकर्मी समाज और कानून की रक्षा करते हुए कई बार अपने प्राणों की आहुति दे देते हैं। ऐसी योजनाएं उनके परिवारों को यह भरोसा देती हैं कि वे अकेले नहीं हैं।” भारतीय स्टेट बैंक द्वारा संचालित इस योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु, स्थायी पूर्ण विकलांगता अथवा आंशिक विकलांगता की स्थिति में अलग-अलग बीमा राशि देने का प्रावधान है। यह योजना उन परिवारों के लिए संबल बनती है, जिनके जीवन में अचानक अंधेरा छा जाता है। आरक्षक विक्रम सिंह तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी सेवा, कर्तव्यनिष्ठा और पुलिस विभाग की यह संवेदनशील पहल उनके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास जरूर कर रही है।

बुर्का पहनकर बना चोरी का हथियार, CCTV ने खोला राज — ज्वेलरी शोरूम में सेंधमारी करने वाला आरोपी गिरफ्तार

  शहर में फिल्मी अंदाज़ में चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले शातिर आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने पहचान छिपाने के लिए बुर्का पहन रखा था और कटर ड्रिल मशीन के साथ जगदंबा आभूषण भंडार में चोरी करने घुसा था। पूरी घटना शोरूम में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसका वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। जानकारी के अनुसार, 14 दिसंबर की रात आरोपी कटर ड्रिल मशीन लेकर ज्वेलरी शॉप में दाखिल हुआ। वह तिजोरी और शटर काटने की कोशिश कर ही रहा था कि अचानक शोर होने पर घबरा गया और मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम सक्रिय हो गई। जांच के दौरान पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। लगातार तकनीकी विश्लेषण और कड़ी मेहनत के बाद पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। अंततः आकाश अग्रवाल उर्फ कल्लू को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के कब्जे से कटर ड्रिल मशीन सहित चोरी में इस्तेमाल किया गया अन्य सामान भी बरामद किया गया है। पुलिस फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसके पीछे कोई गिरोह तो सक्रिय नहीं है। इस कार्रवाई से पुलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे जितनी भी चालाकी कर लें, कानून की नजर से बच पाना नामुमकिन है।  

मजदूरी की तलाश में गया था, शक की भीड़ ने छीन ली जिंदगी

  सक्ती (छत्तीसगढ़)। अधूरे घर को पूरा करने और बच्चों का भविष्य संवारने का सपना लेकर केरल गया सक्ती जिले के करही गांव का रामनारायण बघेल (31) अब कभी लौटकर नहीं आएगा। बांग्लादेशी घुसपैठिया समझकर भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला। पलक्कड़ में हुई इस अमानवीय घटना ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। मौत की खबर गांव पहुंचते ही मातम छा गया। मां बेसुध है, पत्नी विधवा हो गई और दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। जिस मकान को पूरा करने वह गया था, वह आज भी अधूरा खड़ा है। पोस्टमार्टम में शरीर पर 80 से ज्यादा चोटों के निशान मिले हैं। केरल पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन परिजन इसे मॉब लिंचिंग का मामला बताकर न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। यह घटना सिर्फ एक मजदूर की हत्या नहीं, बल्कि प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर गहरा सवाल है।

कोरबा वन मंडल में ‘खूनी हाथी’ का तांडव, ड्रोन से 24 घंटे निगरानी

  कोरबा में ‘मौत का हाथी’ बना दहशत का कारण, 3 जानें लेने के बाद 40 गांवों में खौफ कोरबा। कोरबा वन मंडल में एक नर हाथी ग्रामीणों के लिए भय का पर्याय बन गया है। बीते कुछ दिनों में तीन लोगों की जान लेने के बाद यह हाथी लगातार अलग-अलग वन क्षेत्रों और गांवों के आसपास विचरण कर रहा है, जिससे जिले के दर्जनों गांवों में दहशत का माहौल है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण रात-रात भर जागकर अपने परिवार और खेतों की सुरक्षा करने को मजबूर हैं। जानकारी के अनुसार, यह हाथी पहले बिलासपुर रेंज में एक महिला को कुचलने के बाद कटघोरा वन मंडल पहुंचा, जहां इसने दो और महिलाओं की जान ले ली। इसके बाद हाथी कोरबा शहर से सटे बालको रेंज में भी सक्रिय रहा, जहां एक ग्रामीण की मौत हुई। लगातार घटनाओं के बाद हाथी की मौजूदगी से पूरे इलाके में भय व्याप्त हो गया है। वर्तमान में हाथी करतला रेंज के सुईयारा जंगल के बड़मार बीट में डेरा डाले हुए है। बताया जा रहा है कि हाथी ने पिछले 72 घंटों में करीब 75 किलोमीटर की दूरी तय की है और लगभग 40 गांवों से होकर गुजरा है। उसका रास्ता खेतों और आबादी वाले इलाकों से होकर निकल रहा है, जिससे खतरा और बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग अलर्ट मोड पर है। दो विशेष टीमों को तैनात कर हाथी की 24 घंटे ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। वन विभाग लगातार ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल की ओर न जाने की अपील कर रहा है। कोरबा में यह नर हाथी अब सिर्फ एक वन्यजीव नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए डर और अनिश्चितता का प्रतीक बन चुका है।

मुख्यमंत्री साय की बड़ी सौगात: कुनकुरी को 107 करोड़ से बदलेगा विकास का चेहरा

✍️ भागीरथी यादव   जशपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन के दो वर्षों में विकास ने नई रफ्तार पकड़ी है। इसी कड़ी में जशपुर जिले के कुनकुरी नगर पंचायत क्षेत्र को 107 करोड़ 32 लाख रुपये की ऐतिहासिक विकास योजनाओं की मंजूरी मिली है, जिससे नगर का समग्र कायाकल्प होगा। कुनकुरी में 63.84 करोड़ रुपये से इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, 7.26 करोड़ से हाई-टेक बस स्टैंड, 6.67 करोड़ से आधुनिक ऑडिटोरियम, 5.17 करोड़ से छठ घाट का विकास और 4.37 करोड़ से नालंदा परिसर का विस्तार किया जाएगा। स्वास्थ्य सुविधाओं को सशक्त करने के लिए 2.62 करोड़ की लागत से नेचुरोपैथी भवन, बच्चों के लिए 1.02 करोड़ का चिल्ड्रन पार्क तथा वार्डों में 6 करोड़ से एलईडी स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्य होंगे। इन योजनाओं से कुनकुरी नगर में खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, पर्यटन और नागरिक सुविधाओं को नया आयाम मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री साय के सुशासन में कुनकुरी विकास और भविष्य की मजबूत मिसाल बनकर उभर रहा है।

NH-43 पर रफ्तार का कहर: बाइक–स्कॉर्पियो की भीषण टक्कर, दो युवकों की मौके पर मौत

  जशपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में तेज रफ्तार ने एक बार फिर दो जिंदगियों को लील लिया। पत्थलगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाईवे-43 पर रविवार को हुए एक दिल दहला देने वाले सड़क हादसे में बाइक सवार दो युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण दुर्घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। आमने-सामने की टक्कर से मची तबाही यह हादसा NH-43 पर कछार गांव के पास उस समय हुआ, जब तेज रफ्तार बाइक और स्कॉर्पियो आमने-सामने टकरा गईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों युवक कई फीट दूर सड़क पर जा गिरे। मौके पर ही बुझ गईं दो जिंदगियां हादसे में बाइक पर सवार दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। गंभीर चोटों के कारण उन्हें बचाने का कोई मौका नहीं मिल सका। घटना के बाद सड़क पर खून और मलबा बिखरा देख राहगीरों की रूह कांप उठी। स्कॉर्पियो सवार गंभीर घायल दुर्घटना में स्कॉर्पियो में सवार दो लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को तत्काल सिविल अस्पताल पत्थलगांव पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। जांच में जुटी पुलिस, रफ्तार पर सवाल सूचना मिलते ही पत्थलगांव पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को संभाला। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। हाईवे पर थमा यातायात, फिर बहाल हादसे के बाद NH-43 पर कुछ समय तक यातायात बाधित रहा। पुलिस की कार्रवाई के बाद मार्ग को पुनः सुचारु किया गया। यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार के खतरों की चेतावनी देता है—कि जरा सी लापरवाही पल भर में जिंदगी को मौत में बदल सकती है।

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