कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन की पहल से भिलाई खुर्द के 300 भूविस्थापितों को मिला न्याय

एसईसीएल ने मकानों के मुआवजे व बसाहट के लिए प्रति परिवार 6.78 लाख देने पर दी सहमति कोरबा। कैबिनेट मंत्री एवं कोरबा नगर विधायक श्री लखन लाल देवांगन की पहल पर मानिकपुर खदान क्षेत्र के ग्राम भिलाई खुर्द के लगभग 300 भूविस्थापित परिवारों के मुआवजे का रास्ता आखिरकार खुल गया है। वर्षों से लंबित इस मामले में एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) ने मकानों के मुआवजे, बसाहट एवं शिफ्टिंग सहायता देने पर लिखित सहमति प्रदान की है। शुक्रवार को एसईसीएल विश्राम गृह, कोरबा में आयोजित बैठक में मंत्री श्री देवांगन की अध्यक्षता में भूविस्थापितों, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं एसईसीएल प्रबंधन के बीच विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 50 वर्ष पूर्व खदान के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद अब बिना उचित मुआवजा दिए बस्ती खाली कराना पूरी तरह गलत है। मंत्री श्री देवांगन ने भूविस्थापितों की मांग को मजबूती से रखते हुए कहा कि इतने वर्षों में एक ही भू-धारक के कई परिवार बन चुके हैं, इसलिए मुआवजा एक जमीन मालिक नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार के आधार पर दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए कोयला महत्वपूर्ण है, लेकिन विकास के साथ विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने बैठक में ही तीन अहम निर्णयों की घोषणा की— सभी भूविस्थापित परिवारों के मकान एवं परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कर मुआवजा दिया जाएगा। बसाहट एवं विस्थापन हेतु प्रति परिवार 6.78 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। मानिकपुर खदान की आउटसोर्सिंग कंपनियों में भूविस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाएगी। एसईसीएल के इन निर्णयों का ग्राम भिलाई खुर्द के भूविस्थापितों ने स्वागत करते हुए मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं मंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि सभी परिवारों की बारीकी से गणना कर शीघ्र मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी की जाए। बैठक में यह भी सहमति बनी कि मुआवजे के साथ-साथ ठेका कंपनियों में रोजगार के अवसरों में भी भूविस्थापितों को प्राथमिकता दी जाएगी।  

घने जंगलों के ऊपर चार दिनों से हवाई सर्वे, कोरबा में बढ़ी हलचल देखे वीडियो

✍️ भागीरथी यादव     रानी अटारी–विजय वेस्ट कोल माइंस क्षेत्र बना चर्चा का केंद्र कोरबा | ऊर्जाधानी कोरबा एक बार फिर रहस्यमय गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है। जिले के रानी अटारी और विजय वेस्ट कोल माइंस क्षेत्र के घने जंगलों के ऊपर बीते चार दिनों से लगातार हवाई सर्वेक्षण किए जाने से पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।   प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हवाई सर्वे कोसाई पर्वत से लेकर पसान क्षेत्र तक किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में यूरेनियम, कॉपर सहित अन्य दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी की संभावनाओं को लेकर आधुनिक तकनीक से अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन या खनिज विभाग की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे बेहद गोपनीय तरीके से किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में चिंता और तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यह सर्वे कहीं प्रस्तावित रेलवे लाइन के निर्माण या नए खनन परियोजनाओं से जुड़ा न हो। बताया जा रहा है कि पेंड्रा रोड से दीपका तक प्रस्तावित रेलवे लाइन को लेकर भी जंगल क्षेत्रों—बीजा डांड, पुटी पखना, अडसरा, सिंदूरगढ़, धवलपुर, रानी अटारी और विजय वेस्ट कोल माइंस—में गुप्त सर्वे किए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। गौरतलब है कि हाल ही में रुगंटा कंपनी द्वारा प्रस्तावित नए खदानों के विरोध में ग्राम संगठन और ग्रामीणों द्वारा आंदोलन भी शुरू किया गया है। ऐसे में हवाई सर्वेक्षण की टाइमिंग ने संदेह को और गहरा कर दिया है। यदि इन क्षेत्रों में दुर्लभ खनिजों की पुष्टि होती है, तो कोरबा जिले का सामरिक और आर्थिक महत्व राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ सकता है। फिलहाल प्रशासन की चुप्पी और आसमान में उड़ते विमान ग्रामीणों के बीच बेचैनी का कारण बने हुए हैं।

कटघोरा वन मंडल में अखिल भारतीय बाघ आकलन–2026 को लेकर प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित

सुशील जायसवाल   कोरबा (कोरबी चोटिया)। कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत पसान एवं केंदई वन परिक्षेत्र में अखिल भारतीय बाघ आकलन–2026 के सफल क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम परिक्षेत्र कार्यालयों में संपन्न हुआ, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कटघोरा वन मंडल के प्रशिक्षु वन क्षेत्रपाल, विभिन्न परिक्षेत्रों के परिक्षेत्र अधिकारी, परिक्षेत्र सहायक एवं वन रक्षक उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान बाघ आकलन की नवीन पद्धतियों, फील्ड डाटा संग्रह, ट्रैक सर्वे, कैमरा ट्रैपिंग, तथा जैव विविधता संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला का उद्देश्य बाघ गणना प्रक्रिया को वैज्ञानिक एवं प्रभावी ढंग से संपन्न करना, साथ ही वन कर्मियों की क्षमता में वृद्धि करना रहा। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण से जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को आकलन कार्य में बेहतर समन्वय और सटीकता प्राप्त होगी। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने बाघ संरक्षण एवं वन्यजीव प्रबंधन को लेकर अपने अनुभव साझा किए और आगामी बाघ आकलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।

रायपुर में हैवानियत पर प्रशासन का कड़ा प्रहार, रेप आरोपी का अवैध मकान तोड़ने की तैयारी

  रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नौ साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य अपराध के आरोपी अब्दुल सज्जाद अंसारी (65) के खिलाफ अब प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। नगर निगम रायपुर ने आरोपी के अवैध रूप से निर्मित मकान को ध्वस्त करने का नोटिस जारी कर दिया है। यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। नगर निगम अधिकारियों की जांच में सामने आया है कि सज्जाद का मकान नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन कर बनाया गया है। निगम ने स्पष्ट किया है कि तय समय-सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मकान को गिराने की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने दो टूक कहा है कि नाबालिगों के खिलाफ जघन्य अपराध करने वालों के प्रति किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अपराधी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने जनवरी के दूसरे सप्ताह में अपने ही मोहल्ले की मासूम बच्ची को खाने-पीने का लालच देकर कई बार अपने घर बुलाया और उसके साथ दरिंदगी की। आरोपी बच्ची को धमकाकर चुप रहने के लिए मजबूर करता रहा, जिससे वह लंबे समय तक दर्द और डर में जीती रही। 12 जनवरी को जब बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ी और वह असहनीय दर्द से कराहने लगी, तब परिजनों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली। परिजन तुरंत बच्ची को लेकर थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बिना देरी किए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपी की गिरफ्तारी का वीडियो भी सामने आया है, जिसने लोगों के आक्रोश को और भड़का दिया है। इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई को पीड़िता के लिए न्याय की दिशा में एक कड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

कटघोरा किसान मेला 2026 से पहले विवादों की आहट

  गुपचुप वाहन स्टैंड आबंटन पर उठे सवाल, नगर पालिका की भूमिका संदेह के घेरे में** कोरबा/कटघोरा | 16 जनवरी 2026 कटघोरा में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाला बहुप्रतीक्षित किसान मेला 2026 इस बार शुभारंभ से पहले ही विवादों में घिरता नजर आ रहा है। मेला मैदान में झूलों और अन्य व्यवस्थाओं का काम तेज़ी से जारी है, वहीं 26 जनवरी से शुरू होने वाले इस आयोजन को लेकर नगर में उत्साह का माहौल बना हुआ है। लेकिन इसी बीच वाहन स्टैंड के आबंटन को लेकर नगर पालिका परिषद पर गंभीर आरोप लगने लगे हैं, जिससे मेले की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी नगर पालिका परिषद द्वारा मेला परिसर के बाहर वाहन स्टैंड का आबंटन किया जाना है। पूर्व वर्षों में यह प्रक्रिया खुली निविदा (ओपन टेंडर) के माध्यम से होती रही है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती थी और नगर पालिका को अधिकतम राजस्व की प्राप्ति होती थी। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष नगर पालिका परिषद द्वारा वाहन स्टैंड का आबंटन गुपचुप तरीके से, बिना ओपन टेंडर और बिना सार्वजनिक सूचना के करने की तैयारी की जा रही है। आरोप है कि यह आबंटन आपसी सहमति और कथित साठगांठ के आधार पर किसी चहेते व्यक्ति को सौंपा जा सकता है। इस संभावित निर्णय से वाहन स्टैंड संचालन में रुचि रखने वाले ठेकेदारों और स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। इच्छुक लोगों का कहना है कि यदि ओपन निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती है तो सभी को समान अवसर मिलेगा और नगर पालिका की आय में भी वृद्धि होगी। वहीं, गुपचुप तरीके से किया गया आबंटन न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इससे भ्रष्टाचार की आशंका भी प्रबल हो जाती है। आक्रोशित नागरिकों ने साफ शब्दों में कहा है कि वाहन स्टैंड जैसा महत्वपूर्ण और लाभदायक कार्य पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए, न कि किसी विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए। इस मुद्दे को लेकर नगर में नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ माहौल गरमाता जा रहा है। गौरतलब है कि कटघोरा का किसान मेला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं। ऐसे में वाहन स्टैंड की व्यवस्था मेला संचालन की एक अहम कड़ी मानी जाती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर पालिका परिषद जनता के आक्रोश को गंभीरता से लेते हुए ओपन टेंडर प्रक्रिया अपनाती है या नहीं, अथवा किसान मेला 2026 इस बार भी विवादों और आरोप-प्रत्यारोप के साए में शुरू होता है।

दर्री में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़, आरोपी गिरफ्तार कर भेजा गया जेल

✍️ भागीरथी यादव   कोरबा दर्री दर्री थाना क्षेत्र से एक गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है, जहाँ स्कूल से घर लौट रही एक नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ एवं अभद्र व्यवहार किया गया। यह घटना दर्री सीएसईबी कॉलोनी की है, जिसने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।   प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 4 से 5 बजे के बीच छात्रा स्कूल से अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान अयोध्यापुरी निवासी विक्की श्रीवास नामक युवक ने रास्ता रोककर छात्रा के साथ अश्लील हरकतें कीं और अभद्र व्यवहार किया। घटना से भयभीत छात्रा रोते हुए घर पहुँची और अपने माता-पिता को पूरी घटना की जानकारी दी।   घटना की जानकारी मिलते ही परिजन तत्काल दर्री थाना पहुँचे और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए दर्री पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जाँच शुरू की और आरोपी विक्की श्रीवास (उम्र 28 वर्ष), पिता बलराम श्रीवास, निवासी अयोध्यापुरी को गिरफ्तार कर लिया।   पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74/75(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।  

कुसमुंडा खदान में दर्दनाक हादसा, मशीन रिपेयरिंग के दौरान ऑपरेटर की मौत

✍️ भागीरथी यादव    एसईसीएल ठेका कंपनी नीलकंठ में सिलेंडर फटने से दो मजदूर गंभीर घायल, जांच जारी कोरबा, 16 जनवरी। एसईसीएल की कुसमुंडा खदान से एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। खदान में कार्यरत ठेका कंपनी नीलकंठ में मशीन की मरम्मत के दौरान हुए भीषण हादसे में एक ऑपरेटर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज निजी अस्पताल में जारी है। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान संजय देवांगन के रूप में हुई है, जो पिछले तीन वर्षों से नीलकंठ कंपनी में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बीती शाम मशीन रिपेयरिंग के दौरान अचानक मशीन का सिलेंडर फट गया, जिसकी चपेट में आने से संजय की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं पुलिस के अनुसार, मरम्मत के दौरान मशीन का पिस्टन तेज़ी से बाहर निकलकर संजय के सीने में जा लगा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पास में काम कर रहे दो अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के सही कारणों को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मृतक संजय देवांगन बलरामपुर जिले का निवासी था और अपने परिवार में चार बहनों का इकलौता भाई था। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों और सहकर्मियों ने ठेका कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि छुट्टी के दिन भी संजय से मिस्त्री का काम कराया जा रहा था, जबकि वह ऑपरेटर था। इसी लापरवाही के चलते यह दर्दनाक हादसा हुआ।  

बिलासपुर में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

✍️ भागीरथी यादव   राजस्व अधिकारियों की सीमा तय, ग्रेच्युटी-पीएफ पर केवल सिविल कोर्ट का अधिकार बिलासपुर। शिक्षिका की मौत के बाद खुद को जैविक संतान बताकर सरकारी लाभ हासिल करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर या तहसीलदार जैसे राजस्व अधिकारी केवल परिवार पेंशन (कंट्रीब्यूटरी फैमिली पेंशन) के उद्देश्य से ही आश्रित प्रमाण पत्र जारी कर सकते हैं। ग्रेच्युटी, पीएफ और अन्य वित्तीय लाभों के लिए उत्तराधिकार तय करने का अधिकार केवल सक्षम सिविल कोर्ट को है। मामला बिलासपुर जिले के बिल्हा स्थित रहंगी मिडिल स्कूल में पदस्थ उच्च वर्ग की शिक्षिका शमशाद बेगम से जुड़ा है। उनकी मृत्यु के बाद काजोल खान ने खुद को मृतका की जैविक पुत्री बताते हुए कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिया। इस पर तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर ने जून 2014 में उसे एकमात्र कानूनी वारिस घोषित करते हुए प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर काजोल खान को पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य शासकीय लाभ प्राप्त हो गए। इस फैसले को मृतका के भाइयों मोहम्मद इखलाक खान और मोहम्मद इकबाल खान ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने याचिका में बताया कि शमशाद बेगम अविवाहित थीं, ऐसे में उनके निधन के बाद मिलने वाले सभी शासकीय लाभों पर उनका अधिकार बनता है। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 47(14) और राज्य सरकार के 17 दिसंबर 2003 के सर्कुलर का विस्तृत विश्लेषण किया। कोर्ट ने पाया कि राजस्व अधिकारियों को केवल परिवार पेंशन के लिए आश्रितों की पहचान करने का सीमित अधिकार है। इसके विपरीत, ग्रेच्युटी, पीएफ जैसे अन्य वित्तीय लाभों के लिए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के तहत सिविल कोर्ट से प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में डिप्टी कलेक्टर ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर प्रमाण पत्र जारी किया, जो कानूनन गलत है। कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ इस प्रकरण में बल्कि भविष्य में ऐसे सभी मामलों के लिए एक मजबूत नजीर माना जा रहा है।  

रायपुर | गांजा तस्करी पर न्यायालय की कड़ी चोट, हिस्ट्रीशीटर रवि साहू उर्फ ‘रवि बाबा’ समेत 6 दोषियों को 10-10 साल की सजा

  राजधानी रायपुर में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई सामने आई है। विशेष न्यायाधीश किरण थवाईत की एनडीपीएस कोर्ट ने गांजा तस्करी के एक गंभीर मामले में हिस्ट्रीशीटर रवि साहू उर्फ रवि बाबा और उसके पांच साथियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। कोतवाली थाना क्षेत्र का मामला यह पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां लंबे समय से गांजा तस्करी का नेटवर्क सक्रिय था। न्यायालय के इस फैसले को राजधानी में नशे के अवैध कारोबार पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। सजा पाने वाले आरोपी सजा पाए आरोपियों में— रवि साहू उर्फ रवि बाबा, निवासी कोतवाली अनील उर्फ अली जुल्फेकार संजय उर्फ लेंडी जुल्फेकार गणेश बागर्ती, निवासी बलांगीर, ओडिशा विक्रम शाह, निवासी बलांगीर, ओडिशा प्रियवंत कुम्हार, निवासी बलांगीर, ओडिशा गांजा बेचते रंगे हाथों पकड़े गए थे आरोपी विशेष लोक अभियोजक भुवन लाल साहू ने बताया कि पुलिस ने 4 फरवरी 2025 को गांजा तस्करी की पुख्ता सूचना मिलने पर कार्रवाई की थी। कालीबाड़ी चौक में दबिश देकर आरोपियों को मादक पदार्थ के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ था, जिसे वे बैग में रखकर छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर ग्राहकों को बेच रहे थे। रवि साहू के इशारे पर चल रहा था नेटवर्क पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश केस डायरी के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे हिस्ट्रीशीटर रवि साहू के निर्देश पर गांजा की बिक्री कर रहे थे। रवि साहू पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था और उसके गुर्गे शहर में गांजा खपाने का काम करते थे। कोर्ट ने मानी अभियोजन की दलीलें एनडीपीएस कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सही मानते हुए आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी ठहराया और सख्त सजा सुनाई। यह फैसला राजधानी में नशे के अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि कानून से बच पाना अब आसान नहीं होगा।

रायपुर | दोपहिया वाहन चोर गिरोह पर पुलिस का बड़ा वार, 36 एक्टिवा जब्त, 21 आरोपी गिरफ्तार

  रायपुर में लगातार बढ़ रही दोपहिया वाहन चोरी की घटनाओं पर पुलिस ने बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए संगठित वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की विशेष टीम ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों से 03 दर्जन (36) एक्टिवा वाहन चोरी करने वाले मुख्य आरोपी सहित चोरी के वाहन खपाने और खरीदने वाले कुल 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से बरामद एक्टिवा वाहनों की अनुमानित कीमत करीब 19 लाख 80 हजार रुपये बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई राजधानी में सक्रिय दोपहिया वाहन चोरी के नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी चोट मानी जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बनी विशेष टीम पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर वाहन चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की विशेष टीम गठित की गई थी। टीम ने सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र, तकनीकी विश्लेषण और लगातार पेट्रोलिंग के माध्यम से आरोपियों की पहचान कर सटीक कार्रवाई को अंजाम दिया। मास्टर चाबी से करता था चोरी, गांवों में खपाता था वाहन पुलिस जांच में सामने आया कि रोशन रात्रे, निवासी बोरियाकला-मुजगहन, इस गिरोह का मुख्य सरगना है। वह मास्टर चाबी की मदद से अलग-अलग थाना क्षेत्रों से एक्टिवा वाहन चोरी करता था। चोरी के बाद वह वाहनों को अपने परिचितों कमल जांगडे, गितेश कुमार पाटले और मुस्कान रात्रे को सौंप देता था। ये लोग चोरी की गाड़ियों को खुद इस्तेमाल करने के साथ-साथ गांवों में रिश्तेदारों और परिचितों को सस्ते दामों पर बेच देते थे। रवि भवन पार्किंग में चला ऑपरेशन पुलिस टीम ने रवि भवन पार्किंग और आसपास के इलाकों में करीब एक सप्ताह तक कैंप कर मुख्य आरोपी रोशन रात्रे को गिरफ्तार किया। उसकी पूछताछ के बाद वाहन खरीदी-बिक्री में शामिल 17 अन्य आरोपियों की भी पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया। 24 वाहन पहले से दर्ज चोरी के मामलों से जुड़े पुलिस ने बताया कि जब्त की गई 36 एक्टिवा में से 24 वाहनों की चोरी के मामले थाना सिविल लाइन, डीडी नगर और गोलबाजार में पहले से दर्ज हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 के महज 15 दिनों में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट द्वारा कुल 44 दोपहिया वाहन जब्त किए जा चुके हैं, जो पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है। पुलिस का सख्त संदेश पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राजधानी में वाहन चोरी और संगठित अपराधों के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। आम नागरिकों से अपील की गई है कि संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। यह कार्रवाई न सिर्फ वाहन चोरों के लिए चेतावनी है, बल्कि आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा भी मजबूत करती है।

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