चिरमिरी में तंबाकू विक्रय पर बड़ी कार्रवाई: स्कूलों के आसपास बेधड़क बिक रहा था तंबाकू, 12 दुकानों पर चालान, कड़ी चेतावनी जारी
चिरमिरी। जिले में तंबाकू नियंत्रण को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त मोड में आ गया है। एमसीबी/जिला कलेक्टर के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने चिरमिरी क्षेत्र में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। अभियान के दौरान डीएवी पब्लिक स्कूल बरतुंगा, शासकीय विद्यालय हल्दीबाड़ी, लाहिड़ी कॉलेज और शिशु निकेतन स्कूल डोमनहिल के 100 मीटर दायरे में स्थित किराना दुकानों, पान ठेलों और चाय दुकानों की जांच की गई। निरीक्षण में कई दुकानें स्कूलों के पास प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद बेचती पाई गईं, जिन पर तत्काल चालानी कार्रवाई की गई और दोबारा ऐसा पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की अंतिम चेतावनी दी गई। इसी तरह जिला अस्पताल चिरमिरी के सामने और बस स्टैंड क्षेत्र में कुल 19 पान ठेला, गुमटी, किराना दुकान और रेस्टोरेंट की जांच की गई। कोटपा एक्ट 2003 की धारा 4 एवं 6 के उल्लंघन पर 12 दुकानों पर कुल ₹2800 का जुर्माना लगाया गया। टीम ने सभी दुकानों को “धूम्रपान निषेध क्षेत्र” एवं “18 वर्ष से कम उम्र को तंबाकू बेचना दंडनीय अपराध है” संबंधी अनिवार्य बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान शासकीय विद्यालय हल्दीबाड़ी में धूम्रपान मुक्त शिक्षण संस्थान से संबंधित साइनबोर्ड नहीं मिला, जिस पर प्रवर्तन दल ने विद्यालय प्रबंधन को तुरंत बोर्ड लगाने के आदेश दिए। इस कार्रवाई में कोटपा नोडल अधिकारी डॉ. कीर्ति चौहान, डॉ. विक्की टोप्पो, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के औषधि निरीक्षक विकास लकड़ा, आलोक मिंज तथा स्थानीय पुलिस बल शामिल रहा। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि तंबाकू विक्रय पर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब किसी भी स्थिति में नरमी नहीं बरती जाएगी।
बलौदाबाजार से बड़ी कार्रवाई: आबकारी विभाग ने 35 बल्क लीटर महुआ शराब व 600 किलो लाहन जब्त, आरोपी पर केस दर्ज
✍️ भागीरथी यादव बलौदाबाजार, 28 नवम्बर 2025। आबकारी आयुक्त आर. संगीता के निर्देश एवं कलेक्टर दीपक सोनी तथा जिला आबकारी अधिकारी मुकेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में पलारी वृत्त क्षेत्र में अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई की गई। संयुक्त टीम ने कुल 35 बल्क लीटर महुआ शराब और 600 किलोग्राम महुआ लाहन जब्त किया, जिसका कुल बाजार मूल्य 43,000 रुपए आंका गया है। ग्राम खैरी से आरोपी गिरफ्तार, हाथभट्ठी शराब बरामद प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना पलारी अंतर्गत ग्राम खैरी में दबिश देकर आरोपी लख्खीराम पिता कुनुराम, निवासी कानाकोट, के कब्जे से 10 लीटर हाथभट्ठी महुआ शराब जब्त की गई। आरोपी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की गई है। नाले से लावारिस हालत में मिला 600 किलो लाहन और 25 लीटर शराब मुखबिर सूचना पर दूसरी कार्रवाई करते हुए टीम ने तलाशी के दौरान नाले में लावारिस अवस्था में रखी गई 30-30 किलो क्षमता वाली 20 बोरियों में भरी कुल 600 किलोग्राम महुआ लाहन 5-5 लीटर क्षमता वाली 5 जरीकेनों में भरी 25 बल्क लीटर महुआ शराब बरामद की। मौके पर लाहन का सैंपल लेकर शेष लाहन नष्ट कर दिया गया। कानूनी कार्रवाई तेज आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1)(क)(च), 34(2), 59(क) के तहत अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया गया है। वहीं नाले में मिली शराब व लाहन के मामले में अज्ञात आरोपी की पतासाजी जारी है। टीम की प्रमुख भूमिका इस कार्रवाई में सहायक जिला आबकारी अधिकारी जलेश कुमार सिंह, आबकारी उपनिरीक्षक पी. माधव राव, नगर सैनिक दुर्गेश्वरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आबकारी विभाग की यह कार्रवाई क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ मजबूत संदेश देती है।
देश में श्रम सुधार की नई पहल: चार नए लेबर कोड लागू, महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी कार्य वातावरण पर विशेष जोर
✍️ भागीरथी यादव नई दिल्ली। सरकार ने बीते शुक्रवार को देश के श्रम ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए चार नए लेबर कोड लागू कर दिए। कोड ऑन वेजेज (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड (2020), कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) और Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSHWC) Code (2020) अब कुल 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह लेंगे। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थलों को अधिक आधुनिक, सरल और प्रभावी बनाना है, विशेषकर महिलाओं के लिए सुरक्षित, न्यायसंगत और लचीला माहौल तैयार करना। महिलाओं की नौकरी में भागीदारी बढ़ाने पर फोकस सरकार का कहना है कि नए लेबर कोड महिलाओं की रोजगार से जुड़ी चुनौतियों को कम करेंगे और उन्हें अधिक अधिकारों व सुरक्षा के साथ काम करने का अवसर देंगे। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड के तहत अब हर शिकायत निवारण समिति में महिलाओं का अनुपातिक प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा, जिससे वे कार्यस्थल पर उत्पीड़न, सुरक्षा और विवादों से जुड़े मुद्दों को बेझिझक उठा सकेंगी। मातृत्व सुरक्षा और पेड लीव में बड़ी राहत कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी महिलाओं को अब कम से कम 80 दिन काम करने पर 26 सप्ताह तक का पेड मैटरनिटी लीव प्रदान करता है। इनमें से आठ सप्ताह प्रसव पूर्व लिए जा सकते हैं। गोद लेने वाली और सरोगेसी से मातृत्व प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी 12 सप्ताह की छुट्टी का अधिकार मिलेगा। यदि नियोक्ता प्रसव पूर्व/पश्चात चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध नहीं कराता, तो महिलाओं को 3,500 रुपये का मेडिकल बोनस दिया जाएगा। बच्चे के 15 महीने होने तक प्रतिदिन दो बार स्तनपान अवकाश भी मिलेगा। साथ ही, 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में क्रेच सुविधा अनिवार्य होगी। वर्क-फ्रॉम-होम और रात की शिफ्ट में काम की अनुमति प्रसव या गोद लेने के बाद, यदि परिस्थितियां अनुकूल हों, तो महिलाएं नियोक्ता की सहमति से वर्क-फ्रॉम-होम कर सकेंगी। OSHWC कोड महिलाओं को सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने की शर्त पर रात 7 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले काम करने की अनुमति देता है। इससे उन क्षेत्रों में भी महिला रोजगार बढ़ने की उम्मीद है जहां पहले रात की शिफ्ट में काम की अनुमति सीमित थी। समान वेतन और लैंगिक भेदभाव पर सख्ती कोड ऑन वेजेज के तहत भर्ती, वेतन और काम की शर्तों में लैंगिक भेदभाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। समान कार्य के लिए समान वेतन महिलाओं का सुनिश्चित अधिकार होगा। केंद्र और राज्य स्तर पर Advisory Boards में एक-तिहाई महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है, ताकि वे न्यूनतम वेतन, रोजगार और नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। महिलाओं के लिए रोजगार का नया युग नए लेबर कोड महिलाओं को न केवल सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें मातृत्व, निर्णय लेने, बच्चों की देखभाल और करियर में निरंतरता के लिए मजबूत आधार भी देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन सुधारों से महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ेगी और भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। सरकार का यह कदम श्रम बाजार को आधुनिक और समावेशी बनाने की दिशा में एक निर्णायक बदलाव माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ : वन भैंसा संरक्षण पर उच्चस्तरीय बैठक, स्थानांतरण व संख्या वृद्धि के लिए तेज होंगे कदम
✍️ भागीरथी यादव काला हिरण संरक्षण मॉडल को मिलेगी राज्यभर में विस्तार नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन श्री अरुण कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में आरण्य भवन में गुरुवार को वन्यजीव संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन भैंसा (वाइल्ड बफैलो) के संरक्षण, संख्या वृद्धि, जियो-मैपिंग, स्थानांतरण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। राज्य के राजकीय पशु वन भैंसा के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु सभी विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों के साथ गहन चर्चा की गई — वन भैंसा संरक्षण : वैज्ञानिक प्रयासों को नई गति देने का निर्णय बैठक की शुरुआत में वन भैंसा की मौजूदा स्थिति, अब तक हुए संरक्षण कार्यों और आगे की चुनौतियों पर चर्चा की गई। डॉ. आर.पी. मिश्रा ने विस्तृत प्रेजेंटेशन देते हुए बताया कि वन भैंसा प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा वन्यजीव है और इसकी शुद्ध नस्ल को बचाने के लिए आधुनिक व वैज्ञानिक प्रयास अनिवार्य हैं। श्री पाण्डेय ने कहा कि— “राजकीय पशु वन भैंसा की सुरक्षा और संख्या वृद्धि राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सभी सम्बंधित इकाइयों का समन्वित प्रयास आवश्यक है।” — उदंती-सीतानदी और बारनवापारा : संरक्षण के प्रमुख केंद्र बैठक में बताया गया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और बारनवापारा अभयारण्य वन भैंसा संरक्षण के लिए अनुकूल साबित हुए हैं। वर्तमान में बारनवापारा में 1 नर और 5 मादा वन भैंसे मौजूद हैं। वन भैंसों की वास्तविक संख्या और शुद्ध नस्ल की पहचान के लिए जियो-मैपिंग तकनीक लागू करने का निर्णय लिया गया। साथ ही वन्यजीवों के खानपान, रहवास सुधार, स्वास्थ्य देखभाल और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। — स्थानांतरण प्रक्रिया तेज—दिल्ली भेजा जाएगा विशेष दल बैठक में यह निर्णय हुआ कि वन भैंसों के स्थानांतरण के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ और NTCA से आवश्यक अनुमतियाँ शीघ्र प्राप्त की जाएँगी। इस संबंध में एक विशेष दल (डेलिगेशन) जल्द ही दिल्ली जाकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। वन भैंसों की चिकित्सा सुरक्षा के लिए दो पूर्णकालिक पशु चिकित्सकों की तैनाती का भी निर्णय लिया गया। वहीं सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से अनुमति लेकर सैटेलाइट-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। — काला हिरण संरक्षण : 190 की संख्या पहुँची, अब अन्य अभयारण्यों में विस्तार बैठक में काला हिरण (Blackbuck) संरक्षण पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि वर्ष 2018 में 50 वर्षों बाद बारनवापारा में काला हिरण पुनर्स्थापन शुरू किया गया था। सुधारित रेत व जल निकासी प्रणाली, पोषण निगरानी, और समर्पित टीम तैनात करने जैसे प्रयासों के परिणामस्वरूप आज बारनवापारा में लगभग 190 काले हिरण मौजूद हैं। इस मॉडल की सफलता को देखते हुए, अब राज्य के अन्य अभयारण्यों में भी काला हिरण पुनर्स्थापन कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। — वरिष्ठ विशेषज्ञों की मौजूदगी में बनी व्यापक रणनीति बैठक में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े देश-प्रदेश के प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिनमें— अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री व्ही. माधेश्वरन, क्षेत्रीय निदेशक उदंती-सीतानदी सुश्री सतीविशा समाजदार, DFO बलौदाबाजार श्री धम्मशील गनवीर, उप संचालक इंद्रावती श्री संदीप बलगा, वैज्ञानिक डॉ. सम्राट मंडल, डॉ. विवश पांडेव, वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. राहुल कौल, डॉ. संदीप तिवारी, सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल रहे।
मंत्री टंकराम वर्मा की शक्ति: विधायक के मार्गदर्शन से वार्ड 13 में विकास ज़मीन पर उतरा
ज़रूर, यह रहा आपकी दी गई जानकारी पर आधारित सीधा और स्पष्ट समाचार कवरेज। 📰 25 साल का विवाद खत्म: विकास सुखवानी ने संभाला मोर्चा, तिल्दा नेवरा के वार्ड 13 में नाली निर्माण शुरू “विकास में रोड़े अटकाए तो सीधी FIR” — पूर्व उपाध्यक्ष का कड़ा अल्टीमेटम तिल्दा नेवरा। नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 13 में पिछले 25 वर्षों से लंबित और विवादित पड़े नाली निर्माण कार्य का आखिरकार शिलान्यास हो गया है। इस महत्वपूर्ण पहल का श्रेय नगर पालिका परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष विकास सुखवानी को जाता है, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से मौके पर पहुंचकर न सिर्फ निर्माण कार्य प्रारंभ करवाया, बल्कि इसका विरोध करने वालों को भी सख्त चेतावनी दी। मौके पर मीडिया से बात करते हुए सुखवानी ने दो टूक शब्दों में कहा, “जो भी विकास कार्य में बाधा डालेगा, उसके खिलाफ बिना देर किए सीधी एफआईआर कराई जाएगी। अब कोई भी वार्ड 13 के विकास को रोक नहीं सकता। 25 साल से जो नाली नहीं बनी, वह अब हर हाल में बनकर रहेगी।” उन्होंने बताया कि इस 9 लाख रुपये की लागत वाले नाली निर्माण का काम, मामला संज्ञान में आते ही, बिना वक्त गंवाए तुरंत स्वीकृत करवाकर शुरू कर दिया गया है। विधायक टंकराम वर्मा का मज़बूत समर्थन विकास सुखवानी ने स्पष्ट किया कि वार्ड 13 में चल रहे सभी विकास कार्य क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा के सहयोग और मार्गदर्शन से ही संभव हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “विधायक टंकराम वर्मा जी का आशीर्वाद और सहयोग मुझे हर कदम पर मिलता है। उन्हीं के मार्गदर्शन में आज वार्ड 13 में विकास सिर्फ काग़ज़ों में नहीं, ज़मीन पर दिखाई दे रहा है।” अवैध कब्ज़ों पर आर-पार की तैयारी: “अब जेसीबी बोलेगी” सब-स्टेशन निर्माण में रुकावट और नाले पर अवैध कब्ज़ों के सवाल पर सुखवानी अधिक आक्रामक दिखे। उन्होंने साफ कहा कि काम बंद नहीं हुआ है, बल्कि कुछ शरारती तत्व अवैध कब्जा कर विकास रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी, “सभी को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब खुद से नहीं हटे, तो प्रशासन जबरन हटाएगा।” सुखवानी ने साफ किया कि अब सिर्फ कागज़ी कार्रवाई नहीं होगी, “जेसीबी तैयार है, एसडीएम हैं, तहसीलदार हैं, नगर पालिका प्रशासन तैयार है। अब अवैध कब्ज़ों पर सीधी कार्रवाई होगी। बहुत जल्द इसका नतीजा सबके सामने होगा।” पूर्व उपाध्यक्ष के इस कदम से 25 वर्षों तक उपेक्षित रहे वार्ड 13 में विकास की उम्मीदें जगी हैं। सुखवानी ने घोषणा की है कि वार्ड 13 को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, और यह इलाका अब संघर्ष नहीं, समाधान का प्रतीक बनेगा।
जनजातीय नायकों की अमर गाथाओं से गूंजा शासकीय महाविद्यालय करतला
मुख्य वक्ता रघुराज सिंह उइके ने दिया संदेश—“विरासत अपनाएँ, समाज-राष्ट्र निर्माण में आगे बढ़ें” पाली/कोरबा। ज्ञान शंकर तिवारी की विशेष रिपोर्ट शासकीय महाविद्यालय करतला में जनजातीय गौरव दिवस इस वर्ष अत्यंत उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। पूरे महाविद्यालय परिसर में पारंपरिक रंग, संस्कृति और जनजातीय धरोहर की सुगंध समाई रही। कार्यक्रम में जनजातीय समाज के बलिदानों, वीर गाथाओं और समृद्ध संस्कृति पर सारगर्भित चर्चा हुई। जनजातीय जीवन मूल्य आज भी मार्गदर्शक – मुख्य अतिथि मुख्य अतिथि जुड़ावन सिंह ठाकुर (प्रांत अध्यक्ष, विद्या भारती) ने कहा कि जनजातीय समाज ने सदियों से प्रकृति संरक्षण, समानता और सामाजिक समरसता को अपने जीवन का आधार बनाया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में इन मूल्यों को अपनाना समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों से उन्होंने इन परंपराओं को जीवन में उतारने की अपील की। “जनजातीय नायक इतिहास नहीं, जीवित प्रेरणा हैं”—रघुराज सिंह उइके कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रघुराज सिंह उइके (अध्यक्ष, वनवासी कल्याण आश्रम कोरबा) ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जनजातीय नायक केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मसम्मान के जीवित प्रतीक हैं। उन्होंने कहा— “जनजातीय नायकों ने अपनी अस्मिता की रक्षा करते हुए राष्ट्र के स्वाभिमान को ऊँचा रखा। आज युवा पीढ़ी को उनकी शिक्षाओं को अपनाकर देश निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।” उन्होंने प्रकृति आधारित जनजातीय जीवनशैली को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। जनजातीय कला और परंपराएँ हमारी सांस्कृतिक आत्मा — विशिष्ट अतिथि विशिष्ट अतिथि पुष्पराज सिंह (जिला संयोजक, जनजाति सुरक्षा मंच) और लोक कला आयाम प्रमुख बीरबल सिंह ने जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी यदि इन कलाओं को आगे बढ़ाएगी, तो दुनिया भारत की समृद्ध जनजातीय पहचान को और बेहतर समझ सकेगी। कार्यक्रम में दिखा परंपरा और प्रतिभा का संगम कार्यक्रम का संचालन डॉ. सपना मिश्रा ने किया तथा मनीषा मिंज टोप्पो ने विशेष सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने— पारंपरिक नृत्य, वाद-विवाद, जनजातीय गीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ के माध्यम से जनजातीय गौरव को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की। प्राचार्य ने व्यक्त किया आभार महाविद्यालय के प्राचार्य मृगेश कुमार यादव ने सभी अतिथियों, विद्यार्थियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक चेतना जगाते हैं बल्कि विद्यार्थियों में समाज के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ाते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ और क्षेत्रवासी उपस्थित रहे, जिससे जनजातीय गौरव दिवस एक यादगार उत्सव के रूप में सफल रहा।
गोरखपुर में शादीशुदा प्रेमिका की गला रेतकर हत्या—वीडियो फुटेज और कॉल डिटेल्स ने खोला क़त्ल का राज
✍️ भागीरथी यादव गोरखपुर। जिले में 23 नवंबर को सामने आई एक सनसनीखेज वारदात ने सभी को हैरान कर दिया। जंगल रसूलपुर गांव में अपनी चचेरी बहन की शादी में आई शादीशुदा युवती शिवानी का शव उसके मायके के बाथरूम में मिला था। गले पर गहरे कटाव और संघर्ष के निशान साफ़ बता रहे थे कि मौत बेहद दर्दनाक रही होगी। अब पुलिस ने इस क्रूरतम हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए आरोपी प्रेमी विनय निशाद उर्फ दीपक को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में सामने आया सच बेहद चौंकाने वाला है—विनय ने स्वीकार किया कि शिवानी उसके साथ रहने की जिद कर रही थी, इसी डर और दबाव में उसने उसकी हत्या कर दी। — कैसे परत-दर-परत खुला मर्डर का राज 1. शादी के वीडियो में पहला सुराग तफ्तीश के दौरान पुलिस ने शादी की रिकॉर्डिंग दोबारा देखी। रात लगभग 10 बजे जयमाला के समय फुटेज में विनय, शिवानी के पास दिखाई देता है। इसके बाद दोनों अचानक शादी की भीड़ से गायब हो जाते हैं। यहीं से पुलिस को पहला शक हुआ। 2. कॉल डिटेल ने खोली चैटिंग की रात कॉल रिकॉर्ड चेक किए गए तो पता चला कि विनय और शिवानी देर रात तक लगातार बात कर रहे थे। यह बात पुलिस की आशंका को और मजबूत कर गई। 3. डॉग स्क्वॉड सीधे आरोपी के घर तक पहुंचा डॉग स्क्वॉड की मदद से पुलिस घटनास्थल से निकला सुराग पकड़ते हुए सीधे विनय के घर तक पहुंच गई। इससे जांच टीम का शक लगभग पुख्ता हो गया। 4. हत्या का हथियार—हंसिया बरामद कड़ाई से पूछताछ पर विनय टूट गया और कबूल किया कि उसने शिवानी का गला हंसिया से काटा। बाद में पुलिस ने वह हंसिया भी आरोपी के बताए स्थान से बरामद कर लिया। — आरोपी का चौंकाने वाला कबूलनामा पहले विनय ने भावनात्मक कहानी बनाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की— “मैं शिवानी से बेइंतहा प्यार करता हूँ, उसे नुकसान पहुंचाने का सवाल ही नहीं उठता।” लेकिन जब जांच टीम ने सबूतों के साथ उसे घेरा तो वह ढह गया। उसने बताया— “वह शादी के बाद भी मेरे साथ रहने की जिद कर रही थी… इसी दबाव में मैंने उसे मार डाला।” रात करीब 2 बजे, लगातार बातचीत के बाद, उसने बाथरूम में शिवानी का गला रेतकर हत्या कर दी। — जांच जारी, और सुरागों की तलाश पुलिस अब शादी स्थल, फोन लोकेशन, डिजिटल रिकॉर्डिंग और घटनास्थल से जुड़े सभी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण कर रही है। माना जा रहा है कि चार्जशीट में कई और तकनीकी साक्ष्य शामिल किए जाएंगे। — गोरखपुर का यह मामला न सिर्फ प्रेम संबंधों में टूटन और आपसी तनाव का भयावह रूप दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अपराध कितना भी चालाकी से किया जाए—सच आख़िरकार सामने आ ही जाता है।
रायपुर कमिश्नर ने सिमगा में लिया एसआईआर कार्य का आकस्मिक निरीक्षण — डाटा डिजिटाइजेशन में तेजी लाने के निर्देश
✍️ भागीरथी यादव सिमगा। रायपुर संभागायुक्त महादेव कावरे मंगलवार देर शाम अचानक सिमगा पहुंचे और एसआईआर (SIR) कार्य की प्रगति का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सिमगा में बनाए गए डाटा एंट्री एवं डिजिटाइजेशन सेंटर का विस्तृत अवलोकन किया। यहाँ गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन और अपलोडिंग की गति को देखते हुए कमिश्नर ने संबंधित बीएलओ और ऑपरेटरों को कार्य में और तेजी लाने के निर्देश दिए। रियल टाइम परफॉर्मेंस की खुद ली परीक्षा निरीक्षण के दौरान कमिश्नर कावरे ने ऑपरेटरों के कार्य की वास्तविक गति और सटीकता का आकलन करने के लिए टाइमर लगाकर अपने समक्ष ही गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन करवाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक गणना पत्रक में पूरी और सही जानकारी दर्ज की जाए, अपलोडिंग कार्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि या देरी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटाइजेशन के साथ-साथ गणना पत्रकों का संकलन भी समानांतर रूप से किया जाए, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कार्य सुचारू रूप से पूर्ण किया जा सके। अधिकारियों की उपस्थिति में हुई विस्तृत समीक्षा निरीक्षण के दौरान एसडीएम अतुल शेट्टे, तहसीलदार और अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे। कमिश्नर ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि एसआईआर कार्य में पारदर्शिता और गति दोनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। कमिश्नर कावरे के इस औचक निरीक्षण ने क्षेत्र में चल रहे एसआईआर कार्य को नई गति और दिशा प्रदान की है।
महाराष्ट्र बॉर्डर से आए मरीज की जान बचाकर बिलासपुर के डॉक्टरों ने किया कमाल—हार्ट के अंदर धँसी गोली निकाल रचा इतिहास
✍️ भागीरथी यादव बिलासपुर। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट ने एक अत्यंत जोखिमपूर्ण और दुर्लभ ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा जगत में नई उपलब्धि दर्ज की है। हार्ट सर्जरी विभाग के डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने 40 वर्षीय मरीज के हृदय के अंदर धँसी गोली निकालकर उसकी जान बचाई। यह केस इतना जटिल था कि ऑपरेशन टेबल पर मौत की आशंका (D.O.T.) लगभग निश्चित मानी जा रही थी। पीठ से छाती, फेफड़े चीरते हुए गोली पहुँची दिल तक महाराष्ट्र बॉर्डर क्षेत्र का रहने वाला घायल युवक गंभीर अवस्था में अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में लाया गया। भर्ती के समय उसका ब्लड प्रेशर मात्र 70/40 mmHg था। सीटी स्कैन में खुलासा हुआ कि गोली पीठ से प्रवेश कर पसलियों और फेफड़ों को चीरते हुए सीधे हार्ट के राइट वेंट्रिकल (Right Ventricle) में धँस गई थी। गोली से हृदय में बने छेद के कारण खून हार्ट के चारों ओर जमा होकर अत्यधिक दबाव पैदा कर रहा था, जिसे कार्डियक टैम्पोनेड कहते हैं। इस स्थिति में कुछ ही मिनटों की देरी मरीज की जान ले सकती थी। तुरंत ओपन हार्ट सर्जरी का फैसला—परिजनों से हाई रिस्क कन्सेंट स्थिति का आकलन करते हुए डॉक्टरों ने तत्काल ओपन हार्ट सर्जरी का निर्णय लिया। हाई रिस्क और “डेथ ऑन टेबल” कन्सेंट लेकर मरीज को कार्डियक ओटी में शिफ्ट किया गया, क्योंकि सीटी स्कैन से स्पष्ट था कि गोली हृदय के चैम्बर के भीतर फंसी हुई है। हार्ट-लंग मशीन के सहारे रुकी दिल की धड़कन—राइट एट्रियम चीरा टीम ने हार्ट-लंग मशीन की मदद से दिल की धड़कन को अस्थायी रूप से रोका। इसके बाद राइट एट्रियम को चीरा, ट्राइकस्पिड वाल्व को पार किया, और राइट वेंट्रिकल के भीतर धँसी 8mm x 4mm की गोली को खोजकर बाहर निकाला। गोली का पता लगाना हुआ सबसे बड़ी चुनौती टीईई (Transesophageal Echocardiography) से भी गोली की सही स्थिति नहीं मिल पाई। ऐसे में मूवेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन इस सर्जरी में वरदान साबित हुई। कई बार एक्स-रे लेने के बाद ही हृदय की मांसपेशियों में धँसी गोली को सटीक स्थान पर पहचाना जा सका। डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार यह वायरलेस डिजिटल एक्स-रे सिस्टम ऑपरेशन में निर्णायक साबित हुआ, क्योंकि यह कैमरे की तरह तुरंत स्क्रीन पर तस्वीर उपलब्ध करा देता है। चार घंटे चली जटिल सर्जरी—7 यूनिट ब्लड की जरूरत इस बहुचर्चित ऑपरेशन में लगभग 4 घंटे लगे और 7 यूनिट रक्त का इस्तेमाल किया गया। फेफड़े के छेद, पल्मोनरी आर्टरी और हार्ट की मरम्मत सटीकता से की गई। मरीज की स्थिति स्थिर—जल्द होगा डिस्चार्ज सर्जरी सफल होने के बाद मरीज की हालत लगातार सुधर रही है और चिकित्सकों के अनुसार उसे एक-दो दिनों में अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट की इस सफलता ने छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र को राष्ट्रीय पटल पर एक बार फिर गौरवान्वित किया है।
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने किया क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र का निरीक्षण, दिए विकास और नवाचार को गति देने के निर्देश
✍️ भागीरथी यादव रायपुर। प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री सोनमणि बोरा ने आज क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र का दौरा कर विभिन्न गतिविधियों और व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परिसर में “पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत अमलतास के पौधे का रोपण किया। इस मौके पर विज्ञान केंद्र के प्रबंध महानिदेशक श्री प्रशांत कवीश्वर एवं उप सचिव श्रीमती अंकिता गर्ग ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। विज्ञान पार्क में सुधार के निर्देश प्रमुख सचिव ने विज्ञान पार्क का अवलोकन करते हुए रंगाई-पुताई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्र को दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए और अधिक सुगम्य बनाने पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ संसाधन जोन, अस्थायी प्रदर्शन कक्ष, मापन दीर्घा एवं थ्री-डी थियेटर का अवलोकन किया। साथ ही नाविक को जीपीएस प्रणाली से जोड़ने और गाइडों की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए। थ्री-डी में देखी अंतरिक्ष यात्रा थ्री-डी थियेटर में प्रमुख सचिव ने मनुष्य की अंतरिक्ष यात्रा पर आधारित प्रस्तुति का अवलोकन किया और कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने थ्री-डी ग्लासेस की नियमित सफाई सुनिश्चित करने तथा थियेटर को और आकर्षक और उपयोगी बनाने पर बल दिया। स्थानीय भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर समीक्षा बैठक में श्री बोरा ने थ्री-डी प्लेनेटोरियम डोम की संख्या बढ़ाने तथा इसे जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और आदिम जाति कल्याण विभाग के समन्वय से स्कूल-आश्रमों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान केंद्र के सभी जोन एवं कार्यक्रमों में गोंडी, हल्बी और छत्तीसगढ़ी जैसी स्थानीय भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे भी विज्ञान से जुड़ सकें। सोशल मीडिया के माध्यम से विज्ञान प्रसार का निर्देश प्रमुख सचिव ने विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वेबिनार, टेक टॉक और अन्य डिजिटल कार्यक्रम आयोजित करने को कहा। उन्होंने आगामी वर्षों के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए। विज्ञान दूत कार्यक्रम को मिलेगी नई गति राज्य में विज्ञान के प्रसार के लिए 100 से अधिक जिला समन्वयक और 1000 से अधिक स्वयंसेवक विज्ञान दूत तैयार किए जाएंगे। उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को विज्ञान दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनार आयोजित करने पर भी जोर दिया गया। द्वितीय फेज विस्तार और सुरक्षा मानकों पर फोकस प्रमुख सचिव ने विज्ञान केंद्र के द्वितीय चरण के विस्तार की कार्ययोजना जल्द तैयार करने के निर्देश दिए। केंद्र की पुनर्व्यवस्था, फायर सेफ्टी ऑडिट, विद्युत उपकरणों की जांच और किसी भी खराब उपकरण की 24 घंटे के अंदर मरम्मत सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सैटेलाइट डेटा के माध्यम से भूमि अनुप्रयोग जांच कार्य को गति शक्ति योजना से जोड़कर आंकलन करने के निर्देश भी दिए। बैठक में वैज्ञानिक डॉ. शिरीष कुमार सिंह, डॉ. अमित मेश्राम, डॉ. अमित राम सहित विज्ञान केंद्र के अधिकारी उपस्थित रहे।
















