कांकेर जिले के चारामा में पंचायत व्यवस्था ठप, सरपंच संघ का प्रशासन पर गंभीर आरोप

✍️ भागीरथी यादव

 

 

एक साल से विकास कार्य बंद, डीएमएफ व मनरेगा राशि रोके जाने का दावा

कांकेर/चारामा। कांकेर जिले के चारामा विकासखंड में पंचायत स्तर की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। विकास कार्यों के ठप होने से ग्रामीण अंचलों में जनकल्याणकारी योजनाएं केवल कागजों तक सिमटकर रह गई हैं। यह गंभीर आरोप चारामा विकासखंड सरपंच संघ एवं पंचों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए।

सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले लगभग एक वर्ष से ग्राम पंचायतों में कोई ठोस विकास कार्य नहीं हो पा रहा, जिससे आम ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि पंचायतों में केवल जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का काम ही हो रहा है, जबकि विकास से जुड़ी अधिकांश योजनाएं पूरी तरह बंद पड़ी हैं।

64 पंचायतों की डीएमएफ राशि रोके जाने का आरोप

सरपंच संघ ने आरोप लगाया कि चारामा विकासखंड की 64 ग्राम पंचायतों को मिलने वाली डीएमएफ (जिला खनिज निधि) की राशि रोकी गई है, जिससे सड़क, नाली, पेयजल, भवन सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

मनरेगा ठप, ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ी

संघ का कहना है कि मनरेगा योजना के तहत रोजगारमूलक कार्य शुरू नहीं हो पा रहे, जिससे ग्रामीण मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। वहीं 15वें वित्त आयोग की राशि समय पर जारी नहीं होने से पंचायतों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

कलेक्टर की अनुपस्थिति और कथित दुर्व्यवहार पर नाराजगी

प्रेस वार्ता के दौरान सरपंच संघ ने जिला प्रशासन के रवैये पर भी नाराजगी जाहिर की। संघ का आरोप है कि जब भी सरपंच अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टर से मिलने जाते हैं, तो या तो उन्हें अनुपस्थित बताया जाता है या फिर कथित रूप से दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, जिससे जनप्रतिनिधियों का अपमान हो रहा है।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो उग्र आंदोलन

सरपंच संघ ने जिला प्रशासन से जल्द सभी लंबित मांगों का समाधान करने की मांग की है। चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी दिनों में मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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