
FIR न लिखने, अवैध वसूली और जुए–सट्टे को संरक्षण देने के गंभीर आरोप
कोरबा।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का सिविल लाइन रामपुर थाना—जहां न्यायालय, कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों के शासकीय आवास स्थित हैं—आज खुद सवालों के कठघरे में खड़ा नजर आ रहा है। कारण हैं, थाना प्रभारी प्रमोद दंसेना, जिन पर एक के बाद एक गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और पीड़ितों का आरोप है कि थाना प्रभारी न केवल गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज करने से बचते रहे, बल्कि निजी लाभ के लिए आरोपियों को संरक्षण भी दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में, गंभीर आरोपों के बावजूद, थाना प्रभारी का एक साल से अधिक समय तक उसी पद पर बने रहना, पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
वीडियो सूत्र कोरबा न्यूज टुडे से
थाने से न्याय नहीं, अपमान मिला
पीड़ित युवती ने कैमरे पर बयां किया दर्द
हाल ही में एक युवती शारीरिक शोषण की शिकायत लेकर सिविल लाइन थाना पहुंची, लेकिन आरोप है कि वहां उसे न्याय देने के बजाय डराया गया, अपमानित किया गया और थाने से भगा दिया गया।
थाने से बाहर निकलकर युवती ने कैमरे के सामने अपनी आपबीती सुनाई, जिसमें उसने स्पष्ट कहा कि मदद की गुहार लगाने पर उसकी बात तक नहीं सुनी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक घटना नहीं है, बल्कि इस थाने में पीड़ितों के साथ ऐसा व्यवहार लगातार होता आ रहा है।
बांकीमोगरा कार्यकाल भी रहा विवादों से घिरा
थाना प्रभारी प्रमोद दंसेना का पूर्व पदस्थापन बांकीमोगरा थाना में भी विवादों में रहा है। आरोप हैं कि उस दौरान जुआ और सट्टा जैसे अवैध कारोबार को खुला संरक्षण मिला, जिससे कई परिवार बर्बादी के कगार पर पहुंच गए।
इतना ही नहीं, कोरबा न्यायालय द्वारा अवमानना से जुड़े एक मामले में गैर-जमानती धाराओं के तहत अपराध दर्ज करने के आदेश के बावजूद, आरोप है कि मामले को पुलिस स्तर पर कमजोर कर अदालत में प्रस्तुत किया गया। यह प्रकरण आज भी न्यायालय में लंबित बताया जा रहा है।
पुलिस की कार्यशैली पर उठते सवाल
लगातार सामने आ रहे मामलों ने थाना प्रभारी की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होती, तो पीड़ितों को दर-दर भटकना नहीं पड़ता।
ये आरोप सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं।
लोकसदन पीड़ितों के साथ
लोकसदन परिवार स्पष्ट रूप से पीड़ितों के साथ खड़ा है। ऐसे आरोप न केवल आम जनता के भरोसे को तोड़ते हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था की साख पर भी गहरा आघात पहुंचाते हैं। लोकसदन ऐसे मामलों पर लगातार नजर बनाए हुए है और सच्चाई को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जनता से अपील
यदि थाना प्रभारी प्रमोद दंसेना से जुड़े कोई पुराने या नए मामले, शिकायतें, दस्तावेज़ या प्रमाण आपके पास हैं, तो उन्हें लोकसदन परिवार के समक्ष साझा करें।
आपकी आवाज़ को मंच मिलेगा, आपकी लड़ाई में लोकसदन आपके साथ खड़ा रहेगा।
👉 आने वाले एक-दो दिनों में रायपुर और कोरबा से एक साथ प्रकाशित होने वाले लोकप्रिय दैनिक अख़बार और लोकसदन टीवी न्यूज़ चैनल पर इस पूरे मामले को और अधिक विस्तार और साक्ष्यों के साथ प्रसारित किया जाएगा।






